उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। धर्मनगरी अयोध्या में चुनावी तैयारियों का असर साफ दिखाई देने लगा है, जहां विपक्षी समाजवादी पार्टी समय रहते अपना समीकरण साधने और प्रत्याशी स्तर पर बिसात बिछाने में जुट गई है। दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय विधायक वेद प्रकाश गुप्ता का पिछला कार्यकाल जनचर्चा के केंद्र में है। स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और दुकानदारों के बीच विधायक के कामकाज और जनसंपर्क को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। शहर में बुनियादी ढांचे के विकास को सराहा तो जा रहा है, लेकिन प्रतिनिधि की व्यक्तिगत दूरी और स्थानीय असुविधाओं को लेकर नाराजगी भी खुलकर सामने आ रही है।
विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत
अयोध्या में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव दर्ज किए गए हैं। श्री राम मंदिर निर्माण के बाद से शहर के मुख्य मार्गों के चौड़ीकरण, विद्युतीकरण, पेयजल आपूर्ति, सौंदर्यीकरण और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया गया है। नए यातायात प्रबंधन और पर्यटक सुविधाओं के विस्तार को कई नागरिक विकास का प्रत्यक्ष प्रमाण मानते हैं। हालांकि, इस मुख्य विकास के पीछे स्थानीय निवासियों की बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। आंतरिक मोहल्लों की टूटी सड़कें, जल निकासी की लचर व्यवस्था, आए दिन लगने वाला ट्रैफिक जाम और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी जैसे मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। लोगों का कहना है कि बुनियादी ढांचे की रफ्तार तो बढ़ी है, लेकिन जनप्रतिनिधि के सुलभ न होने से जनता में निराशा बढ़ी है।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का बढ़ता आक्रोश
स्थानीय नागरिक ध्रुव गुप्ता ने वर्तमान विधायक के कामकाज पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि अयोध्या के आम नागरिक और व्यापारी वर्तमान भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता के रवैये से काफी दुखी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक किसी भी नागरिक के सुख-दुख या व्यक्तिगत समस्याओं में सहभागी नहीं बनते। ध्रुव गुप्ता का दावा है कि इस बार जनता बदलाव के मूड में है और आगामी चुनाव में सपा प्रत्याशी पवन पांडे की जीत तय है, जिससे राज्य में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनेगी। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि विकास कार्यों की आड़ में केवल भाजपा नेताओं की प्रगति हुई है, जबकि अयोध्या के वास्तविक मुद्दों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी और पवन पांडे लगातार व्यापारियों व आम परिवारों के बीच संपर्क बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि जिस तरह लोकसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था, उसी तरह विधानसभा चुनाव में भी नतीजे देखने को मिलेंगे।
सौंदर्यीकरण बनाम जनसंपर्क की अनदेखी
क्षेत्र के एक अन्य निवासी ओमप्रकाश ने विकास कार्यों और प्रशासनिक कमियों का संतुलित आकलन पेश किया। उनका कहना है कि 2027 के भावी चुनाव के परिप्रेक्ष्य में यदि देखा जाए तो अयोध्या में बुनियादी स्तर पर काम हुआ है। शहर के ऐतिहासिक घाटों, प्राचीन कुंडों का जीर्णोद्धार और मुख्य सड़कों का निर्माण सराहनीय कदम हैं। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने विधायक की कार्यशैली पर सवाल उठाए। ओमप्रकाश के अनुसार, जनप्रतिनिधि को अपनी क्षेत्र की जनता के बीच जाकर उनकी व्यक्तिगत समस्याओं को सुनना चाहिए था, जिसमें भारी कमी रही। उन्होंने रेखांकित किया कि शहर में पानी की उचित निकासी न होना, कई इलाकों में जलभराव और वीआईपी आवाजाही के कारण लगने वाले लंबे जाम से आम जनता बेहद परेशान रहती है। इन व्यावहारिक समस्याओं के निस्तारण के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता जताई गई है।
व्यापारिक वर्ग में संवादहीनता से रोष
स्थानीय दुकानदार सुनील ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि क्षेत्र का व्यापारिक वर्ग विधायक के रवैये से असंतुष्ट है। उनके अनुसार, विधायक ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान कभी दुकानदारों या स्थानीय निवासियों का हाल-चाल लेने की कोशिश नहीं की। सुनील का कहना है कि जिस रास्ते पर वे व्यापार करते हैं, वहां जनप्रतिनिधि का कभी आना-जाना ही नहीं हुआ। जब कोई विधायक अपनी जनता के बीच पहुंचेगा ही नहीं, तो लोग उसके पक्ष में समर्थन कैसे देंगे। इसी संवादहीनता के कारण क्षेत्र की जनता ने इस बार चुनाव में नया चेहरा चुनने का मन बना लिया है। दुकानदारों का मानना है कि जनप्रतिनिधि का जनता के साथ सीधा संवाद और निरंतर उपस्थिति ही लोकतंत्र की प्राथमिक शर्त होनी चाहिए, जिसका अभाव इस कार्यकाल में साफ नजर आया।



















