बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक अहम अध्याय की शुरुआत हुई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और मौजूदा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने बिहार विधान परिषद के सदस्य के तौर पर अपना पहला भाषण दिया। उच्च सदन में अपने इस ऐतिहासिक संबोधन के दौरान उन्होंने जहां एक तरफ अपने पिता के बीस सालों के कार्यकाल को याद किया, वहीं दूसरी तरफ वर्तमान सरकार के लक्ष्यों के प्रति अपनी पूरी प्रतिबद्धता भी जाहिर की।
लोकतांत्रिक परंपराओं और एकजुटता पर जोर
अपने भाषण की शुरुआत में निशांत कुमार ने सबसे पहले सभापति को विधिवत रूप से प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने सदन में मौजूद सभी सदस्यों का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए सभी को मिलकर एक टीम की तरह काम करना चाहिए। उनका मानना था कि आपसी सहयोग से ही लोकतांत्रिक परंपराओं को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। खास तौर पर पहली बार चुनकर आए युवा नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने एक अहम अपील की। उन्होंने इन नए सदस्यों से कहा कि सदन के भीतर कदम रखने से पहले उन्हें हमेशा इस पवित्र जगह की समृद्ध विरासत, इसके गौरव और इसकी गरिमा को अपने जहन में रखना चाहिए।
'न्याय के साथ विकास' के मूल मंत्र का जिक्र
स्वास्थ्य मंत्री के भाषण का एक बड़ा हिस्सा राज्य के विकास मॉडल पर केंद्रित रहा। उन्होंने सदन में बैठे हर एक सदस्य को न्याय के साथ विकास वाले उस पुराने संकल्प की याद दिलाई। उन्होंने विस्तार से बताया कि इसी बुनियादी सिद्धांत के आधार पर उनके पिता के नेतृत्व वाली सरकार ने लगातार दो दशकों तक राज्य की सेवा की। वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में इसी संकल्प को पूरी ईमानदारी और ताकत के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
बीस वर्षों की अहम योजनाओं और उपलब्धियों की चर्चा
पिछले बीस सालों के सरकारी कामकाज का विश्लेषण करते हुए निशांत कुमार ने कई अलग-अलग क्षेत्रों की उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार सृजन के क्षेत्र में हुए बड़े और उल्लेखनीय कार्यों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह से समाज के हर तबके के लिए योजनाएं जमीन पर उतारी गईं। इनमें दलितों, महादलितों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों, मजदूरों, युवाओं और महिलाओं के उत्थान के लिए चलाए गए विशेष कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण अभियान, राज्यव्यापी शराबबंदी, आजीविका को बढ़ावा देने वाली जीविका योजना और पर्यावरण से जुड़े जल-जीवन-हरियाली अभियान का खास तौर पर उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इन्हीं विशिष्ट और महत्वाकांक्षी योजनाओं ने बिहार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बिल्कुल नई और अलग पहचान दिलाई है।
सामाजिक बदलाव के हथियार के रूप में राजनीति
जनसेवा के व्यापक उद्देश्य पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उनके पिता नीतीश कुमार के बीस साल के शासनकाल ने एक बड़ी बात साबित की है। उन्होंने कहा कि यह लंबा कार्यकाल इस बात का जीता-जागता सबूत है कि राजनीति सिर्फ सत्ता हासिल करने का कोई साधन भर नहीं है। इसके उलट, यह समाज में बड़े और सकारात्मक बदलाव लाने का एक बेहद प्रभावी और ताकतवर माध्यम हो सकती है। निशांत कुमार ने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि विकास की इस निरंतर यात्रा और सुशासन की स्थापित परंपरा को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में और भी अधिक तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
केंद्र का सहयोग और आगे का मार्गदर्शन
गठबंधन की राजनीति और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करते हुए निशांत कुमार ने नीतीश कुमार की भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने सदस्यों को आश्वस्त किया कि भले ही पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्यसभा नहीं जाने का एक बड़ा फैसला लिया है, लेकिन उनका अनुभवी मार्गदर्शन मौजूदा गठबंधन और राज्य सरकार को लगातार मिलता रहेगा। राज्य के भविष्य को लेकर उन्होंने काफी सकारात्मक उम्मीद जताई। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के मजबूत सहयोग से बिहार को एक विकसित और पूरी तरह से समृद्ध राज्य बनाने का जो लक्ष्य रखा गया है, वह हर हाल में पूरा होगा। अपने पहले संबोधन का समापन करते हुए निशांत कुमार ने उन सभी सदस्यों का दिल से आभार व्यक्त किया जिन्होंने उन्हें शुभकामनाएं दी थीं। अंत में उन्होंने नवनिर्वाचित सदस्यों को एक बार फिर याद दिलाया कि वे लोकतांत्रिक परंपराओं का पूरा सम्मान करें और जनता की उन सभी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करें जिनके लिए उन्हें चुना गया है।




















