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यूपी चुनाव से पहले बसपा का कड़ा एक्शन, मायावती ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनन्त कुमार मिश्रा को निकालाराजनीति
13 अग॰ 2026, 3:54 pm (11 घंटे पहले)· 2

यूपी चुनाव से पहले बसपा का कड़ा एक्शन, मायावती ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनन्त कुमार मिश्रा को निकाला

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनन्त कुमार मिश्रा उर्फ अन्टू मिश्रा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है।

उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, और सभी प्रमुख दल अपनी सांगठनिक तैयारियों में जुट गए हैं। इसी चुनावी माहौल के बीच बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अनुशासनहीनता पर बड़ा प्रहार किया है। पार्टी नेतृत्व ने पूर्व राज्य स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ नेता अनन्त कुमार मिश्रा उर्फ अन्टू मिश्रा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में बहुजन समाज पार्टी से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। कानपुर क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में काफी प्रभाव रखने वाले अनन्त कुमार मिश्रा के खिलाफ हुई इस अचानक कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति में नया हलचल पैदा कर दिया है।

मायावती का सख्त कदम और कार्यकर्ताओं को संदेश

पार्टी की ओर से की गई इस बड़ी कार्रवाई की जानकारी खुद बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने दी। उन्होंने अपने आधिकारिक X पर पोस्ट के जरिए सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रहे अनन्त कुमार मिश्रा उर्फ अन्टू मिश्रा को उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण तत्काल प्रभाव से बसपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। मायावती ने अपने संदेश में साफ किया कि चुनाव के इस दौर में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसके साथ ही मायावती ने पार्टी के प्रत्येक स्तर के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को एक विशेष अपील भी जारी की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव का माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है। ऐसे में पार्टी से जुड़े हर व्यक्ति को विरोधियों के विभिन्न हथकंडों जैसे साम, दाम, दंड और भेद से सतर्क रहना होगा। मायावती ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ बसपा के अंबेडकरवादी मिशन को आगामी विधानसभा आम चुनाव में विजयी बनाने के लिए जी-जान से जुट जाएं।

छात्र राजनीति से मंत्री पद तक: अन्टू मिश्रा का चार दशकों का राजनीतिक सफर

अनन्त कुमार मिश्रा का राजनीतिक इतिहास करीब चार दशक पुराना है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत 1980 के दशक में छात्र राजनीति के माध्यम से की थी। वह कानपुर के प्रसिद्ध क्राइस्ट चर्च कॉलेज छात्र संघ के सचिव चुने गए थे। छात्र राजनीति में अपनी पहचान बनाने के बाद वह कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के उत्तर प्रदेश महासचिव बने। इसके बाद उन्होंने सक्रिय दलीय राजनीति में कदम रखा और समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया।

वर्ष 1993 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अनन्त कुमार मिश्रा को कानपुर की जनरलगंज विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन इस चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का रुख किया। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में वह बीजेपी के टिकट पर कानपुर की आर्यनगर सीट से मैदान में उतरे, परंतु यहां भी उन्हें सफलता नहीं मिली और वे चुनाव हार गए।

कानपुर की राजनीति और बसपा में एंट्री

लगातार दो चुनावी असफलताओं के बाद अनन्त कुमार मिश्रा ने वर्ष 2006 में बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। बसपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें वर्ष 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कानपुर की सरसौल विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया। हालांकि, इस चुनाव में भी अन्टू मिश्रा स्वयं अपनी सीट जीतने में असफल रहे, लेकिन बसपा ने पूरे प्रदेश में पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाई।

चुनाव हारने के बावजूद मायावती ने अनन्त कुमार मिश्रा पर अपना भरोसा जताया और उन्हें अपनी सरकार में स्वास्थ्य राज्य मंत्री का दायित्व सौंपा। इसके बाद संगठन ने उन्हें फर्रुखाबाद सदर सीट से उपचुनाव लड़वाया, जहां से जीत हासिल करने के बाद वे उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्ण कैबिनेट स्वास्थ्य मंत्री बनाए गए। कानपुर और आसपास के जिलों में ब्राह्मण चेहरे के रूप में उनका काफी राजनीतिक वजन माना जाता रहा है।

विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में अनुशासन का कड़ा संदेश

बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा चुनाव से ठीक पहले किए जा रहे इन कड़े फैसलों को पार्टी संगठन में अनुशासन बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले 2 अगस्त को भी मायावती ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व राज्यसभा सांसद और अपने समधी अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर कर दिया था। अशोक सिद्धार्थ पर भी पार्टी के दिशा निर्देशों के उल्लंघन और अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें बसपा की सभी सांगठनिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था।

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं पर लगातार हो रही इस कार्रवाई से मायावती ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि चुनावी अभियान के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों या अंदरूनी गुटबाजी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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सवाल-जवाब

मायावती ने किस पूर्व मंत्री को बसपा से निकाला है?
मायावती ने उत्तर प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनन्त कुमार मिश्रा उर्फ अन्टू मिश्रा को पार्टी से बाहर कर दिया है।
अन्टू मिश्रा को पार्टी से क्यों निकाला गया?
बसपा नेतृत्व ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने के बाद तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया है।
अन्टू मिश्रा का राजनीतिक इतिहास क्या रहा है?
वह 1980 के दशक में क्राइस्ट चर्च कॉलेज छात्र संघ सचिव रहे, NSUI, सपा और बीजेपी में रहने के बाद 2006 में बसपा में आए और बाद में स्वास्थ्य मंत्री बने।
इससे पहले मायावती ने किस बड़े नेता पर कार्रवाई की थी?
2 अगस्त को मायावती ने पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को पार्टी के नियमों के उल्लंघन और अनुशासनहीनता के आरोप में निकाला था।
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