किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में कूटनीतिक गतिविधियों का दौर तेज हो चुका है। शहर के अला-अरचा स्टेट रेजिडेंस परिसर में स्थित ऐतिहासिक अक्साकल मीटिंग रूम इस समय एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक संवाद का गवाह बन रहा है। दुनिया भर के कूटनीतिक गलियारों और रक्षा विश्लेषकों की निगाहें इस कमरे के भीतर चल रही चर्चाओं पर टिकी हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस बैठक में आमने-सामने बैठकर द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर मंथन कर रहे हैं। शंघाई सहयोग संगठन के इस शिखर सम्मेलन के इतर आयोजित की जा रही इस मुलाकात से दोनों देशों के बीच पारंपरिक और मजबूत होते रिश्तों की एक अलग तस्वीर सामने आ रही है।
प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी और कूटनीतिक माहौल
इस उच्चस्तरीय बैठक का दायरा केवल दोनों नेताओं तक सीमित नहीं है। रूसी राष्ट्रपति के साथ उनके देश का एक बड़ा और प्रभावशाली प्रतिनिधिमंडल भी इस चर्चा में शामिल हुआ है। इस प्रतिनिधिमंडल में रूस के कई प्रमुख मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सलाहकार और शासन के शीर्ष अधिकारी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। जब यह बैठक शुरू हुई, तो रूसी राष्ट्रपति के हावभाव में पुरानी दोस्ती और आपसी भरोसे की झलक साफ तौर पर महसूस की जा सकती थी। उन्होंने अपनी शुरुआती टिप्पणियों में भारत और रूस के बीच सदियों पुराने और ऐतिहासिक संबंधों की खुलकर सराहना की।
युद्ध समाप्त करने की भारत की निरंतर अपील
इस अहम कूटनीतिक मंच पर भारत ने अपने पुराने रुख को एक बार फिर मजबूती से दोहराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के दौरान मौजूदा वैश्विक संघर्ष को समाप्त करने और शांति का रास्ता अपनाने की जोरदार वकालत की है। भारत का यह रुख लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि कूटनीति और संवाद के माध्यम से ही दुनिया भर में चल रहे तनावों का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। बिश्केक में हो रही इस द्विपक्षीय चर्चा के दौरान अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता का मुद्दा केंद्र में बना हुआ है, जिस पर दोनों पक्षों के बीच गहन विचार-विमर्श जारी है।



















