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दमोह में लुटेरी दुल्हन का पर्दाफाश, शादी के दो दिन बाद नकदी और गहने लेकर फरार हुई महिलामध्य प्रदेश
31 अग॰ 2026, 8:20 pm (58 दिन पहले)· 3

दमोह में लुटेरी दुल्हन का पर्दाफाश, शादी के दो दिन बाद नकदी और गहने लेकर फरार हुई महिला

मध्य प्रदेश के दमोह जिले में शादी के नाम पर ठगी करने वाले एक अंतर-राज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है जिनके पास से नकदी और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।

मध्य प्रदेश के दमोह जिले की देहात पुलिस ने शादी का झांसा देकर ठगी करने वाले एक संगठित अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को दबोचा है। हाल ही में सामने आए इस मामले में एक महिला शादी के महज दो दिन के भीतर ही घर में रखे आभूषण और नकदी समेटकर चंपारण हो गई थी। इस तरह की वारदातों का दायरा लगातार फैलता जा रहा है, जैसा कि सीहोर में लुटेरी दुल्हन से जुड़े पूर्व के प्रकरण में भी देखने को मिला था जहां पीड़ित परिवार ने पुलिस के दरवाजे पर पहुंचकर गुहार लगाई थी।

कैसे बुना गया धोखे का जाल

बांसा गांव निवासी राम कौशल विश्वकर्मा ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि स्थानीय बिचौलिये नर्मदा पटेल ने 20 अप्रैल को रंगीर मंदिर में उनका विवाह खुशबू राजपूत के साथ तय कराया था। इस युवती का परिचय रांची जबलपुर की रहने वाली के रूप में कराया गया था। इस सौदेबाजी के एवज में उन्होंने खुशबू को 1.7 लाख रुपये नकद और लगभग 2.4 लाख रुपये मूल्य के आभूषण सौंपे थे। विवाह के ठीक दो दिन बाद वह अपनी बड़ी बहन से मिलने के बहाने गहने लेकर वहां से निकली और फिर कभी लौटकर नहीं आई। जब परिवार ने युवती और बिचौलियों से संपर्क करने के तमाम प्रयास विफल होते देखे, तब उन्होंने थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

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मुख्य आरोपी महिला और साथियों की गिरफ्तारी

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सागर जिले के कनेरा गांव की रहने वाली नर्मदा पटेल और मालती पटेल को धर दबोचा। इस पूरे षड्यंत्र का तीसरा किरदार नीरज पटेल पहले से ही पन्ना जिला जेल में बंद है जो इसी आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है। छानबीन के दौरान अधिकारियों ने मालती पटेल के मोबाइल फोन से कई युवतियों के फर्जी आधार कार्ड बरामद किए हैं, जिससे साफ होता है कि यह गिरोह अलग-अलग पहचान पत्र तैयार कर लगातार इस तरह के फ्रॉड को अंजाम देता था। शुरुआती तफ्तीश से संकेत मिले हैं कि राजस्थान के कोटा शहर में भी इसी तर्ज पर एक वारदात को अंजाम दिया गया था और जांच का दायरा बढ़ने पर कई अन्य पीड़ितों के सामने आने की संभावना है।

अपराध का तरीका और बरामद सामान

पुलिस के अनुसार इस गिरोह का कारिंदा बनने वाले लोग पैसों के लेन-देन के बाद मंदिरों में या बिना किसी औपचारिकता के जल्दबाजी में शादियां संपन्न कराते थे। इसके बाद नई नवेली दुल्हन को कीमती सामान और नकदी लेकर वहां से चंपारण होने का निर्देश दिया जाता था। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 77,000 रुपये नकद और तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं। विभिन्न जिलों की साइबर और मैदानी टीमें इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसके तार कहां-कहां जुड़े हुए हैं। इस तरह की घटनाएं इस क्षेत्र में सक्रिय उस संगठित अपराध को उजागर करती हैं जहां बिचौलियों की मिलीभगत और फर्जी दस्तावेजों के सहारे निर्दोष लोगों को ठगा जाता है। ऐसी ही एक अन्य घटना ग्वालियर में लुटेरी दुल्हन द्वारा अंजाम दी गई थी, जहां शादी के अगले ही दिन दुल्हन आभूषण लेकर फरार हो गई थी।

सवाल-जवाब

दमोह पुलिस ने कुल कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया है?
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी महिला सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
शादी कब और कहां तय हुई थी?
शादी 20 अप्रैल को रंगीर मंदिर में तय हुई थी।
शिकायतकर्ता को कुल कितने रुपये और गहनों का नुकसान हुआ?
शिकायतकर्ता ने 1.7 लाख रुपये नकद और लगभग 2.4 लाख रुपये कीमत के गहने दिए थे।
गिरोह के पास से क्या बरामद हुआ है?
पुलिस ने आरोपियों के पास से 77,000 रुपये नकद और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
तीसरा आरोपी इस समय कहां है?
तीसरा आरोपी नीरज पटेल पहले से ही पन्ना जिला जेल में बंद है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·58 दिन पहले

दमोह की यह घटना केवल एक व्यक्तिगत ठगी नहीं, बल्कि संगठित अंतर-राज्यीय अपराध और प्रशासनिक विसंगतियों का गंभीर परिणाम है। फर्जी आधार कार्ड और बिचौलियों का नेटवर्क यह साबित करता है कि ऐसे गिरोह कानून की कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं। जब तक राज्य और केंद्र स्तर की एजेंसियां आपस में समन्वय स्थापित कर इस रैकेट के वित्तीय और सामाजिक ताने-बाने पर कड़ा प्रहार नहीं करतीं, तब तक इस तरह के मामलों पर रोक लगाना मुश्किल होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·58 दिन पहले

अर्जुन का विश्लेषण सही है, किंतु वित्तीय और डिजिटल पहलुओं पर भी गौर करना आवश्यक है। जब्त किए गए मोबाइलों से मिले फर्जी आधार कार्ड और नकद लेन-देन यह दर्शाते हैं कि यह गिरोह समानांतर अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर काम कर रहा है। जब तक बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स के जरिए होने वाले संदिग्ध भुगतानों पर कड़ाई नहीं होगी, तब तक ऐसे संगठित आर्थिक अपराधों की जड़ों को मिटाना असंभव होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·58 दिन पहले

दमोह का यह मामला केवल एक अकेली ठगी नहीं, बल्कि संगठित अंतर-राज्यीय अपराध का क्लासिक उदाहरण है जहाँ फर्जी आधार कार्ड और सुनियोजित बिचौलिया तंत्र का इस्तेमाल किया गया। बरामद मोबाइल से मिले जाली दस्तावेजों और कोटा तक जुड़े तारों से स्पष्ट है कि जांच का दायरा केवल स्थानीय ठगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वित्तीय ट्रेल और साइबर सबूतों के आधार पर पूरे नेटवर्क के सरगनाओं तक पहुंचना अनिवार्य है।

Rohan Verma@rohan-verma·58 दिन पहले

यह संगठित गिरोह जिस तरह से मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक फर्जी आधार कार्ड और मंदिरों में जल्दबाजी में विवाह के जरिए भोले-भाले परिवारों को निशाना बना रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। इस तरह के मामलों में अक्सर पुलिस की कार्रवाई केवल बिचौलियों की गिरफ्तारी तक सिमट कर रह जाती है, जबकि जरूरत इस बात की है कि पूरे अंतर-राज्यीय नेटवर्क, फर्जी आईडी बनाने वाले सिंडिकेट और वित्तीय लेन-देन की गहराई से तहकीकात हो ताकि इस प्रकार की वारदातों पर स्थायी अंकुश लगाया जा सके।

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