छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) को लेकर सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला अब और गरमा गया है। राज्य के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम एक पत्र लिखा है, जिसने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। इस चिट्ठी में विजय शर्मा ने यह दावा किया है कि बीते ढाई साल के भीतर साय सरकार ने पीएम आवास योजना के मोर्चे पर बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। साथ ही उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उस दौर में पीएम आवास के लिए राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले अनिवार्य 40 प्रतिशत हिस्से (मैचिंग ग्रांट) को रोक दिया गया था, और इसी वजह से प्रदेश के लाखों गरीब परिवार अपने हक का पक्का मकान नहीं पा सके।
मुख्यमंत्री को लिखे इस पत्र के जरिए विजय शर्मा ने कांग्रेस के भीतर के पुराने विवादों और मतभेदों पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस सरकार के समय के तत्कालीन पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव के चर्चित इस्तीफे का खास तौर पर उल्लेख किया। चिट्ठी में विजय शर्मा ने लिखा कि कांग्रेस के शासनकाल में जब गरीबों के आवास के लिए सरकार पर्याप्त रकम जुटा नहीं पाई, तब सिंहदेव अपनी ही सरकार की नीतियों और बेरुखी से आहत होकर भारी मन से पद से हट गए थे। विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री को यह भी समझाया कि किस तरह पिछली सरकार ने गरीबों का हक रोके रखा, जबकि मौजूदा सरकार ने महज ढाई साल में इस योजना को रिकॉर्ड रफ्तार दे दी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को लिखे इसी पत्र पर अब पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने भी उतने ही बेबाक और संयत अंदाज में जवाब दिया है। तंज कसते हुए सिंहदेव ने कहा कि "पता नहीं क्या वजह है, लेकिन इन दिनों सत्ता पक्ष के मंत्री मुझे बहुत ज्यादा याद कर रहे हैं, और इस तरह याद किए जाने के लिए मैं उनका आभारी हूं।" अपनी राजनीतिक साफगोई दिखाते हुए सिंहदेव ने पत्र में उठाए गए उस बिंदु को खुलकर स्वीकार कर लिया कि कांग्रेस के दौर में पीएम आवास को रफ्तार नहीं मिल पाई थी और जब वे अपनी जिम्मेदारी निभा पाने में असमर्थ रहे, तो उन्होंने पद से किनारा कर लिया। हालांकि उन्होंने साय सरकार पर पलटवार करते हुए यह भी आरोप जड़ दिया कि इस वक्त पीएम आवास के नाम पर हितग्राहियों से 10-10 हजार रुपये की अवैध कटौती की जा रही है और ग्रामीणों को अपने मकान पूरे करने के लिए अपनी जेब से पैसे लगाने पड़ रहे हैं।













