नई दिल्लीः लोकसभा में पेपर लीक रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर चल रही चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सदन में बोलते हुए कहा कि जब एक केंद्रीय मंत्री सदन में पहुंचे, तो बाहर एनडीए के सांसदों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सदस्यों को कितनी बड़ी राहत महसूस हुई होगी और वे किस गंभीर संकट से बाल-बाल बचे हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सिर्फ एक मंत्री को पद से हटाकर असल में प्रधानमंत्री को बचाया गया है।
छात्रों के गुस्से और आंदोलन के आगे झुकी सरकार
सपा नेता ने आगे कहा कि जब से बीजेपी की सरकार सत्ता में आई है, तब से देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और विश्वविद्यालयों के तंत्र को कमजोर करने के साथ-साथ हर व्यवस्था का एकीकरण करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन नीतियों के कारण देश के युवाओं के भीतर असंतोष और गुस्सा लगातार सुलगता रहा। विशेष तौर पर नीट की परीक्षा से जुड़े विवाद सामने आने के बाद न केवल देश भर के छात्र सड़कों पर उतरे, बल्कि उन्हें अपने परिवारों का भी भरपूर समर्थन मिला। इसी व्यापक समर्थन के चलते यह आंदोलन इतना विशाल रूप ले लिया कि अंततः दुनिया के सबसे बड़े दल की सरकार को भी युवाओं के आगे झुकना ही पड़ गया।
उत्तर प्रदेश और मंदिरों में गड़बड़ी का जिक्र
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में कुल मिलाकर 20 से ज्यादा परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भगवान श्रीराम को अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे, दान और चंदे में भी गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग मंदिरों में मिलने वाले चढ़ावे की चोरी को रोकने में नाकाम रहे हैं, वे भला परीक्षाओं के पेपर लीक जैसी बड़ी समस्याओं को कैसे रोक सकते हैं। उनके मुताबिक, जब तक व्यवस्था में कोई बड़ा और बुनियादी बदलाव नहीं लाया जाता, तब तक इस तरह के गंभीर मुद्दे समाप्त होने वाले नहीं हैं। सरकार अपनी जिद छोड़कर इसलिए झुकी क्योंकि उसके अपने सांसदों के भीतर भी राजनीतिक अस्थिरता का डर पैदा होने लगा था। जब सत्ता पक्ष के सांसद ही भविष्य को लेकर चिंतित होने लगते हैं, तो सरकार पर स्वाभाविक रूप से भारी दबाव बन जाता है।
किरेन रिजिजू के पलटवार पर अखिलेश का जवाब
सपा प्रमुख के इन तीखे हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में अपनी बात रखी और पूछा कि कौन सी स्थिति ज्यादा बेहतर है, वह जिसमें सरकार छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए संसद में खुद संशोधन बिल लेकर आती है, या फिर वह जिसमें सरकार किसी भी विरोध को पूरी तरह कुचलने के लिए देश भर में आपातकाल थोप देती है।
केंद्रीय मंत्री के इस बयान का कड़ा जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने इमरजेंसी के दौर को खुद प्रत्यक्ष रूप से तो नहीं देखा है, लेकिन उस दौर की कुछ झलकियां और प्रशासनिक सख्ती उन्होंने खुद देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नजदीक से देखी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि असली मुद्दा किसी नए कानून का नहीं बल्कि सरकार की मंशा का है। अखिलेश ने कहा कि कानून चाहे जितने बना लिए जाएं, लेकिन जब तक नीयत साफ नहीं होगी, तब तक परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आना असंभव है। अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौर के बाद भी देश में बड़ा राजनीतिक परिवर्तन हुआ था और आने वाले समय में भी ऐसा बदलाव जरूर देखने को मिलेगा।



















