हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से लोकसभा सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयानों के कारण चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन समाप्त होने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, कंगना रनौत ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक स्टोरी साझा की है। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के विरोध प्रदर्शन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान बनाई जाने वाली रील्स और उनमें उपयोग की जा रही भाषा पर गहरी आपत्ति जताई है, साथ ही इस पूरी स्थिति को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सीजेपी के प्रदर्शन पर फूटा गुस्सा
कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए लिखा कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी एक ही स्थान पर इतनी बदसूरत चीजें एक साथ नहीं देखी थीं। उन्होंने जेन जेड के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो रही रील्स का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें देखकर उल्टी जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। कंगना ने आगे लिखा कि इन लोगों के बात करने का तरीका और उनकी भाषा बहुत ही ज्यादा घटिया है। उनके अनुसार, उन्होंने अपने पूरे जीवन में किसी भी फ्रेम में इतनी भद्दी और निम्न स्तर की चीजें एक साथ देखने को नहीं मिली थीं।
परवरिश पर उठाए गंभीर सवाल
अपने इस तीखे सोशल मीडिया पोस्ट में कंगना रनौत ने सीजेपी प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने वाले युवाओं की परवरिश और पृष्ठभूमि पर भी कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए लिखा कि आखिर ऐसे लोगों को जन्म कौन दे रहा है और उनका लालन-पालन किस तरह की संस्कृति में हुआ है। उन्होंने देश की विविधता की सराहना करते हुए कहा कि भारत विभिन्न प्रकार के खूबसूरत, शालीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध लोगों का देश है। इसके विपरीत, जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं और बिल्कुल उसी रूप में बर्ताव करते हैं, वे इस दुनिया को अपनी गंदगी, कचरे और बदसूरती से मैला कर रहे हैं। कंगना ने यह भी कहा कि इन तमाम रील्स का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर इतना गहरा असर हुआ है कि उन्हें अब खुद को सामान्य करने के लिए डिजिटल डिटॉक्स का सहारा लेना पड़ रहा है।
पहले भी कर चुकी हैं तीखा हमला
यह पहला मौका नहीं है जब कंगना रनौत ने सीजेपी के इस विरोध प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी हो। इससे पहले 20 जुलाई को भी उन्होंने विपक्ष और इस आंदोलन से जुड़े लोगों पर जमकर निशाना साधा था। उस दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि किसी भी लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को इस तरह से दबाव डालकर झुकाया नहीं जा सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा था कि विपक्ष कभी भी सरकार को यह तय करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता कि किस व्यक्ति को पद पर रहना चाहिए और किसे हटाया जाना चाहिए। जनता के मत से चुनी गई सरकार के पास यह पूरा अधिकार सुरक्षित होता है कि वह देश और राज्य की शासन व्यवस्था को किस प्रकार चलाए। उन्होंने सलाह दी थी कि यदि विरोधियों को सरकार चलाने की इतनी ही तीव्र इच्छा है, तो उन्हें चुनावी मैदान में उतरकर सीधे सत्ता हासिल करनी चाहिए।


















