सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न पर मालिकाना हक को लेकर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच चल रहे कानूनी विवाद पर सुनवाई चल रही थी। अदालत कक्ष के भीतर चल रही गंभीर बहसों के बीच अचानक कोर्ट रूम नंबर-1 के बाहर से तेज संगीत की आवाज गूंजने लगी, जिससे कार्यवाही के दौरान कुछ पलों के लिए माहौल काफी हल्का हो गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत कक्ष में संगीत की आवाज सुनते ही तंज कसते हुए कहा कि अब लगता है कि नृत्य करने का वक्त आ गया है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि यह पता नहीं कौन कर रहा है और ऐसा प्रतीत होता है कि किसी ने चुनाव में जीत हासिल कर ली है। उनकी इस हास्यपूर्ण टिप्पणी पर courtroom में मौजूद लोगों की हंसी छूट गई।
मथुरा रोड से पैदल चलकर पहुंचे थे वरिष्ठ वकील
सुनवाई के बीच कपिल सिब्बल ने यह भी साझा किया कि उन्हें किस तरह कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि दोपहर के वक्त उन्हें मथुरा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक पैदल सफर तय करना पड़ा क्योंकि उनकी गाड़ी को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिल पा रही थी और भारी ट्रैफिक या व्यवस्था के कारण रास्ता बंद था।
इस वाकये पर बेंच के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने तुरंत चुटकी लेते हुए कहा कि बाहर लोकतंत्र पूरी तरह फल-फूल रहा है। इसके जवाब में सिब्बल ने सहमति जताते हुए कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है, कम से कम इस अदालत के भीतर तो स्थिति ऐसी ही है। इस हल्की-फुल्की बातचीत ने तनावपूर्ण माहौल को कुछ देर के लिए काफी सहज कर दिया।
CJI सूर्यकांत ने शेयर किया देर रात आया फोन कॉल
कार्यवाही के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने भी चुनावों से जुड़े एक वाकये का जिक्र किया। उन्होंने अदालत को बताया कि उन्हें बहुत अधिक रात बीते वक्त में चुनावों में हस्तक्षेप की मांग को लेकर एक-दो फोन कॉल्स आए थे।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कपिल सिब्बल ने न्यायपालिका के सामने आ रहे मामलों की प्रकृति पर अपनी राय रखी। उन्होंने अदालत को बताया कि ऐसे कई विषय और मुद्दे सुनवाई के लिए आ रहे हैं जिनका इस अदालत के अधिकार क्षेत्र से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है।



















