कर्नाटक की राजनीति में धर्मनिरपेक्षता और विचारधारा से जुड़ा नया विवाद पैदा हो गया है। डीके शिवकुमार सरकार में शहरी विकास मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। बीदर शहर में आयोजित एक सार्वजनिक मंच से उन्होंने सचेत किया कि देश को धार्मिक आधार पर ढालने की किसी भी कोशिश से अतीत का शोषक तंत्र फिर से हावी हो सकता है। उनके इस वक्तव्य के बाद राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक राजनैतिक बहस तेज हो गई है।
बीदर के कार्यक्रम में विचारधारा पर प्रहार
बीदर में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान यतींद्र सिद्धारमैया ने अपनी बात रखते हुए कहा कि धार्मिक गोलबंदी का मुख्य उद्देश्य समाज के कुछ वर्गों को अधिकारों से वंचित करना है। उन्होंने सीधा इशारा करते हुए कहा कि सांप्रदायिक ताकतें आम जनता को दबाने और अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए धर्म को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि ऐसी शक्तियों को पहचानकर उनके खिलाफ एकजुट होने की सख्त जरूरत है।
अपने संबोधन में उन्होंने अहिंसक संघर्ष के महत्व को रेखांकित किया। मंत्री के अनुसार, शोषक नीतियों का प्रतिरोध करना और सामाजिक बराबरी की मांग करना लोकतांत्रिक ताकतों की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनता है, तो इससे दमनकारी व्यवस्था वापस आ जाएगी।" यतींद्र सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की विचारधारा से केवल उन शक्तियों को बल मिलेगा जो समाज को बांटने का काम करती हैं।
राजनीतिक अधिकारों और पूर्वजों की सोच पर जोर
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए शहरी विकास मंत्री ने कहा कि समाज के सभी तबकों का कल्याण तभी संभव है जब वंचित और कमजोर वर्ग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों। उन्होंने जोर दिया कि राजनैतिक ताकत को सुरक्षित करना और संवैधानिक अधिकारों का दावा करना किसी भी समुदाय के उत्थान की पहली शर्त है। उनके अनुसार, देश के महापुरुषों और पूर्वजों ने इसी समानता वाले समाज का सपना देखा था, जिसे आगे बढ़ाना आज की पीढ़ी का मुख्य कर्तव्य है।
उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक समाज का हर हिस्सा एक मंच पर नहीं आता, तब तक सर्वांगीण विकास का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि पूर्वजों के बताए रास्ते पर चलकर ही हर वर्ग के कल्याण के लिए काम किया जा सकता है।
देश भर में जारी बहस और राजनीतिक घमासान
भारत में विभिन्न साधु-संतों, धार्मिक नेताओं और कुछ राजनीतिक हस्तियों द्वारा समय-समय पर हिन्दू राष्ट्र के निर्माण की वकालत की जाती रही है। ऐसे माहौल में पूर्व सीएम के बेटे द्वारा दी गई यह तीखी प्रतिक्रिया राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है। बीदर के इस भाषण के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है।
भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने इस बयान पर कड़ा एतराज जताया है। विपक्षी खेमे का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से बहुसंख्यक समाज की आस्था और भावना को ठेस पहुंचती है, और उन्होंने इसे कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी अपने नेता के रुख का बचाव करते हुए कह रही है कि उनका मकसद भारत के संविधान और धर्मनिरपेक्ष ढांचे को बचाना है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा दोनों पक्षों के बीच और बड़ा टकराव का रूप ले सकता है।



















