पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले स्थानीय राजनीति में भारी उबाल आ गया है। पुलिस ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को एक पुराने मामले में अचानक गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब कुछ समय पहले ही ममता बनर्जी ने कांग्रेस को अपना खुला समर्थन देने का ऐलान किया था। इस गिरफ्तारी के तुरंत बाद कांग्रेस आलाकमान ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक्शन शुरू कर दिया है। पार्टी के शीर्ष नेता इस पूरे मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग को घेरने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। दिल्ली से पार्टी मामलों के प्रभारी प्रकाश जोशी को तत्काल कोलकाता के लिए रवाना किया गया और वह रात डेढ़ बजे कोलकाता पहुंच रहे हैं।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का तीखा हमला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस पूरी कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। दोनों दिग्गज नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट साझा करते हुए इसे सीधे तौर पर एक राजनीतिक साजिश और लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। कांग्रेस का यह साफ आरोप है कि सरकारी मशीनरी का इस तरह से दुरुपयोग किया जाना इस बात का प्रमाण है कि सत्ताधारी दल निष्पक्ष चुनावों में विश्वास नहीं रखता है। पार्टी अब इस पूरे मुद्दे को एक राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है ताकि सरकारी तंत्र के गलत इस्तेमाल को जनता के सामने बेनकाब किया जा सके।
लोकतंत्र की हत्या और वोट चोरी का आरोप
राहुल गांधी ने मिलन प्रधान की इस गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध का एक स्पष्ट उदाहरण बताया है। उनका यह कहना था कि यह गिरफ्तारी महज एक इत्तेफाक नहीं है बल्कि सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। राहुल गांधी ने तीखे शब्दों में कहा कि नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध और लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी का निष्पक्ष चुनावों में कोई भरोसा नहीं है और वह कभी वोट चोरी, कभी सरकार चोरी तो कभी पार्टी चोरी के जरिए अपनी सत्ता बचाना चाहती है। राहुल के अनुसार वे केवल चुनाव नहीं लड़ना चाहते बल्कि चुनावी मुकाबले को ही पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस इस तरह के दबाव के आगे न कभी डरेगी और न ही झुकेगी।
मल्लिकार्जुन खरगे का कड़ा बयान
पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लिया। मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी वोट चोरी की एक बेशर्म कोशिश है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उपचुनाव जीतने के लिए जांच एजेंसियों का इस तरह से गलत इस्तेमाल किया जा रहा है जो बेहद निंदनीय है। खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री भारत को लोकतंत्र की जननी यानी मदर ऑफ डेमोक्रेसी बताते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में जो कुछ भी हो रहा है वह सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन इस पूरी कार्रवाई का मिलकर कड़ा और पुरजोर विरोध करेगा।
बदले हुए सियासी समीकरण और तृणमूल कांग्रेस का समर्थन
नंदीग्राम उपचुनाव के दौरान राजनीतिक समीकरण उस वक्त पूरी तरह बदल गए थे जब तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने आगे आकर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को अपना समर्थन देने का सार्वजनिक ऐलान किया था। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम से नंदीग्राम की चुनावी हवा पूरी तरह कांग्रेस के पक्ष में मुड़ती नजर आ रही थी। इसी बीच पुलिस ने वर्ष 2007 के एक पुराने मामले को आधार बनाकर मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया। पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने इस पूरी कार्रवाई को एक बड़ी राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में सिर्फ एक पार्टी का राज कायम करना चाहती है, हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की तरफ से लगाए गए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।



















