पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर अनुशासन को लेकर सख्ती बढ़ती दिख रही है। पार्टी की पंजाब इकाई की अनुशासनात्मक समिति ने घनौर से पूर्व विधायक रहे मदन लाल जलालपुर को सोमवार को कारण बताओ नोटिस थमाया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लेकर मीडिया के सामने आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद संगठन में हलचल मच गई। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कांग्रेस आलाकमान पंजाब इकाई के भीतर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी को शांत करने में जुटा है।
विवाद की जड़ में क्या है
पंजाब कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति के अध्यक्ष अवतार हेनरी ने जलालपुर को भेजे नोटिस में बताया कि समिति के पास पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के माध्यम से एक शिकायत पहुंची थी। इस शिकायत में कहा गया कि जलालपुर ने एक मीडिया बातचीत के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के.सी. वेणुगोपाल और भूपेश बघेल को लेकर आपत्तिजनक बातें कहीं। हेनरी के अनुसार शिकायतकर्ता ने अपनी बात के समर्थन में उस बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग भी समिति को सौंपी, जिससे आरोपों की जांच आसान हो गई।
कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत होने का दावा
समिति ने नोटिस में साफ लिखा कि जलालपुर की इन टिप्पणियों से पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भावनाएं गहरी आहत हुई हैं। समिति का मानना है कि किसी वरिष्ठ नेता के बारे में सार्वजनिक तौर पर इस तरह बयान देना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, और इसीलिए मामले को गंभीरता से लिया गया। इसी आधार पर जलालपुर से औपचारिक स्पष्टीकरण मांगने का फैसला किया गया।
तीन दिन के भीतर जवाब देना अनिवार्य
नोटिस में जलालपुर को साफ निर्देश दिया गया है कि वह तीन दिनों के भीतर अपना लिखित जवाब समिति के सामने पेश करें। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर तय समय में जवाब नहीं मिला, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। जलालपुर का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनका मोबाइल फोन बंद मिला, जिससे उनकी प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आ पाई है।
गुटबाजी सुलझाने चंडीगढ़ पहुंचे भूपेश बघेल
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है जब कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल खुद चंडीगढ़ में डेरा डाले हुए हैं और प्रदेश इकाई में चल रही गुटबाजी तथा संगठनात्मक उलझनों को सुलझाने में जुटे हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा बघेल से मुलाकात किए बिना ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए, जिसे पार्टी के भीतर मतभेदों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की उठती मांग
इसी बीच पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए लोकसभा सदस्य चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर दोबारा विचार करने की मांग तेज होती जा रही है। कई पूर्व और मौजूदा विधायक इस मांग को लेकर मुखर हैं। इसी कड़ी में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार को मोहाली में एक बैठक भी की, जिसे प्रदेश इकाई के भीतर गहराती गुटबाजी की एक और झलक माना जा रहा है। कुल मिलाकर, चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए आंतरिक कलह पर काबू पाना एक बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।











