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रायपुर में कांग्रेस का 10 दिन का स्पेशल कैंप: राहुल गांधी देंगे जिलाध्यक्षों को चुनाव जीतने का पाठ, अभनपुर में 21 से 30 जून तक चलेगा प्रशिक्षणराजनीति
14 जून 2026, 9:13 am (136 दिन पहले)· 1

रायपुर में कांग्रेस का 10 दिन का स्पेशल कैंप: राहुल गांधी देंगे जिलाध्यक्षों को चुनाव जीतने का पाठ, अभनपुर में 21 से 30 जून तक चलेगा प्रशिक्षण

छत्तीसगढ़ कांग्रेस 21 से 30 जून तक रायपुर के अभनपुर में जिला और शहर अध्यक्षों के लिए 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर लगाएगी, जिसमें राहुल गांधी के शामिल होने पर सहमति बनी है।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने अपने संगठन की नींव को सबसे निचले स्तर तक मजबूत करने का बड़ा खाका तैयार किया है। आने वाली चुनावी चुनौतियों को देखते हुए पार्टी ने इस बार रास्ता बदला है — अब राष्ट्रीय नेतृत्व सीधे जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्षों के साथ बैठकर उन्हें मैदान का गुर सिखाएगा। इसी सोच के तहत 21 जून से 30 जून तक रायपुर जिले के अभनपुर में दस दिन का विशेष प्रशिक्षण शिविर लगने जा रहा है।

इस आयोजन की सबसे बड़ी बात यह है कि कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इसमें शामिल होने की सहमति दे दी है। यानी प्रदेश के जिला स्तर के नेताओं को सीधे शीर्ष नेतृत्व से संवाद करने और सीखने का मौका मिलेगा — एक ऐसा अवसर जो आमतौर पर निचले पायदान के पदाधिकारियों को कम ही मिल पाता है।

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हर जिलाध्यक्ष की मौजूदगी अनिवार्य

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इस सिलसिले में सभी जिला कांग्रेस अध्यक्षों और शहर कांग्रेस अध्यक्षों को पत्र भेजकर शिविर में अनिवार्य रूप से पहुंचने के निर्देश दिए हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो यह केवल कागजी या औपचारिक कवायद नहीं है। शिविर में बूथ स्तर की राजनीतिक संरचना, जनसंपर्क अभियान, संगठन विस्तार, सोशल मीडिया प्रबंधन और चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर गहन सत्र रखे जाएंगे।

कांग्रेस नेतृत्व का साफ मानना है कि चुनावी सफलता की सबसे बड़ी चाबी मजबूत संगठन ही है। यही वजह है कि पार्टी अब बीच की कड़ियों को छोड़कर सीधे जिला स्तर के पदाधिकारियों को तैयार करना चाहती है, ताकि वे आने वाली राजनीतिक लड़ाइयों में पूरी तरह तैयार उतरें।

संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस का पूरा ध्यान राज्यों में अपनी जमीन फिर से पुख्ता करने पर है, और छत्तीसगढ़ का यह शिविर उसी बड़ी रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी का मकसद जिला और ब्लॉक स्तर पर ऐसा नेतृत्व खड़ा करना है जो जनता के बीच ज्यादा असरदार ढंग से पहुंच सके। प्रशिक्षण के दौरान संगठनात्मक अनुशासन और जवाबदेही पर भी खास जोर दिया जाएगा।

राहुल गांधी की भागीदारी से बढ़ा वजन

शिविर का सबसे बड़ा आकर्षण राहुल गांधी की संभावित भागीदारी ही है। पत्र के मुताबिक उन्होंने कार्यक्रम में आने पर हामी भर दी है। संगठन निर्माण और जमीनी राजनीति को लेकर राहुल गांधी पहले से सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। राजनीतिक हलकों का आकलन है कि उनके संबोधन से कार्यकर्ताओं और जिलाध्यक्षों को आगामी चुनावों के लिए साफ दिशा मिलेगी और संगठन में नई ऊर्जा भरने की उम्मीद भी है।

क्या-क्या सिखाया जाएगा

दस दिन के इस पाठ्यक्रम में विषयों की लंबी सूची तय की गई है। इसमें बूथ प्रबंधन, मतदाता संपर्क, सोशल मीडिया रणनीति, जनआंदोलन, चुनावी तैयारी और संगठन विस्तार प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही कांग्रेस की विचारधारा, संविधान, सामाजिक न्याय, ग्रामीण संपर्क अभियान और जनहित के मुद्दों पर असरदार राजनीतिक संवाद को लेकर भी अलग-अलग सत्र आयोजित किए जाएंगे।

नजर सीधे आने वाले चुनावों पर

पार्टी इस प्रशिक्षण को महज संगठनात्मक कार्यक्रम के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे भविष्य की चुनावी तैयारी का अहम पड़ाव मान रही है। कांग्रेस चाहती है कि जिला स्तर के पदाधिकारी अपने-अपने इलाकों में मजबूत राजनीतिक नेटवर्क खड़ा करें। जानकारों का कहना है कि बूथ स्तर की तैयारी और स्थानीय नेतृत्व की सक्रियता किसी भी चुनाव का नतीजा तय करने में निर्णायक साबित होती है — इसी वजह से शिविर में चुनावी प्रबंधन पर अलग से फोकस रखा गया है।

खड़गे और वेणुगोपाल की निगरानी में आयोजन

पूरा कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राष्ट्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में हो रहा है, जबकि के.सी. वेणुगोपाल खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। पार्टी का इरादा सिर्फ प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि संगठन की पूरी कार्यप्रणाली को ज्यादा असरदार बनाना है। इसके लिए प्रतिभागियों को व्यावहारिक और जमीनी अनुभवों पर आधारित सत्रों से भी जोड़ा जाएगा।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए क्यों खास है यह मंच

प्रदेश कांग्रेस के लिहाज से यह शिविर कई मायनों में अहम माना जा रहा है। यह संगठन को नई दिशा देने और भविष्य की रणनीति तय करने का बड़ा मंच बन सकता है। राहुल गांधी की मौजूदगी, राष्ट्रीय नेतृत्व का सीधा मार्गदर्शन और जिला स्तर के पदाधिकारियों की भागीदारी इसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम बना रही है। माना जा रहा है कि अभनपुर से तैयार होने वाला यह प्रशिक्षण मॉडल आगे चलकर दूसरे राज्यों में भी अपनाया जा सकता है।

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