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मराठा आरक्षण के लिए मुंबई के आजाद मैदान में 19 सितंबर से अनशन पर बैठेंगे मनोज जरांगे पाटिलराजनीति
13 सित॰ 2026, 6:18 pm (56 दिन पहले)· 0

मराठा आरक्षण के लिए मुंबई के आजाद मैदान में 19 सितंबर से अनशन पर बैठेंगे मनोज जरांगे पाटिल

मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार पर उनकी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए 19 सितंबर से मुंबई में बेमियादी भूख हड़ताल शुरू करने का एलान किया है।

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर महाराष्ट्र में आंदोलन एक बार फिर तेज होने वाला है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई में होने वाले अपने आगामी शांतिपूर्ण मार्च से पहले राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अपने अनशन के 16वें दिन प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि उन्हें जान से मारने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह के दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अपनी जान ही क्यों न गंवानी पड़े।

मनोज जरांगे पाटिल ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दलों से जुड़े कुछ लोग उनके आंदोलन को बदनाम करने और उसमें बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, मुंबई की ओर बढ़ने वाले मार्च में अशांति फैलाने के लिए जानबूझकर कुछ उपद्रवी तत्वों को भेजा जा सकता है, जो उनके ऊपर सीधा हमला भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके विरोधी उनके जीवन को समाप्त करने की योजना बना रहे हैं और इसके लिए पूरी साजिश रची जा रही है। इसके बावजूद, वे अपने कदम पीछे नहीं खींचेंगे। उन्होंने समर्थकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि अगर वे डरे हुए हैं तो इस आंदोलन में शामिल न हों, लेकिन जो लोग उनके साथ हैं, वे न केवल इस मार्च का हिस्सा बनें बल्कि जरूरत पड़ने पर उनकी अंतिम यात्रा में भी कंधा देने के लिए तैयार रहें।

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मुंबई कूच का पूरा कार्यक्रम और समय-सारणी

मराठा आरक्षण को कानूनी रूप से अमलीजामा पहनाकर युवाओं को शिक्षा व सरकारी नौकरियों में उनका हक दिलाने के लिए मनोज जरांगे पाटिल ने अपने आंदोलन की रूपरेखा साफ कर दी है। तय योजना के तहत, वे अपने हजारों समर्थकों के साथ 15 सितंबर को जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव से मुंबई के लिए प्रस्थान करेंगे। यह ऐतिहासिक मार्च 15 सितंबर से शुरू होकर विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए 19 सितंबर को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पहुंचेगा।

मनोज जरांगे पाटिल ने बताया कि वे 19 सितंबर को सुबह ठीक 10 बजे मुंबई के प्रसिद्ध आजाद मैदान में अपना अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे। विशेष बात यह है कि इस मार्च और आंदोलन का आयोजन 14 सितंबर से लेकर 25 सितंबर तक चलने वाले पवित्र गणपति उत्सव के दौरान किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन को अवगत कराया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवश्यक आवेदन दे दिया गया है। हालांकि, उन्हें आशंका है कि प्रशासन इस आंदोलन को रोकने या सीमित करने के लिए कई तरह की शर्तें थोप सकता है, लेकिन वे पूरी तरह से देश के कानून और न्यायपालिका की व्यवस्था पर विश्वास रखते हैं।

राजनीतिक साजिश और विधायकों पर गंभीर आरोप

अपने संबोधन के दौरान जरांगे पाटिल ने सीधे तौर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को निशाने पर लिया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे ये दोनों नेता उनके खिलाफ लगातार षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट से जुड़े कुछ मराठा विधायक भी इस साजिश में शामिल हैं।

जरांगे के अनुसार, ये विधायक उनके समर्थकों को लगातार फोन कर रहे हैं और उन्हें डरा-धमकाकर या समझा-बुझाकर इस मुंबई मार्च में शामिल न होने के लिए कह रहे हैं। जरांगे ने कहा कि उन्हें खत्म करने के लिए पर्दे के पीछे से गोलियां चलाने तक की तैयारी की जा रही है क्योंकि सत्ता पक्ष मराठा समुदाय को तो नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता, लेकिन वे हर हाल में जरांगे को अपने रास्ते से हटाना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आंदोलनकारी शांत जरूर हैं, लेकिन वे आने वाले समय में सरकार के कुछ मंत्रियों को सीधी राजनीतिक चुनौती भी दे सकते हैं।

आरक्षण की मांग और पिछला घटनाक्रम

यह पहला मौका नहीं है जब मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार को घुटनों पर लाने की कोशिश की है। इससे पहले, जनवरी 2024 में भी वे मराठा आरक्षण की मांग को लेकर नवी मुंबई के वाशी तक पहुंच गए थे। उस समय सरकार ने उनकी मांगों को स्वीकार करते हुए एक शासनादेश (जीआर) जारी किया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भरोसा जताते हुए जरांगे ने अपना आंदोलन वापस ले लिया था।

इस बार जरांगे पाटिल की मुख्य मांग यह है कि मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी जाति के रूप में मान्यता दी जाए और उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ दिया जाए। इसके लिए उन्होंने पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों, निजाम कालीन रिकॉर्ड और गजट पत्रों को आधार बनाने की मांग की है। हालांकि, जरांगे की इस मांग का राज्य के वर्तमान ओबीसी संगठनों और समूहों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। ओबीसी समूहों का तर्क है कि अगर मराठा समुदाय को उनके कोटे में शामिल किया गया, तो इससे मूल ओबीसी वर्ग के अधिकारों और मिलने वाले आरक्षण के अवसरों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।

सरकार को आठ दिनों का अल्टीमेटम

मुंबई में प्रस्तावित इस विशाल आंदोलन को रोकने के लिए मनोज जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार को अभी भी एक मौका दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुंबई मार्च शुरू होने में अभी आठ दिनों का समय बाकी है। इस अवधि के भीतर सरकार चाहे तो मराठा समुदाय की जायज मांगों को मानकर इस पूरे विवाद का शांतिपूर्ण हल निकाल सकती है। यदि इन आठ दिनों में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो फिर आंदोलन को रोक पाना सरकार के बस की बात नहीं होगी। जरांगे ने पूरी दुनिया को भरोसा दिलाया कि उनका यह प्रदर्शन पूरी तरह से लोकतांत्रिक, अहिंसक और शांतिपूर्ण होगा और वे संविधान के दायरे में रहकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

सवाल-जवाब

मनोज जरांगे पाटिल अपना अनशन कब और कहां शुरू करेंगे?
वह 19 सितंबर को सुबह 10 बजे से मुंबई के आजाद मैदान में अपना अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे।
मराठा आंदोलन मार्च कब और कहां से रवाना होगा?
यह विरोध मार्च 15 सितंबर को जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव से रवाना होगा।
मनोज जरांगे पाटिल के आंदोलन की मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांग ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर मराठों को कुनबी श्रेणी के तहत ओबीसी आरक्षण का लाभ देने के लिए शासनादेश जारी करना है।
ओबीसी समुदाय मराठा आरक्षण की मांग का विरोध क्यों कर रहा है?
ओबीसी समूहों का मानना है कि मराठा समुदाय को उनके कोटे में शामिल करने से उनके मौजूदा लाभ कम हो जाएंगे और उनके अवसरों पर बुरा असर पड़ेगा।
जनवरी 2024 में हुए पिछले आंदोलन के दौरान क्या हुआ था?
जनवरी 2024 में, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के प्रशासन द्वारा एक शासनादेश जारी किए जाने के बाद जरांगे पाटिल ने नवी मुंबई के वाशी में अपना आंदोलन वापस ले लिया था।
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