मराठा आरक्षण की मांग को लेकर महाराष्ट्र में आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। मराठा समुदाय को कथित रूप से धमकाने के मुद्दे पर राज्य सरकार को कड़े परिणामों की चेतावनी देते हुए मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मराठा समाज को उनके हक का आरक्षण मिल जाता है तो उनका मुंबई जाकर प्रदर्शन करने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया और मुंबई में विरोध प्रदर्शन का फैसला लिया गया, तो लगभग 80 से 90 लाख युवा राजधानी में एकत्र होंगे, जिससे रेल और विमान सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं।
मराठा आरक्षण पर अल्टीमेटम और 28 अगस्त की समयसीमा
मनोज जरांगे ने राज्य सरकार की पुनर्विचार करने की सभी अपीलों को खारिज कर दिया है। उन्होंने आंदोलन की अगली रणनीति की घोषणा करते हुए 28 अगस्त की समयसीमा तय की है। यदि इस तिथि तक सरकार मराठा समुदाय की मांगों को लागू नहीं करती है, तो जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। जरांगे का कहना है कि सरकार को मराठा समाज के धैर्य की परीक्षा लेने के बजाय समय रहते उचित कदम उठाना चाहिए।
मुंबई जाम करने और रेल-हवाई सेवा ठप करने की चेतावनी
मुंबई पुलिस द्वारा सार्वजनिक रैलियों और प्रदर्शनों पर रोक लगाने के कथित आदेशों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जरांगे ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन मनमाना व्यवहार करता है और मराठा समुदाय के लोग मुंबई आने का फैसला लेते हैं, तो वे अपनी मांगों के समर्थन में रेलवे ट्रैक उखाड़ने और उड़ानों को रोकने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि सरकारी बाधाओं के बावजूद लाखों की संख्या में युवा अपनी आवाज उठाने के लिए राजधानी में प्रवेश करेंगे।
कुनबी जाति प्रमाण पत्र और 58 लाख रिकॉर्ड की मांग
आंदोलन के मुख्य मुद्दों को रेखांकित करते हुए मनोज जरांगे ने आरोप लगाया कि प्रशासन मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को धीमा और सीमित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने मांग उठाई कि पहले से पहचाने गए 58 लाख रिकॉर्ड के आधार पर ही सभी योग्य मराठा सदस्यों को तुरंत कुनबी प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरक्षण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का छल या विश्वासघात हुआ, तो आगामी चुनावों में इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
आंदोलन के सम्भावित स्थान और आगे की रणनीति
यदि आंदोलनकारी मुंबई का रुख करते हैं तो विरोध प्रदर्शन के लिए कई प्रमुख स्थानों पर विचार किया जा रहा है। मनोज जरांगे के अनुसार मराठा प्रदर्शनकारी आजाद मैदान, शिवाजी पार्क या मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा के बाहर धरना दे सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि यह संघर्ष पूरे महाराष्ट्र के मराठा समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए है और जब तक अधिकार नहीं मिल जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।





















