महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक खींचतान एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा विधायक राम कदम ने प्रदर्शनकारी मनोज जरांगे पाटिल की ओर से घोषित किए गए मुंबई मार्च और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के फैसले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सड़कों पर उतरकर और प्रशासन पर अनुचित दबाव बनाकर संवैधानिक मांगें पूरी नहीं कराई जा सकती हैं। विधायक ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करने और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
मुंबई की शांति और त्योहारों का महत्व
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए राम कदम ने मुंबई की स्थानीय व्यवस्था और आम नागरिकों की सहूलियत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे बड़े महानगर में शांति व्यवस्था बनाए रखना, सड़क यातायात को सुचारू रखना और सबसे महत्वपूर्ण रूप से गणेश उत्सव को बिना किसी व्यवधान के संपन्न कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने टिप्पणी की कि मराठा समुदाय के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि पूर्व में उन्हें 'देवा भाऊ' यानी देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में ही आरक्षण मिला था। उन्होंने आश्चर्य जताया कि मनोज जरांगे पाटिल उन लोगों के खिलाफ चुप हैं जिन्होंने मराठा आरक्षण को हमेशा नकारा, जबकि वे उन लोगों पर ही सड़कों के जरिए दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं जिन्होंने इस आरक्षण को हकीकत में बदला।
क्या कोर्ट में टिक पाएगा आरक्षण का नया फैसला?
भाजपा विधायक ने आरक्षण की कानूनी वैधता को लेकर एक बहुत ही बुनियादी और महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि क्या किसी अन्य वर्ग के अधिकार को छीनकर किसी दूसरे वर्ग को आरक्षण देना देश की न्यायपालिका की कसौटी पर टिक पाएगा? राम कदम ने आगाह किया कि यदि सरकार जल्दबाजी में किसी प्रकार की घोषणा कर भी देती है, लेकिन कल को वह कानून के समक्ष या हाई कोर्ट में टिक नहीं पाती है, तो क्या ऐसा अस्थाई आरक्षण मराठा समाज को स्वीकार्य होगा? उन्होंने उदाहरण दिया कि पूर्व में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार के दौरान मराठा समाज के हित में जो भी नीतिगत और कानूनी फैसले लिए गए थे, वे सभी न्यायपालिका की समीक्षा में सुरक्षित रहे और कानूनी रूप से मान्य साबित हुए।
विश्वविद्यालयों में प्रोपेगैंडा और वैचारिक स्वतंत्रता पर बहस
मराठा आरक्षण के अलावा, राम कदम ने उमर खालिद पर केंद्रित एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के खिलाफ ABVP द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय निश्चित रूप से अलग-अलग विचारों और बहसों का एक खुला मंच होते हैं, लेकिन उन्हें किसी एक विशेष विचारधारा को जबरन थोपने या उसका प्रचार करने का जरिया नहीं बनने दिया जा सकता। उनके अनुसार, यदि कोई विशिष्ट विचार छात्रों के सामने रखा जा रहा है, तो उसके साथ उससे जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्य और तर्क भी प्रस्तुत किए जाने चाहिए ताकि छात्र निष्पक्ष चर्चा और संवाद कर सकें।
देश विरोधी सोच के खिलाफ एकजुटता की अपील
विधायक ने इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया कि शैक्षणिक संस्थानों को बिना किसी सार्थक चर्चा या खुले संवाद के केवल एकतरफा प्रोपेगैंडा का केंद्र बना दिया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी संदेहास्पद विचारधाराओं को बढ़ावा देने का मूल आधार क्या है? उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की एकता को चुनौती देने वाले नारों और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसी सोच को बढ़ावा देने वाली ताकतों के साथ भारत कभी प्रगति के मार्ग पर आगे नहीं बढ़ सकता। राम कदम ने साफ किया कि वे और उनकी पार्टी ऐसी हर देश विरोधी और विभाजनकारी विचारधारा का पुरजोर विरोध करते रहेंगे जो समाज में वैमनस्य फैलाती है।



















