पुणे: महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बड़ी संख्या में मौजूद छात्राओं के साथ विभिन्न मुद्दों पर लंबी चर्चा की। 'छात्रों की गूंज' नामक इस कार्यक्रम में हजारों की तादाद में युवतियां और छात्राएं शामिल हुईं। इस दौरान पूरा हॉल राहुल गांधी के समर्थन में लगाए गए नारों से गूंज उठा। इस सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने देश की आधी आबादी को सबसे बड़ी ताकत करार दिया और उनके महत्व पर खुलकर अपनी बात रखी।
विचार साझा करने पहुंचे थे राहुल
कार्यक्रम की शुरुआत में अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने वहां मौजूद सभी युवतियों का आभार जताया और स्पष्ट किया कि वह यहां कोई पारंपरिक भाषण देने या अपनी सोच थोपने नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि वह राजनीति पर चर्चा करने के इरादे से भी नहीं पहुंचे हैं, बल्कि वह चाहते हैं कि युवा युवतियां खुद सामने आएं और अपने विचार खुलकर दुनिया के सामने रखें। उन्होंने कहा कि वह यहां केवल सुनने और नए विचारों पर चर्चा करने आए हैं।
सभा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने वहां मौजूद भीड़ की एक खास विशेषता की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में पुरुषों की संख्या या तो न के बराबर है या वे दिखाई ही नहीं दे रहे हैं और चारों तरफ सिर्फ युवतियां ही नजर आ रही हैं। उन्होंने सभी को याद दिलाया कि इस ब्रह्मांड में मौजूद हर एक व्यक्ति अपने आप में पूरी तरह यूनिक और विशेष है, और हर किसी के पास अपने जीवन के लिए एक स्पष्ट विजन होना बेहद जरूरी है।
सत्तर करोड़ महिलाएं हैं देश की सबसे बड़ी पूंजी
देश की ताकत के विषय पर अपनी राय रखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि जब किसी से यह पूछा जाता है कि भारत की असल ताकत क्या है, तो अलग-अलग लोग अर्थव्यवस्था, सेना, चिकित्सा प्रणाली या फिर देश की विशाल आबादी का नाम लेते हैं। लेकिन इस मामले में उनका अपना नजरिया बिल्कुल साफ है। उनके मुताबिक भारत की सबसे बड़ी ताकत देश की वे सत्तर करोड़ महिलाएं हैं, जो स्वभाव से अधिक संवेदनशील, सज्जन, दयालु और पुरुषों की तुलना में अधिक प्रगतिशील हैं।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की महिलाएं युवा हैं और राष्ट्र की सबसे बड़ी आर्थिक व सामाजिक संपत्ति हैं। हालांकि उन्होंने इस दौरान एक अहम सामाजिक समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी आम तौर पर पुरुषों से बात की जाती है, तो महिलाओं को मुख्य रूप से तीन सीमित दायरों में ही समेट दिया जाता है, जो बेटी, पत्नी और मां के रूप में होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन भूमिकाओं में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन ये किसी भी महिला की एकमात्र पहचान नहीं हो सकतीं क्योंकि देश की महिलाओं में अपार प्रतिभा छिपी हुई है।
अपनी स्वतंत्र पहचान का महत्व
राहुल गांधी ने आगे कहा कि भले ही कोई महिला बेटी, पत्नी या मां की भूमिका निभाती हो, लेकिन उनका वजूद केवल इन रिश्तों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनकी अपनी एक स्वतंत्र और व्यक्तिगत पहचान भी होती है। इसी वजह से उन्होंने कहा कि वह इस कार्यक्रम में खुद कोई लंबा उपदेश देने के बजाय केवल उन युवतियों की बात सुनने आए हैं। इस कार्यक्रम का एक वीडियो राहुल गांधी के एक्स अकाउंट पर भी साझा किया गया है।
इससे पहले राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी खासी चर्चा रही थी जब पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े एक मामले को लेकर संसद मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी और इस सिलसिले में विरोध जताते हुए कई घंटों तक धरना दिया गया था। इस घटनाक्रम और राजनीतिक बयानों के बीच पुणे के इस कार्यक्रम में महिलाओं के अधिकारों और उनकी स्वतंत्र पहचान को लेकर की गई चर्चा ने खासी सुर्खियां बटोरी हैं।





















