कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर पंजाब पहुंचे पार्टी के जनरल सेक्रेटरी भूपेश बघेल पिछले दो दिनों से चंडीगढ़ में डेरा डाले हुए हैं। उनका प्राथमिक उद्देश्य पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहे असंतोष को शांत करना और बिखरे हुए खेमों को एक साथ लाना है। हालांकि, बघेल की तमाम कोशिशों के बावजूद जमीनी हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक विधायक अब तक बघेल से मिलने के लिए नहीं पहुंचे हैं। चरणजीत सिंह चन्नी की सीधी मांग है कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया जाए। इस मांग पर वे अडिग हैं और फिलहाल किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं हैं।
राजा वडिंग का बचाव और गुटबाजी की सच्चाई
वहीं, दूसरी ओर अमरिंदर सिंह राजा वडिंग रक्षात्मक रुख अपनाते हुए नजर आ रहे हैं। पिछले दो दिनों में उन्होंने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे और मुख्यमंत्री पद के दौड़ में शामिल नहीं हैं। आज भी उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब कांग्रेस में कोई भी आपसी कलह नहीं है और पूरी पार्टी एक साथ काम कर रही है। राजा वडिंग ने दावा किया कि चरणजीत सिंह चन्नी की भूपेश बघेल से फोन पर बातचीत हुई है और जल्द ही उनकी मुलाकात भी संभव होगी।
पार्टी में दो से तीन गुटों का अस्तित्व
पार्टी की अंदरूनी खींचतान के बीच सीनियर नेता सुखपाल सिंह खैरा ने आज भूपेश बघेल के साथ मुलाकात की। अक्सर तटस्थ माने जाने वाले सुखपाल सिंह खैरा ने स्थिति को और भी स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि वर्तमान में पंजाब कांग्रेस के भीतर दो से तीन स्पष्ट गुट बन गए हैं। खैरा के अनुसार, आगामी चुनावों के ठीक पहले इस स्तर की गुटबाजी पार्टी के भविष्य के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती है। उन्होंने इस कलह को जल्द से जल्द जड़ से खत्म करने की वकालत की है।
प्रताप बाजवा की मध्यस्थता की पेशकश
अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के दावों के विपरीत, पंजाब विधानसभा में लीडर ऑफ अपोजिशन प्रताप बाजवा ने माना है कि पार्टी में सब कुछ सामान्य नहीं है। नेताओं के बीच मनमुटाव है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रताप बाजवा ने एक दिलचस्प तुलना करते हुए कहा कि जब ईरान और अमेरिका जैसे देश बमबारी के बाद बातचीत की मेज पर बैठ सकते हैं, तो कांग्रेस नेता भी अपने छोटे मतभेदों को सुलझा सकते हैं। उन्होंने घोषणा की है कि वे एक सीनियर नेता की भूमिका निभाते हुए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि की तरह कांग्रेस के तमाम गुटों के बीच शांति समझौता कराएंगे। बाजवा का मानना है कि सभी नेताओं को बातचीत के लिए एक मंच पर लाना उनकी प्राथमिकता है ताकि पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ सके।
दिल्ली तक पहुंची बगावत की आंच
चन्नी खेमे के विधायक परगट सिंह और बरिन्दर मीत पहाड़ा इस वक्त दिल्ली में मौजूद हैं। वे सीधे हाईकमान के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं। हालांकि राहुल गांधी या मल्लिकार्जुन खरगे से उन्हें मिलने का समय अभी तक नहीं मिला है, लेकिन संभावना है कि कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से उनकी मुलाकात हो सकती है। परगट सिंह ने साफ कहा है कि मुद्दों को दबाने से पार्टी को केवल नुकसान होगा। उन्होंने बिना नाम लिए अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि एक जीतती हुई टीम का कैप्टन होना ही काफी नहीं है, बल्कि पूरी टीम का तालमेल जरूरी है।
अशोक गहलोत और हाईकमान का रुख
अशोक गहलोत ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आलाकमान को पंजाब की पूरी स्थिति की जानकारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उचित समय पर सही निर्णय लिए जाएंगे ताकि चुनाव एकजुट होकर लड़े जाएं। भूपेश बघेल ने आज स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि हाईकमान किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है। उन्होंने दोहराया कि वर्तमान में काम कर रही समितियों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। बघेल ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों से आए नेताओं से उनकी बातचीत हुई है और उन्होंने हाईकमान द्वारा गठित कमेटियों पर अपनी सहमति जताई है। इस पूरे घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी के नेता और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने तंज कसते हुए कहा कि बहुत सारे नेता सीएम बनने का सपना देख रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि चुनाव आम आदमी पार्टी ही जीतेगी।











