पंजाब कांग्रेस में हाल ही में हुए संगठनात्मक बदलावों ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को नाराज कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, नई कमेटियों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति के आलाकमान के फैसले से चन्नी खासे असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। इसी नाराजगी के बीच उन्होंने शुक्रवार सुबह 11 बजे अपने गृह क्षेत्र मोरिंडा में समर्थक कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई है।
जब से उन्हें चुनाव अभियान समिति यानी कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है, तभी से वह लगातार चुप्पी साधे हुए हैं और मीडिया से भी दूरी बनाकर रखी है। उनके इस रवैये ने संगठन में हुए हालिया बदलावों को लेकर उनकी नाराजगी की चर्चाओं को और हवा दे दी है।
वडिंग और बाजवा को मिली पुरानी जिम्मेदारी
दरअसल बुधवार को कांग्रेस ने पंजाब की अपनी संगठनात्मक टीम को अंतिम रूप दे दिया। इसमें अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को एक बार फिर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी गई, जबकि प्रताप सिंह बाजवा पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता बने रहेंगे। इन दोनों नियुक्तियों के एलान के साथ ही राज्य नेतृत्व में बड़े फेरबदल को लेकर हफ्तों से चल रहीं अटकलों पर विराम लग गया।
2027 चुनाव से पहले नई टीम, इन नेताओं को मिली कमान
2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने संगठन मजबूत करने के इरादे से नई टीम का एलान किया है। पूर्व विधायक सुखविंदर डैनी, पूर्व कैबिनेट मंत्री राज कुमार वेरका और ओबीसी नेता संगत सिंह गिलजियां को पंजाब कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। डैनी और वेरका दोनों अनुसूचित जाति समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं।
वहीं दलित चेहरे और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपी गई है। लोकसभा सदस्य सुखजिंदर रंधावा को कोर कमेटी की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंघला चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति के अध्यक्ष होंगे। सांसद अमर सिंह को पार्टी ने घोषणापत्र समिति की अगुवाई सौंपी है।
चुनाव अभियान समिति में सह-अध्यक्ष के तौर पर वरिष्ठ नेता सुखपाल सिंह खैरा, राणा गुरजीत सिंह और धर्मवीर गांधी को शामिल किया गया है। चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति के सह-अध्यक्ष की जिम्मेदारी ओ.पी. सोनी, रजिया सुल्ताना, कुलजीत सिंह नागरा, अंगद सिंह सैनी और भारत भूषण आशु को दी गई है। इसके अलावा घोषणापत्र समिति में गुरजीत सिंह औजला, परगट सिंह, हरदयाल सिंह कंबोज और सुखविंदर सिंह सरकारिया को सह-अध्यक्ष बनाया गया है।
गुटबाजी थामने की कोशिश में जुटी कांग्रेस
पार्टी की कोशिश इन नियुक्तियों के जरिए अलग अलग खेमों की आपसी खींचतान यानी गुटबाजी पर लगाम कसने की है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले भी चन्नी की नाराजगी की खबरें सामने आई थीं, जब उन्होंने दलित समुदाय के नेताओं की कथित तौर पर अनदेखी किए जाने का मुद्दा उठाया था। पार्टी के भीतर गुटबाजी खत्म करने के मकसद से कांग्रेस ने पिछले कुछ हफ्तों में कई दौर की बैठकें भी की हैं।
अब सबकी निगाहें शुक्रवार को मोरिंडा में होने वाली चन्नी समर्थकों की बैठक पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बैठक में चन्नी अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर करते हैं या फिर पार्टी लाइन पर चलते हुए संगठनात्मक बदलावों को स्वीकार करने का संकेत देते हैं।













