लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तारीफ किए जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस इकाई के भीतर राजनीतिक घमासान मच गया है। सोशल मीडिया पर एक संवाद के दौरान राहुल गांधी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को भारतीय जनता पार्टी में सबसे कूल नेता करार दिया था। इस बयान के सामने आते ही पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कड़ा ऐतराज जताया और पूर्व मुख्यमंत्री पर पंजाब का बेड़ा गर्क करने का सीधा आरोप लगाया। इस घटनाक्रम से विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर गुटबाजी और तनाव खुलकर सतह पर आ गया है।
राहुल गांधी की 'कूल' टिप्पणी से शुरू हुई चर्चा
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब राहुल गांधी इंस्टाग्राम पर युवाओं के साथ एक विशेष सवाल-जवाब सत्र में हिस्सा ले रहे थे। इस बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि भारतीय जनता पार्टी में उन्हें कौन सा नेता सबसे ज्यादा पसंद है, तो उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम लिया और उन्हें कूल लीडर बताया। राहुल गांधी की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हो गईं कि क्या पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की दोबारा कांग्रेस में वापसी हो सकती है। इस बयान ने राज्य के कांग्रेस नेताओं को असमंजस और चिंता में डाल दिया।
राजा वडिंग का कड़ा हमला और वापसी से इनकार
राहुल गांधी के इस बयान पर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी की किसी भी संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया। राजा वडिंग ने कहा,
"कैप्टन कूल लग सकते हैं, लेकिन उन्होंने ही पंजाब का बेड़ा गर्क किया है।"उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने कैप्टन को एक अच्छा मुख्यमंत्री नहीं कहा था, बल्कि केवल कूल बताया था। वडिंग के अनुसार, व्यक्तिगत पसंद एक अलग विषय है, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह के शासनकाल में राज्य को भारी नुकसान पहुंचा है और उनके लिए पार्टी में कोई जगह नहीं है।
भूपेश बघेल की असहजता और कांग्रेस के भीतर नया मोर्चा
जिस समय राजा वडिंग पूर्व मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे थे, उस समय पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल उनके ठीक पास में बैठे हुए थे। राजा वडिंग के तल्ख तेवरों को देखकर भूपेश बघेल के चेहरे पर स्पष्ट रूप से चिंता और असहजता नजर आने लगी। इसका मुख्य कारण यह था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह जब मुख्यमंत्री थे, तब राज्य में कांग्रेस की ही सरकार थी और वे कांग्रेस पार्टी के ही शीर्ष नेता थे। ऐसे में अपनी ही पूर्व सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठना पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। इसके अलावा, भूपेश बघेल पहले से ही चरणजीत सिंह चन्नी गुट को साधने और अंदरूनी मतभेदों को सुलझाने का प्रयास कर रहे थे। अब राजा वडिंग के इस नए रुख ने पार्टी के भीतर एक तीसरा मोर्चा खोल दिया है, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों और एकजुटता पर असर पड़ सकता है।



















