महान फुटबॉल खिलाड़ी लियोनल मेसी के पिता और उनके लंबे समय तक एजेंट रहे जॉर्ज मेसी का 68 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वह पिछले काफी समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। अपने बेटे को दुनिया का सबसे सफल फुटबॉल खिलाड़ी बनाने में जॉर्ज मेसी ने न केवल एक पिता के रूप में बल्कि एक मार्गदर्शक और मैनेजर के रूप में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। उनके निधन की खबर से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
शुरुआती दौर का संघर्ष और पिता का समर्पण
लियोनल मेसी की सफलता की नींव में उनके पिता जॉर्ज मेसी का सालों का कड़ा संघर्ष शामिल रहा है। बचपन के दिनों में जब मेसी न्यूवेल्स ओल्ड बॉयज की यूथ टीम से खेलते थे, तब उन्हें ग्रोथ हार्मोन की कमी नाम की बीमारी का पता चला था। इस बीमारी के इलाज का खर्च उठाना बेहद कठिन था, लेकिन जॉर्ज मेसी ने हार नहीं मानी और अपने बेटे के इलाज में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी। उन्होंने न केवल अपने बेटे के स्वास्थ्य का ध्यान रखा, बल्कि उनके करियर को सही दिशा देने के लिए एक एजेंट के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दौरान पिता के स्वास्थ्य की चिंता
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दौरान भी लियोनल मेसी अपने पिता की बिगड़ती सेहत को लेकर काफी तनाव में नजर आए थे। टूर्नामेंट के दौरान मेसी ने यह तो स्वीकार किया था कि उनका परिवार एक बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है, लेकिन उस समय उन्होंने बीमारी की कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की थी। बाद में उनके परिवार द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट किया गया कि जॉर्ज मेसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं और डॉक्टरों की निरंतर निगरानी में अस्पताल में उनका इलाज जारी है।
अल्जीरिया के खिलाफ मैच में झलका दर्द
टूर्नामेंट में अल्जीरिया के खिलाफ खेले गए ग्रुप स्टेज के मैच में गोल करने के बाद मेसी काफी भावुक हो गए थे और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े थे। मैच के बाद जब उनसे उनकी इस भावुकता का कारण पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा था कि उनके रोने की वजह फुटबॉल मैदान से नहीं जुड़ी है, बल्कि उनके पिछले कुछ दिन परिवार की स्थिति को लेकर बहुत ही मुश्किल बीते हैं।
स्पेन से फाइनल की हार और टूर्नामेंट का प्रदर्शन
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में लियोनल मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना की टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए फाइनल तक का सफर तय किया था। हालांकि, स्पेन के खिलाफ खेले गए रोमांचक खिताबी मुकाबले में अर्जेंटीना को 1-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बावजूद पूरे टूर्नामेंट में मेसी का प्रदर्शन बेमिसाल रहा और वह सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में किलियन एमबापे के बाद दूसरे स्थान पर रहे थे। कठिन व्यक्तिगत परिस्थितियों के बावजूद मैदान पर उनका यह प्रदर्शन उनकी पेशेवर प्रतिबद्धता और खेल के प्रति निष्ठा को दर्शाता है।


















