पंजाब में अगले साल आयोजित होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का सियासी माहौल गर्मा गया है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और लुधियाना से लोकसभा सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने एक बड़ा सियासी दांव खेलते हुए राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि चुनावी मैदान तय करना पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अधिकार क्षेत्र में है, फिर भी वह मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
चुनावी समर में सीधे मुकाबले का संदेश
राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आ गई है। ऐसे समय में प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग का यह बयान पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान को उनके गृह क्षेत्र या किसी भी चुनावी मंच पर सीधे चुनौती देने की बात कहकर राजा वडिंग ने अपनी भावी राजनीतिक दिशा के संकेत दे दिए हैं। हालांकि, उन्होंने बार-बार इस बात पर बल दिया कि उम्मीदवारों के चयन और सीटों के आवंटन का अंतिम निर्णय राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई वाला पार्टी हाईकमान ही करेगा।
इस्तीफे की अटकलों का खंडन और चार साल की उपलब्धियां
बठिंडा और मुक्तसर जिलों में आयोजित पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों के दौरान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने अपने पद से हटने की तमाम चर्चाओं को खारिज कर दिया। 'हर बूथ कांग्रेस मजबूत' अभियान के सिलसिले में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने एक सवाल के जवाब में दो टूक शब्दों में कहा, "मैं इस्तीफा नहीं दूंगा।" उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान उन्होंने पूरे समर्पण, ईमानदारी और निष्ठा के साथ संगठन के लिए काम किया है। उनके कार्यकाल की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में उनके नेतृत्व के अंतर्गत कांग्रेस ने पंजाब की कुल 13 सीटों में से 7 सीटों पर ऐतिहासिक और शानदार जीत हासिल की थी।
भीतरी खींचतान और गुटबाजी की चुनौती
हाल के दिनों में पंजाब कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और अंदरूनी विरोध की घटनाएं सार्वजनिक रूप से सामने आई हैं। बठिंडा और मुक्तसर में हुए कार्यक्रमों के दौरान भी पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने नारेबाजी कर अपनी नाराजगी जताई थी। पार्टी में चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वडिंग के खेमों के बीच बढ़ती खींचतान ने शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम के समय पंजाब कांग्रेस प्रभारी एवं एआईसीसी महासचिव भूपेश बघेल भी मंच पर उपस्थित थे। भूपेश बघेल की मौजूदगी में राजा वडिंग द्वारा दिया गया यह सख्त बयान दर्शाता है कि वह आंतरिक दबाव के बावजूद पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
शीर्ष नेतृत्व के प्रति निष्ठा और संगठन का संकल्प
अपनी आक्रामक कार्यशैली के बीच अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कांग्रेस हाईकमान भविष्य में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने या कोई अन्य जिम्मेदारी देने का फैसला करता है, तो भी वह पार्टी के एक अनुशासित और निष्ठावान सिपाही की तरह काम करते रहेंगे। उनका मुख्य लक्ष्य राज्य में कांग्रेस पार्टी को मजबूत करना और आने वाले विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करना है। फिलहाल, बगावती सुरों के बीच पार्टी की एकजुटता बनाए रखना और चुनावी समर में उतरना कांग्रेस हाईकमान के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।


















