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रणवीर शौरी ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर उठाए सवाल, बोले- कोर्ट जाना चाहिएराजनीति
13 अक्तू॰ 2026, 6:50 am (14 दिन पहले)· 5

रणवीर शौरी ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर उठाए सवाल, बोले- कोर्ट जाना चाहिए

चीफ इलेक्शन कमिश्नर के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले नेताओं को हिरासत में लिए जाने के मामले में अभिनेता रणवीर शौरी ने अपनी बात रखी है। उन्होंने सड़कों पर उतरने के बजाय न्यायिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले 'कॉकरोच जनता पार्टी' के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद मनोरंजन जगत में बहस छिड़ गई है और अभिनेता रणवीर शौरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस पूरे प्रकरण पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका मानना है कि व्यवस्था के खिलाफ अपनी बात रखने के लिए सड़कों पर हंगामा करने के स्थान पर देश की स्थापित अदालतों और अन्य लोकतांत्रिक मंचों का उपयोग किया जाना चाहिए।

सड़क पर प्रदर्शन को रणवीर शौरी ने बताया लोकतंत्र के खिलाफ

रविवार के दिन अभिनेता रणवीर शौरी ने X पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास का एक वीडियो साझा किया था। उस वीडियो में सौरव दास नागरिकों से अपील कर रहे थे कि वे बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरें और किसी भी स्थिति में पीछे न हटें। इस वीडियो पर अपनी कड़ी आपत्ति जताते हुए अभिनेता ने पोस्ट किया कि अपनी ताकत संसद और बैलेट बॉक्स में दिखानी चाहिए न कि सड़कों पर, और यदि प्रक्रिया में कोई कमी लगती है तो अदालत का रुख करना चाहिए। उन्होंने आगे लिखा कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बाधित करना और कानून व्यवस्था को ठप करना ही असल मायनों में लोकतंत्र की हत्या है।

अराजकता और विरोध के तरीकों पर अभिनेता के कड़े तेवर

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेता ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक प्रणाली में विरोध प्रदर्शन हमेशा से एक अंतिम विकल्प होना चाहिए, न कि न्यायपालिका या विधायिका के स्थापित दायरों को दरकिनार करने का शॉर्टकट। उन्होंने सवाल उठाया कि असहमति जताने के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि ऐसे प्रदर्शनों का दौर शुरू कर दिया जाए जो पूरे देश को बंधक बना लें और आम नागरिकों का जीवन कठिन कर दें। उनके अनुसार केवल वे लोग ही कानूनी विकल्पों को नजरअंदाज करके सड़कों पर उतरते हैं जो अराजकता फैलाना चाहते हैं या केवल सुर्खियां बटोरना चाहते हैं। जब एक यूजर ने टिप्पणी की कि इस स्थिति से मुख्य न्यायाधीश भी प्रभावित हुए हैं, तो अभिनेता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसी लंबी सूची में अब हर कोई प्रभावित नजर आता है, और केवल वही लोग भरोसेमंद रह गए हैं जो चुनाव नहीं जीत पाते और संदिग्ध फंडिंग वाली भीड़ के साथ सड़कों पर विरोध करते हैं।

कंगना रनौत का तीखा हमला और अन्य कलाकारों की प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कंगना रनौत ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व को देश विरोधी और आतंकी ताकतों के बराबर बताया है। उनका आरोप है कि देश की स्थिरता को बिगाड़ने की गहरी साजिश रची जा रही है और अब देश के आम नागरिक ही ऐसी ताकतों को बेनकाब करेंगे। इससे पहले हुमा कुरैशी, सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा जैसे कई अन्य बॉलीवुड कलाकार भी पुलिस प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों से निपटने के तरीकों की आलोचना कर चुके हैं।

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सवाल-जवाब

रणवीर शौरी ने किस पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं?
रणवीर शौरी ने कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन की आलोचना की है।
यह विरोध प्रदर्शन किसके खिलाफ आयोजित किया जा रहा था?
यह विरोध प्रदर्शन चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया जा रहा था।
रणवीर शौरी के अनुसार विरोध का सही तरीका क्या है?
रणवीर शौरी का मानना है कि विरोधियों को सड़कों पर उतरने के बजाय संसद या अदालतों का सहारा लेना चाहिए।
कंगना रनौत ने CJP के नेतृत्व के बारे में क्या कहा है?
कंगना रनौत ने CJP के नेतृत्व को देशद्रोही और आतंकी ताकतें करार दिया है।
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टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·13 दिन पहले

सड़क पर उतरने के बजाय कोर्ट जाने की बात तो सही है, पर जब पुलिस पहले ही सबको पकड़ ले तो आम आदमी अपनी आवाज़ कहाँ रखे?

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·13 दिन पहले

रिया जी, कानून और अदालतों पर भरोसा रखना ही सबसे बड़ा लोकतांत्रिक उपाय है, वरना अराजकता से देश का ही नुकसान होता है।

Rohan Verma@rohan-verma·13 दिन पहले

सड़कें जाम करके अपनी बात मनवाने का तरीका किसी को हक नहीं देता कि आम जनता का दिन खराब करे। शौरी साहब सही कह रहे हैं, अदालत जाने का रास्ता खुला ही है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·13 दिन पहले

सड़कों पर इस तरह उतरने से आम लोगों की ज़िंदगी कितनी मुश्किल हो जाती है, यह मैं रोज़ देखता हूँ जब थाने के चक्कर काटने जाते वक्त जाम में फँसता हूँ। लोकतंत्र में कोर्ट और कानून का रास्ता ही सही है, अराजकता फैलाने से किसी का भला नहीं होता।

Ravikash Gupta@ravikash·13 दिन पहले

करन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछले हफ्ते ही मैं दिल्ली में एक मीटिंग के लिए जा रहा था और इसी तरह के जाम में दो घंटे फंसा रह गया था, फ्लाइट भी छूटते-छूटते बची।

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