अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में चीनी युआन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले धीरे-धीरे मजबूती की ओर बढ़ रहा है। यूनाइटेड ओवरसीज बैंक के रणनीतिकार क्वेक सेर लियांग और ली सू एन के तकनीकी और बुनियादी विश्लेषण के अनुसार यूएसडी/सीएनएच (USD/CNH) मुद्रा जोड़ी पर नकारात्मक रुख बना हुआ है, जिससे आने वाले कारोबारी सत्रों में अमेरिकी डॉलर एक तय दायरे में फिसल सकता है। तात्कालिक दैनिक कारोबार में डॉलर पर हल्का नीचे की तरफ दबाव देखा जा रहा है, जिससे इसकी गिरावट की गति तो सीमित रह सकती है, लेकिन एक से तीन हफ्तों तथा आने वाले महीनों के नजरिए से डॉलर 6.6640 के स्तर तक खिसक सकता है। जब तक यह मुद्रा जोड़ी 6.7815 के तकनीकी क्लाउड स्तर से नीचे बनी रहती है, तब तक युआन के पक्ष में यह क्रमिक तेजी का रुझान कायम रहने का अनुमान है।
चीनी युआन और अमेरिकी डॉलर का तकनीकी दायरा
दैनिक कारोबारी दायरे की बात करें तो पूर्व में अमेरिकी डॉलर के 6.6700 से 6.6760 के बीच कारोबार करने की संभावना जताई गई थी। हालांकि वास्तविक कारोबार के दौरान डॉलर फिसलकर 6.6688 के निचले स्तर तक आ गया, जिससे नीचे की ओर मोमेंटम में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। मौजूदा सत्र में डॉलर में कमजोरी का यह सिलसिला जारी रह सकता है, लेकिन हल्की गिरावट की गति को देखते हुए इसके सीधे 6.6640 के स्तर तक आज ही पहुंचने के आसार कम हैं। तकनीकी चार्ट पर इस जोड़ी के लिए 6.6740 का स्तर एक तात्कालिक प्रतिरोध के रूप में काम कर रहा है।
मध्यम अवधि यानी एक से तीन सप्ताह के परिदृश्य में विश्लेषकों का डॉलर पर नकारात्मक नजरिया महीने के मध्य से लगातार बना हुआ है। बीते बुधवार, 21 अक्टूबर को जब हाजिर भाव 6.6750 पर था, तब भी डॉलर के धीरे-धीरे 6.6640 की ओर फिसलने का अनुमान व्यक्त किया गया था। इस दृष्टिकोण में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। दूसरी ओर, यदि डॉलर में तेजी लौटती है और भाव 6.6780 के स्तर को पार कर जाता है, जो पहले 6.6850 पर एक मजबूत प्रतिरोध स्तर था, तो यह संकेत मिलेगा कि डॉलर की गिरावट का मौजूदा दौर फिलहाल थम गया है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन में डॉलर के मुकाबले हलचल
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रहा। सोमवार को अमेरिकी डॉलर में दोबारा शुरू हुई बिकवाली के चलते यह जोड़ी अपने एक महीने के उच्च स्तर के करीब कारोबार करती देखी गई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई ताजा गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में आई हल्की नरमी ने डॉलर की तीन सप्ताह के निचले स्तर से उबरने की कोशिशों को रोक दिया। इसके साथ ही, नवंबर में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की बढ़ती उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दिया है। हालांकि मंगलवार से शुरू होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय महत्वपूर्ण एफओएमसी (FOMC) बैठक से पहले इस बढ़त के भी सीमित रहने के संकेत हैं।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी में भी एशियाई सत्र में नए बिकवाल सक्रिय होते दिखे। शुक्रवार को 18 सितंबर के बाद के सबसे निचले स्तर को छूने के बाद यह जोड़ी उबरने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई गिरावट ने डॉलर पर दबाव बढ़ा दिया और सुधार की यह रफ्तार थम गई। बैंक ऑफ जापान (BoJ) के सख्त मौद्रिक रुख के संकेतों से जापानी येन को अतिरिक्त समर्थन मिला, जिसने इस मुद्रा जोड़ी पर नीचे की ओर दबाव बनाए रखा। हालांकि इस हफ्ते होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठकों के मद्देनजर कारोबारी सतर्क हैं, जिससे गिरावट का दायरा सीमित नजर आ रहा है।
सोने में उछाल और बिटकॉइन की चाल
कमोडिटी बाजार में सोने ने लगातार दो दिनों की गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए सोमवार को शानदार वापसी की। पीली धातु ने 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर लिया और दैनिक बढ़त बनाए रखी। अमेरिकी डॉलर के बदले हुए रुख और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के मिले-जुले संकेतों के बीच सोने की कीमतों में यह तेजी देखी गई। कच्चे तेल के भावों में आई हालिया गिरावट ने भी सोने की इस उछाल को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में बिटकॉइन लगातार तीन हफ्तों के सुधारात्मक दौर के बाद सोमवार को 80,500 डॉलर के आसपास मंडराता दिखाई दिया। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए रखा है, जिससे वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की धारणा यानी रिस्क एपेटाइट पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
वैश्विक केंद्रीय बैंकों की बैठकें और अमेरिकी मध्यावधि चुनाव
यह कारोबारी हफ्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है, क्योंकि दुनिया के पांच प्रमुख केंद्रीय बैंक अपनी नई मौद्रिक नीतिगत फैसलों का ऐलान करने की तैयारी में हैं। वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते महंगाई के लगातार केंद्रीय बैंकों के निर्धारित लक्ष्यों से ऊपर बने रहने के कारण निवेशक आने वाले दिनों में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका जता रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर के लिए 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले का समय बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। वित्तीय बाजार जहां दिसंबर में फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में एक और इजाफे का अनुमान लगा रहे हैं, वहीं अमेरिकी कांग्रेस के नियंत्रण को लेकर होने वाली राजनीतिक जंग वहां की राजकोषीय नीति की दिशा को बदल सकती है। यह राजनीतिक बदलाव अप्रत्यक्ष रूप से वर्ष 2027 में अमेरिकी मौद्रिक नीति के भविष्य के रास्ते को भी एक नया आकार दे सकता है।















