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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नेता इंद्रेश कुमार ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों की फंडिंग पर उठाए सवालराजनीति
22 अक्तू॰ 2026, 7:57 pm (1 घंटे पहले)· 0

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नेता इंद्रेश कुमार ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों की फंडिंग पर उठाए सवाल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि इन आयोजनों के लिए धन कहां से आ रहा है और क्या देश में बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की साजिश रची जा रही है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने कॉकरोच जनता पार्टी के आयोजनों और प्रदर्शनों की फंडिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा बनने वाले कुछ नासमझ युवाओं को देशविरोधी या अराजक तत्व गुमराह कर रहे हैं। उनके अनुसार यह बड़ा विषय है कि आखिर इन आंदोलनों के संचालन के पीछे आर्थिक मदद कहां से आ रही है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं इन सब गतिविधियों के जरिए भारत के भीतर भी बांग्लादेश जैसे हालात खड़े करने की कोशिश तो नहीं की जा रही है, जहां हाल ही में भारी अस्थिरता देखने को मिली थी। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि जनता अब इन आयोजनों की असलियत समझ चुकी है और धीरे-धीरे इन प्रदर्शनों में लोगों की मौजूदगी कम होती जा रही है।

पुराने विषयों को छोड़कर नए मुद्दों को आगे बढ़ाने पर सवाल

इंद्रेश कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि ये प्रदर्शन लगातार एक दिशा में आगे बढ़ने के बजाय पुराने विषयों को छोड़कर लगातार नए और भ्रामक मुद्दे उठाने में लगे रहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत में भी वैसी ही अराजकता फैलाने के प्रयास हो रहे हैं जैसे हालात बांग्लादेश में देखे गए थे, जहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, सूफी परंपरा का पालन करने वालों की हत्याएं और आम नागरिकों का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ था। उन्होंने जनता के बीच यह बात स्पष्ट रूप से रखी कि यह इस समय का सबसे महत्वपूर्ण और गंभीर सवाल है और वह सभी से यह जानना चाहते हैं कि इन युवाओं तथा अन्य लोगों को इन تمام गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता कहां से मिल रही है। उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि जैसे-जैसे दुनिया के सामने इन बातों की सच्चाई आ रही है, प्रदर्शनों में जुटने वाली भीड़ का आंकड़ा तेजी से घट रहा है।

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राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल और विपक्षी दलों पर निशाना

CJP अभियानों के दौरान तिरंगे के कथित उपयोग को लेकर आरएसएस नेता ने विपक्षी दलों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल राजनीतिक लाभ हासिल करने और नागरिकों के बीच वैमनस्य तथा विभाजन पैदा करने के लिए राष्ट्रीय ध्वज का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि हर घर तिरंगा अभियान पहले ही देश के करोड़ों परिवारों तक सफलतापूर्वक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल देश भर में अपनी बड़ी-बड़ी घोषणाओं को जमीन पर उतारने में सक्षम नहीं हैं और वे केवल केंद्र सरकार या उसके गठबंधन के पहले से किए गए सफल कार्यों को दोहराने का दिखावा कर रहे हैं। उनके अनुसार अब उनके पास जनता को दिखाने के लिए कोई नया काम नहीं बचा है और यह सब महज सियासी दिखावा बनकर रह गया है।

तिरंगे को दबाव का साधन बनाने का आरोप

इंद्रेश कुमार ने विस्तार से आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग तिरंगे को एक राजनीतिक हथियार या दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं। उनके मुताबिक 26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर जैसे राष्ट्रीय पर्वों के अवसरों पर चलाए गए हर घर तिरंगा अभियान ने देश के करोड़ों परिवारों में राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान की भावना को और अधिक प्रगाढ़ किया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तिरंगा हमेशा से भारत के लोगों को एकजुट रखने का सबसे बड़ा प्रतीक रहा है, लेकिन कुछ गुट इसका दुरुपयोग समाज में दरार डालने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि इस तरह के हथकंडों से ऐसे तत्वों को कभी कोई सफलता हासिल नहीं होगी।

भारत की लोकतांत्रिक परंपराएं और सहिष्णुता

अल्बानिया और फ्रांस जैसे विदेशी देशों के साथ भारत की तुलना करने वाले विपक्षी नेताओं के बयानों का जवाब देते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत हमेशा से सच्चे लोकतंत्र के मार्ग पर चला है, आज भी पूरी मजबूती से उसी राह पर अग्रसर है और भविष्य में भी इसी परंपरा का पालन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह देश हर धर्म और मत का आदर करने वाला राष्ट्र है और वैश्विक समुदाय इस सच्चाई को पूरी तरह स्वीकार करता है। उन्होंने भगवान बुद्ध, डॉ. बीआर आंबेडकर, गुरु नानक और महावीर स्वामी के साथ-साथ भगवान राम और भगवान कृष्ण के आदर्शों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसी गौरवशाली विरासत के कारण भारत हमेशा से उच्च नैतिक मूल्यों पर टिके रहने वाला राष्ट्र रहा है।

वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती साख और नेतृत्व

इंद्रेश कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को अपनी कार्यशैली के लिए किसी अन्य देश से सबक सीखने की कोई आवश्यकता नहीं है, बल्कि आज पूरी दुनिया भारत की नीतियों से सीख रही है। उन्होंने कहा कि देश वैश्विक स्तर पर युद्ध रोकने और अराजकता पर अंकुश लगाने की दिशा में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मानों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि बीते 10 से 11 वर्षों के दौरान दुनिया भर के 38 से अधिक देशों ने प्रधानमंत्री को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ये प्रतिष्ठित सम्मान आज के नए भारत को ही क्यों दिए जा रहे हैं और किसी अन्य देश को क्यों नहीं मिल रहे हैं।

देश के युवाओं की भूमिका और भविष्य

देश की युवा पीढ़ी के संदर्भ में बात करते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत के युवा पहले भी सही मार्ग पर थे, वर्तमान में भी सही दिशा में हैं और आगे भी देश के विकास में सही रास्ते पर बने रहेंगे। हालांकि उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि कुछ नासमझ युवाओं को अराजक तत्वों ने गुमराह कर दिया है और बाहरी फंडिंग के प्रभाव में आकर वे भटकाव का शिकार हो गए हैं। उन्होंने ऐसे सभी युवाओं से यह अपील की कि वे गलत रास्ता छोड़कर अविलंब सही दिशा में वापस लौट आएं। इस बीच, CJP को विपक्षी दलों से अच्छा समर्थन मिल रहा है, और हाल ही में पार्टी नेता अभिजीत दिपके ने शिवसेना यूबीटी नेता उद्धव ठाकरे को समर्थन देने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया था।

सवाल-जवाब

इंद्रेश कुमार ने किस पार्टी के प्रदर्शनों पर सवाल उठाए हैं?
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों पर सवाल उठाए हैं।
इंद्रेश कुमार ने प्रदर्शनकारियों की फंडिंग को लेकर क्या संदेह जताया है?
उन्होंने सवाल किया है कि इन आंदोलनों और प्रदर्शनों के संचालन के लिए पैसा कहां से आ रहा है और क्या देश में बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की कोशिश हो रही है।
तिरंगे के इस्तेमाल को लेकर विपक्षी दलों पर क्या आरोप लगाया गया है?
आरएसएस नेता ने आरोप लगाया है कि विपक्षी दल समाज में विभाजन पैदा करने और दबाव बनाने के लिए राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कितने देशों से नागरिक सम्मान मिले हैं?
पिछले 10 से 11 वर्षों में 38 से अधिक देशों ने प्रधानमंत्री को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए हैं।
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