केंद्र सरकार की तरफ से परीक्षाओं में धांधली पर नकेल कसने के मकसद से लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 यानी एंटी-पेपर लीक बिल पटल पर रखा गया। इस महत्वपूर्ण बिल को सदन के भीतर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पेश किया। इस कदम के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई कि शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के रहते हुए इस विधेयक को आखिर जितेंद्र सिंह ने सदन में क्यों रखा।
जितेंद्र सिंह के बिल पेश करने की मुख्य वजहें
इस पूरी प्रक्रिया के पीछे दो मुख्य प्रशासनिक कारण बताए गए हैं। सबसे पहली वजह यह है कि यह नया कानून केवल राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA से जुड़ी परीक्षाओं जैसे कि NEET, JEE या CUET तक ही सीमित नहीं है। इसका दायरा यूपीएससी, एसएससी, रेलवे, बैंकिंग और तमाम अन्य केंद्रीय भर्ती परीक्षाओं तक फैला हुआ है। इन सभी बड़ी परीक्षाओं के संचालन और देखरेख की जिम्मेदारी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी DoPT के पास है, जिसके कैबिनेट मंत्री जितेंद्र सिंह हैं। चूंकि साल 2024 में इस मूल कानून को भी उन्होंने ही संसद में रखा था, इसलिए संशोधन विधेयक लाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास रही।
दूसरी बड़ी वजह यह है कि प्रह्लाद जोशी को हाल ही में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जिस दिन यह बिल लोकसभा में लाया जाना था, उसी दिन सदन के भीतर प्रश्नकाल और शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अन्य प्रशासनिक कार्यों को संभालना प्रह्लाद जोशी की प्राथमिकता थी। काम के इस भारी दबाव और तालमेल के चलते इस विशेष विधेयक को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी डॉ. जितेंद्र सिंह को सौंपी गई थी।
प्रह्लाद जोशी को मिली शिक्षा मंत्रालय की कमान
गौरतलब है कि जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया। नेतृत्व में यह बदलाव ऐसे दौर में हुआ है जब देश की पूरी शिक्षा प्रणाली एक बड़े संक्रमण काल और बदलाव से गुजर रही है। सरकार इस समय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह जमीन पर उतारने और स्कूलों के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करने में जुटी है। सरकार को पूरी उम्मीद है कि प्रह्लाद जोशी के लंबे प्रशासनिक अनुभव से शिक्षा क्षेत्र में चल रहे इन सभी सुधारों को और तेजी मिलेगी। शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के तुरंत बाद प्रह्लाद जोशी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे।
हाई पावर टास्क फोर्स का गठन और राजनीतिक सरगर्मी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को GenZ से जो वादा किया था, उसके तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इसके अलावा प्रधानमंत्री के विशेष निर्देशों पर नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक हाई पावर टास्क फोर्स भी बना दी गई है। सरकार ने संसद में एंटी-पेपर लीक नया बिल पेश तो कर दिया है, लेकिन विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के कारण इस जरूरी विधेयक पर सदन में ढंग से चर्चा नहीं हो पा रही है।
सदन की कार्यवाही और हंगामे का दौर
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दोपहर के समय सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में रखा, लेकिन विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के चलते इस पर विचार-विमर्श आगे नहीं बढ़ सका। विपक्षी सांसद इस बिल पर चर्चा से पहले छात्रों के साथ हुई मारपीट के मामले पर सरकार को घेरना चाहते हैं और उसी पर बहस की मांग पर अड़े हैं। सत्ता पक्ष का कहना है कि नए बिल पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए। इस गतिरोध की वजह से लोकसभा की कार्यवाही को पहले 12 बजे तक, फिर दोपहर 2 बजे तक और उसके बाद शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सभी राजनीतिक दलों के बीच आपसी सहमति बनाने के लिए कुल 3 घंटे का समय दिया था।
इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से हटने के बाद धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया भी सामने आ चुकी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश के बयानों का जवाब देते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह एक स्ट्रीट फाइटर हैं, न कि एसी रूम के एक्टिविस्ट।



















