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अमेठी में 2027 विधानसभा चुनाव की बिसात बिछी, सपा विधायक महाराजी प्रजापति के काम पर बंटे मतदाताराजनीति
14 अग॰ 2026, 7:00 pm (3 घंटे पहले)· 2

अमेठी में 2027 विधानसभा चुनाव की बिसात बिछी, सपा विधायक महाराजी प्रजापति के काम पर बंटे मतदाता

उत्तर प्रदेश के अमेठी विधानसभा क्षेत्र में 2027 के चुनावी मुकाबले को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, जहां स्थानीय निवासी मौजूदा विधायक के कामकाज और इलाके के विकास पर अलग-अलग राय रख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की प्रशासनिक और राजनीतिक सुगबुगाहट तेज होने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बनने बिगड़ने लगे हैं। राज्य की चर्चित सीटों में शामिल अमेठी जिले की अमेठी विधानसभा सीट पर राजनीतिक सरगर्मियां विशेष रूप से ध्यान खींच रही हैं। इस सीट का राजनीतिक इतिहास और वर्तमान स्थिति काफी दिलचस्प रही है, जिसकी मुख्य वजह वर्तमान समाजवादी पार्टी विधायक महाराजी प्रजापति हैं। साल 2022 के पिछले विधानसभा चुनाव में महाराजी प्रजापति ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और अमेठी रियासत के महाराज डॉक्टर संजय सिंह को पराजित कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। वर्तमान में वह इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, लेकिन आगामी चुनाव से पहले उनके पांच साल के कार्यकाल को लेकर स्थानीय मतदाताओं के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है।

विकास कार्यों को लेकर बंटी जनमत की राय

अमेठी विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में आम जनता से संवाद करने पर विधायक के प्रदर्शन को लेकर दो स्पष्ट धड़े नजर आते हैं। कुछ मतदाता जहां उनके प्रयासों का समर्थन करते हैं, वहीं अन्य लोगों का मानना है कि 2022 की जीत एक बार का घटनाक्रम थी और उन्हें दोबारा विधानसभा पहुंचने का अवसर नहीं मिलेगा। कुछ स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सीट परंपरागत रूप से जातीय गणित पर निर्भर रही है, इसलिए 2027 में नेतृत्व परिवर्तन होना तय है।

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स्थानीय नागरिक और मतदाता शेषनारायण दुबे ने विधायक के कार्यकाल पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में विकास के दावे केवल दिखावा साबित हुए हैं। उनके अनुसार, न तो नई सड़कों का निर्माण हुआ और न ही कोई बुनियादी ढांचा सुधारा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लाइटें लगाई गई थीं, उन्हें भी बाद में हटा लिया गया। विधायक की जनता से दूरी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब करोड़ों रुपये खर्च करने की बात कही जाती है, तो इसका स्पष्ट हिसाब जनता के सामने रखा जाना चाहिए।

समीकरण, विकास का अभाव और खोई परियोजनाएं

एक अन्य स्थानीय निवासी महेश कुमार का आकलन है कि आगामी चुनाव में वर्तमान विधायक को हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेठी में विकास कार्य पूरी तरह ठप्प हैं, जो इस क्षेत्र का दुर्भाग्य है। उन्होंने अनुमान जताया कि 2027 में भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार जीत हासिल कर सकता है, हालांकि अंतिम समय में जनता का रुख बदल भी सकता है।

क्षेत्रीय मतदाता कुड्डूस खान ने अमेठी के चुनावी स्वरूप का विश्लेषण करते हुए बताया कि यहां का अंतिम परिणाम हमेशा जातीय समीकरणों से तय होता है। उन्होंने कहा कि मतदान के अंतिम पलों तक जीत का अनुमान लगाना मुश्किल होता है, लेकिन इस बार जनता विकास की इच्छा के कारण नए चेहरे को चुन सकती है। उन्होंने अमेठी की ऐतिहासिक उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की।

कुड्डूस खान के अनुसार, अमेठी 1968 से टाउन एरिया बनी हुई है और इतने दशक बीत जाने के बाद भी इसे नगर पालिका का दर्जा नहीं मिल सका। उन्होंने याद दिलाया कि समय के साथ क्षेत्र ने कई महत्वपूर्ण संस्थान खो दिए हैं, जिनमें सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ का कार्यालय, ट्रिपल आईटी संस्थान और फूड पार्क शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक बदलाव के बाद विकास के मामलों में बदले की भावना से काम नहीं होना चाहिए और जो रफ्तार पहले थी, उसे कायम रखा जाना चाहिए।

सहानुभूति कार्ड बनाम विधायक निधि का प्रदर्शन

विधायक के समर्थक माने जाने वाले मतदाताओं की राय में भी कुछ शिकायतें शामिल हैं। स्थानीय निवासी राकेश पांडे ने स्वीकार किया कि विधायक ने कुछ सड़कें बनवाई हैं और रोशनी की व्यवस्था की है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि विधायक आम जनता के बीच नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहती हैं और केवल अपने नजदीकी समर्थकों तक सीमित रहती हैं। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधि को समाज के सभी वर्गों के साथ समान रूप से मिलना जुलना चाहिए।

कानून व्यवस्था और राजनीतिक गतिशीलता पर राय रखते हुए एक अन्य मतदाता ने कहा कि राज्य में अपराध नियंत्रण और अपराधियों पर कार्रवाई के कारण कानून व्यवस्था बेहतर हुई है। 2022 के चुनाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि विधायक ने उस समय अपने पति गायत्री प्रजापति के लिए न्याय मांगने के भावनात्मक मुद्दे पर चुनाव लड़ा था और विभिन्न मंचों से इसी बात को दोहराकर जीत हासिल की थी।

उस मतदाता के मुताबिक, विधायक ने न तो चुनाव प्रचार के दौरान बुनियादी विकास पर ध्यान केंद्रित किया और न ही विधानसभा के भीतर क्षेत्र के बड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया। राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने और विधायक के समाजवादी पार्टी से जुड़े होने के कारण भी विकास की गति प्रभावित हुई है। हालांकि विधायक निधि से कुछ कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन वे जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं। इसके अलावा, उनकी अपनी पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान भी चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं, एक अन्य नागरिक का कहना था कि सड़कें बन रही हैं और कार्य हो रहा है, लेकिन विभिन्न सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है।

करोड़ों खर्च करने का दावा: विधायक महाराजी प्रजापति का पक्ष

जनता के इन आरोपों और दावों के बीच खुद विधायक महाराजी प्रजापति ने अपना पक्ष रखा है। टेलीफोन पर हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और मूलभूत नागरिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर निरंतर काम किया है। उनका कहना है कि वे लगातार जनता के सुख दुख में शामिल होती रही हैं और उन्होंने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत और खर्च कराए हैं।

विधायक ने कहा कि वे जनता को सर्वोपरि मानती हैं। क्षेत्र में जब भी कोई समस्या सामने आती है, तो वे स्वयं, सोशल मीडिया माध्यमों से अथवा अपने कार्यकर्ताओं के जरिए उसका निस्तारण कराने का प्रयास करती हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि क्षेत्र की बेहतरी के लिए उनका यह प्रयास भविष्य में भी जारी रहेगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 2027 के चुनाव में अमेठी की जनता पुराना भरोसा कायम रखती है या नए विकल्प का चुनाव करती है।

सवाल-जवाब

2022 के चुनाव में अमेठी सीट से किसकी जीत हुई थी?
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी महाराजी प्रजापति ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार डॉक्टर संजय सिंह को हराकर जीत दर्ज की थी।
अमेठी की जनता विधायक महाराजी प्रजापति के काम से कितनी संतुष्ट है?
अमेठी में जनता की राय बंटी हुई है। कुछ लोग सड़क और लाइट लगवाने की सराहना करते हैं, जबकि कई मतदाता विकास न होने और विधायक की अनुपस्थिति की शिकायत करते हैं।
अमेठी के स्थानीय निवासियों ने किन प्रमुख विकास मुद्दों को उठाया है?
स्थानीय निवासियों ने 1968 से टाउन एरिया रहने के बाद भी नगर पालिका न बनने, बीआरओ कार्यालय, ट्रिपल आईटी और फूड पार्क के चले जाने जैसे मुद्दे उठाए हैं।
विधायक महाराजी प्रजापति का अपने कार्यकाल के दावों पर क्या कहना है?
विधायक ने कहा है कि उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और मूलभूत सुविधाओं पर काम किया है और विधानसभा में विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं।
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