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स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद सियासी घमासान: पी. चिदंबरम की टिप्पणी पर रविशंकर प्रसाद का करारा हमलाराजनीति
16 अग॰ 2026, 8:37 pm (71 दिन पहले)· 5

स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद सियासी घमासान: पी. चिदंबरम की टिप्पणी पर रविशंकर प्रसाद का करारा हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए दिमागी नक्सल वाले भाषण पर विवाद गहरा गया है। पी. चिदंबरम के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर माओवादी विचारधारा को बौद्धिक संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से दिए गए संबोधन के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान हथियारबंद नक्सलवाद के खात्मे की बात करते हुए समाज में मौजूद 'दिमागी नक्सल' तत्वों के प्रति आगाह किया था। इस टिप्पणी पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पटना में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने चिदंबरम के बयान को बेहद गैर जिम्मेदारना और निंदनीय करार देते हुए विपक्षी दल की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए।

लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन और दिमागी नक्सल की चेतावनी

15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से राष्ट्र को संबोधित किया था। अपने भाषण में उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा की स्थिति का ब्यौरा देते हुए कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से हथियारबंद नक्सलवाद और माओवादी हिंसा लगभग समाप्त हो चुकी है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि हिंसा का विचार अब भी कुछ लोगों के दिमाग में जीवित है, जिसे उन्होंने 'दिमागी नक्सल' की संज्ञा दी। उन्होंने देशवासियों से अपील की थी कि ऐसे तत्वों की पहचान की जाए और उन्हें समाज से अलग-थलग किया जाए जो अराजकता फैलाने और हिंसा के अवसर तलाशने का काम करते हैं।

पी. चिदंबरम की सोशल मीडिया पोस्ट और विवाद की शुरुआत

प्रधानमंत्री के इस राष्ट्रीय संबोधन के बाद कांग्रेस सांसद और देश के पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्हें दिमागी नक्सली होने पर गर्व है। पूर्व गृह मंत्री के इस सार्वजनिक बयान के आते ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। बीजेपी ने इस टिप्पणी को तुरंत लपक लिया और आरोप लगाया कि कांग्रेस के शीर्ष नेता देश में उग्रवादी और अराजक तत्वों का समर्थन करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

रविशंकर प्रसाद का पटना में पलटवार और तीखे सवाल

चिदंबरम के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने चिदंबरम की टिप्पणी को बेहद शर्मनाक, अशिष्ट और अश्लील बताते हुए कहा कि इसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि चिदंबरम अंग्रेजी भाषा के अच्छे जानकार हैं और उन्हें प्रधानमंत्री के दिए गए बयान के संदर्भ को अच्छी तरह समझना चाहिए था। उन्होंने सवाल किया कि देश के पूर्व गृह मंत्री पद पर रह चुका व्यक्ति इस प्रकार का गैर जिम्मेदाराना वक्तव्य देकर समाज को क्या संदेश देना चाहता है।

वैचारिक संरक्षण और अर्बन नक्सलवाद का मुद्दा

रविशंकर प्रसाद ने अपने हमले को आगे बढ़ाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का इशारा स्पष्ट रूप से 'अर्बन नक्सल' मानसिकता की तरफ था। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बुद्धिजीवी और राजनेता ही माओवादी आंदोलनों को वैचारिक और सामाजिक संरक्षण प्रदान करते हैं। यह वर्ग माओवादी हिंसा के पक्ष में माहौल तैयार करता है, उनके समर्थन में लेख लिखता है और संवैधानिक प्रक्रियाओं को नजरअंदाज करते हुए उग्रवाद को बौद्धिक आवरण प्रदान करने की कोशिश करता है। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस पार्टी और उसके नेता भी हिंसा के जरिए सत्ता हथियाने और तबाही मचाने वाली उसी माओवादी राह पर चलना चाहते हैं।

बस्तर और जहानाबाद में बदलाव और अमित शाह की नीतियों की सराहना

संवाददाता सम्मेलन के दौरान बीजेपी सांसद ने केंद्र सरकार की सुरक्षा नीतियों की सफलता का उदाहरण दिया। उन्होंने बस्तर और जहानाबाद जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि एक समय था जब इन इलाकों में माओवादी आतंक के डर से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराना भी एक बड़ी चुनौती हुआ करता था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह की रणनीतिक नीतियों के कारण आज इन दूरदराज के क्षेत्रों में सुरक्षा, शांति और विकास का माहौल कायम हो चुका है। उन्होंने कहा कि जब प्रभावित इलाकों में तिरंगा लहरा रहा है, तब कांग्रेस नेताओं का ऐसा रुख आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ चल रही देश की लड़ाई को कमजोर करता है।

कांग्रेस और बीजेपी के बीच बढ़ता राजनीतिक टकराव

इस पूरे मामले ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को विपक्ष की आवाज दबाने और राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बता रही है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में जुटी है। बीजेपी का कहना है कि पूर्व गृह मंत्री की यह टिप्पणी केवल एक व्यक्तिगत विचार नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस पार्टी के उस असली चेहरे को उजागर करती है जो केवल राजनीतिक स्वार्थ और सत्ता पाने की होड़ में उग्रवादी विचारधाराओं का परोक्ष रूप से पोषण करती रही है।

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सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को क्या बयान दिया था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद समाप्त हो चुका है, लेकिन 'दिमागी नक्सल' अभी भी मौजूद हैं।
पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा था?
कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने एक्स पर लिखा कि उन्हें दिमागी नक्सली होने पर गर्व है।
रविशंकर प्रसाद ने पटना में क्या प्रतिक्रिया दी?
बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने चिदंबरम के बयान को शर्मनाक, अशिष्ट, अश्लील और निंदनीय करार देते हुए तीखी आलोचना की।
रविशंकर प्रसाद ने किन क्षेत्रों में सुरक्षा सुधार का उल्लेख किया?
उन्होंने बस्तर और जहानाबाद का उदाहरण देते हुए कहा कि केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों से वहां अब शांति और तिरंगा लहरा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·71 दिन पहले

प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद उपजा यह वैचारिक टकराव भारत के राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर रहा है। सुरक्षा और असहमति की परिभाषा पर छिड़ी यह बहस आगामी चुनावी राज्यों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विमर्श का मुख्य केंद्र बन सकती है, जहाँ सुरक्षा के मुद्दों पर वैचारिक निष्ठा का परीक्षण तीव्र होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·71 दिन पहले

लाल किले के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद उपजा यह वैचारिक टकराव आंतरिक सुरक्षा और अभिव्यक्ति के दायरे पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पूर्व गृह मंत्री स्तर के नेता द्वारा 'दिमागी नक्सली' होने पर गर्व जताना और उस पर सत्ता पक्ष का उग्र काउंटर-हमला यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में उग्रवाद और शहरी नक्सलवाद के मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक कानूनी और राजनीतिक खींचतान और तेज होगी।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·71 दिन पहले

अंक ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो 15 अगस्त 2026 यानी 80वें स्वतंत्रता दिवस का मूलांक 6 बनता है, जो शुक्र ग्रह से शासित है और कूटनीति, आपसी संवाद तथा वैचारिक संघर्षों का प्रतिनिधित्व करता है। इस समय अंकों का संयोजन यह संकेत देता है कि राजनीतिक नेतृत्व और विपक्षी धड़ों के बीच वैचारिक ध्रुवीकरण अपनी चरम सीमा पर पहुँचेगा। प्रधानमंत्री के भाषण और पूर्व गृह मंत्री की प्रतिक्रिया के बाद पैदा हुआ यह तनाव आने वाले महीनों में संसद और जनमानस के स्तर पर संवादहीनता को और गहरा करेगा, जिससे वैचारिक लड़ाइयाँ और अधिक तीव्र हो सकती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·71 दिन पहले

लाल किले से दिए गए भाषण पर छिड़ा यह वैचारिक संग्राम आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना रहेगा। पूर्व गृह मंत्री के इस बयान और उस पर भाजपा की आक्रामक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीतियों और चुनावी बहसों में भी इसकी गूंज साफ सुनाई देगी।

Ravikash Gupta@ravikash·71 दिन पहले

लाल किले के इस भाषण और इसके बाद उपजे राजनीतिक टकराव का असर केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव नीतिगत बहसों और कॉर्पोरेट-आर्थिक माहौल पर भी पड़ सकता है। जब देश की आंतरिक सुरक्षा और वैचारिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दे राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आते हैं, तो निवेशक और बाजार विश्लेषक भी नीतिगत स्थिरता और राजनीतिक दिशा को लेकर सतर्क हो जाते हैं। आने वाले समय में इस प्रकार के वैचारिक संघर्ष संसद के सत्रों और विधायी चर्चाओं में नीतिगत गतिरोध का कारण बन सकते हैं, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक सुधारों और कारोबारी धारणा पर भी मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकता है।

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