जिंदगी कई बार ऐसे अनियोजित मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहां की गई एक छोटी सी नेकी इंसान के पूरे भविष्य को बदलकर रख देती है। कई प्रेम कहानियां फिल्मी सेट या भव्य आयोजनों की मोहताज नहीं होतीं, बल्कि वे रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच किसी बेजुबान की मदद करने जैसे साधारण पलों से जन्म ले लेती हैं। आरव और सिया की यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां ऑफिस पहुंचने में हुई देरी ने दो जिंदगियों को हमेशा के लिए एक-दूसरे के करीब ला दिया।
सुबह की वो घटना और एक बेजुबान की पुकार
सोमवार की सुबह का वक्त था और हर कोई अपने दफ्तर पहुंचने की जल्दी में था। आरव और सिया दोनों एक ही डिजिटल मार्केटिंग कंपनी में कार्यरत थे, लेकिन उनकी टीमें अलग थीं। हालांकि, दोनों में एक बात बिल्कुल समान थी और वह था जानवरों के प्रति उनका अगाध प्रेम। सिया अक्सर अपने मोहल्ले के बेसहारा कुत्तों और बिल्लियों के लिए खाने-पीने का इंतजाम करती थी, वहीं आरव अपने दफ्तर के बैग में हमेशा बिस्किट का पैकेट रखता था ताकि रास्ते में कोई भूखा जानवर मिल जाए तो उसे कुछ खिला सके। उस सुबह जब सिया अपने घर से दफ्तर के लिए निकली, तो उसने रास्ते में एक छोटे से स्ट्रीट डॉग को बेहद डरी हुई हालत में देखा। वह कुत्ता एक तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से बाल-बाल बचा था और खौफ के मारे एक कोने में सहमा हुआ बैठा था। सिया ने फौरन अपनी गाड़ी रोकी और उस बेजुबान को सड़क के बीच से हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास करने लगी।
आरव का साथ आना और मिलकर मदद करना
ठीक उसी समय आरव भी दफ्तर की तरफ जा रहा था। जब उसने सिया को सड़क किनारे परेशान हाल में देखा, तो उसने अपनी गाड़ी रोक दी और बिना एक पल गंवाए मदद के लिए आगे आ गया। सिया ने घड़ी की तरफ देखते हुए उससे कहा कि दफ्तर के लिए लेट हो रहे हैं, लेकिन आरव ने दो टूक जवाब दिया कि इस हालत में उस बेजुबान को बीच सड़क पर कैसे छोड़ा जा सकता है। दोनों ने मिलकर उस पपी को सड़क से दूर किया और देखा कि उसके पैर में हल्की सी चोट भी आई हुई थी। इसके बाद उन्होंने तुरंत नजदीकी एनिमल रेस्क्यू ग्रुप से संपर्क साधा और उनकी टीम के आने तक वहीं डटे रहे। इसी दौरान बातचीत में दोनों को पता चला कि वे एक ही छत के नीचे एक ही कंपनी में काम करते हैं। जब वे अपनी इस जद्दोजहद के बाद दफ्तर पहुंचे, तो तय समय से करीब आधे घंटे की देरी हो चुकी थी और उनकी टीम की महत्वपूर्ण मीटिंग पहले ही शुरू हो चुकी थी।
बॉस के सामने सच बोलना और अप्रत्याशित प्रतिक्रिया
दफ्तर पहुंचते ही दोनों को सीधे उनके सख्त मिजाज बॉस करण के केबिन में तलब किया गया। करण अपनी टाइमिंग की पाबंदी और सख्त रवैये के लिए पूरे दफ्तर में जाने जाते थे। केबिन के अंदर कदम रखते ही सिया ने बिना किसी बनावटी बहाने के पूरी सच्चाई बया कर दी। आरव ने भी बेहिचक स्पष्ट कर दिया कि वे चाहते तो समय पर पहुंचने के लिए उस डॉग को अनदेखा कर सकते थे, लेकिन उनका जमीर उन्हें इसकी इजाजत नहीं देता था। दोनों को अंदर ही अंदर यह अंदेशा सता रहा था कि अब उन्हें एक लंबा और तीखा लेक्चर सुनना पड़ेगा। लेकिन इसके विपरीत, करण कुछ पलों तक शांत रहने के बाद मुस्कुराए और बोले कि देर से आने की जवाबदेही उनकी है और भविष्य में उन्हें वक्त का ख्याल रखना होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी बेजुबान की जान बचाने के लिए रुकना कतई गलत नहीं था और उन्हें इस बात की खुशी है कि दोनों ने कोई झूठा बहाना बनाने के बजाय सच का रास्ता चुना। करण ने आगे सलाह दी कि अगली बार ऐसी आपात स्थिति में टीम को सूचित कर देना चाहिए क्योंकि इंसानियत और पेशेवर जिम्मेदारी दोनों को साथ निभाया जा सकता है।
दोस्ती से आगे बढ़कर प्यार में बदलने का सफर
बॉस के केबिन से बाहर निकलने के बाद सिया ने राहत की सांस ली और आरव ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनकी आज की टीमवर्क की पहली मीटिंग काफी दिलचस्प रही। उस दिन दोपहर के लंच ब्रेक में दोनों ने साथ बैठकर खाना खाया। उनकी बातें कुत्तों से शुरू होकर धीरे-धीरे पसंदीदा फिल्मों, घूमने की जगहों और जिंदगी से जुड़े छोटे-छोटे सपनों तक जा पहुंचीं। उन्हें महसूस हुआ कि उनके शौक और विचार काफी हद तक एक जैसे हैं। आने वाले कुछ दिनों में उनका साथ लंच करना और ऑफिस के बाद जानवरों की मदद के लिए योजना बनाना आम बात हो गई। एक शाम जब वे दफ्तर से लौट रहे थे, तो आरव ने हिम्मत जुटाकर कहा कि अगर उस दिन वे दोनों उस स्ट्रीट डॉग के लिए नहीं रुकते, तो शायद आज भी वे एक-दूसरे को देखकर सिर्फ औपचारिक हाय-हैलो ही कर रहे होते। सिया के चेहरे पर एक खूबसूरत मुस्कान तैर गई और उसने हामी भरते हुए अपनी भावनाओं का इजहार किया। इस तरह एक छोटे से नेक काम से शुरू हुई उनकी प्रेम कहानी ने बिना किसी दिखावे के एक मजबूत और खूबसूरत रिश्ते की नींव रख दी।



















