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तेलंगाना विधानसभा में रेवंत रेड्डी और बीआरएस के बीच तीखी झड़प, केसीआर पर लगे गंभीर आरोपराजनीति
17 सित॰ 2026, 5:36 pm (39 दिन पहले)· 2

तेलंगाना विधानसभा में रेवंत रेड्डी और बीआरएस के बीच तीखी झड़प, केसीआर पर लगे गंभीर आरोप

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे बिहार से आकर यहां की संपत्ति लूटना चाहते थे। इस बयान के बाद सदन में जबरदस्त राजनीतिक घमासान मच गया है।

तेलंगाना विधानसभा के भीतर बुधवार को उस समय सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया जब मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता के. चंद्रशेखर राव पर बेहद तीखे सियासी हमले किए। सदन के पटल पर जमीन के पुराने रिकॉर्ड और धारा 22-ए के दायरे में आने वाली संपत्तियों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने भारत राष्ट्र समिति के पूरे दस साल के शासनकाल में हुए तथाकथित भूमि घोटालों के तार सीधे तौर पर केसीआर से जोड़ दिए और उन पर गंभीर सवाल खड़े किए।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि केसीआर और उनके परिवार की नजरें हमेशा से आजादी के दौर से पहले की निजामकालीन संपत्तियों और बेशकीमती जमीनों पर टिकी रही हैं। उन्होंने बीआरएस सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों, सरकारी संपत्तियों और जमीनों पर पहला हक यहां के गरीब तबके, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यक समुदाय का बनता है। मुख्यमंत्री का दावा था कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान शासन की पूरी ताकत का इस्तेमाल केवल एक खास परिवार की तिजोरी भरने और हजारों एकड़ जमीन पर कब्जा जमाने के लिए किया गया।

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इस जोरदार हमले के बाद विधानसभा के भीतर बैठे बीआरएस के विधायकों ने कड़ी आपत्ति जताई और जोरदार हंगामा किया, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया। बहस के दौरान मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि वे किस मूल गांव से आते हैं और वे यहां के संसाधनों पर हाथ साफ करने के लिए बिहार से आए थे। उन्होंने निजाम शासन का जिक्र करते हुए कहा कि उस हुकूमत ने लंबे समय तक राज किया और तमाम व्यवस्थाएं यहीं छोड़ दीं, लेकिन गरीबों का हक उन तक नहीं पहुंचने दिया गया। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे अपने निजी फायदे के लिए राजनीति में नहीं आए हैं और उन्हें अपनी दौलत बढ़ाने की कोई लालसा नहीं है, बल्कि उनका मकसद केवल वंचित तबके की भलाई के लिए काम करना है।

इन तीखे बयानों के बीच ही सरकार ने केसीआर परिवार के ठिकानों और संपत्तियों की जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने सिद्दिपेट जिले के एर्रावेली इलाके में स्थित केसीआर के फॉर्महाउस के आसपास की जमीनों की नए सिरे से जांच कराने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार का यह भी आरोप है कि जिस जमीन को आधिकारिक तौर पर आवंटित किया गया था, वह भी उसी बड़े भूभाग का एक हिस्सा है। प्रशासनिक अमले को जमीन के असली मालिकाना हक और उसकी मौजूदा कानूनी स्थिति का बारीकी से पता लगाने का आदेश दे दिया गया है।

सरकार की ओर से यह दावा भी सामने आया कि केसीआर और उनके परिजनों के पास कुल मिलाकर लगभग 439 एकड़ जमीन है। दूसरी तरफ, बीआरएस ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस सरकार पर पलटवार किया है। सदन में बीआरएस के फ्लोर लीडर टी. हरीश राव ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के परिवार के पास मौजूद जमीनों की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए, जिससे विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह जमीन के मालिकाना हक को लेकर घमासान छिड़ गया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच रेवंत रेड्डी की ओर से निजाम काल के प्रशासन की तारीफ किए जाने वाले बयानों ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है, जिससे भारतीय जनता पार्टी काफी आक्रामक हो गई है। तेलंगाना के भू-राजस्व इतिहास पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने निजाम को एक बेहतर प्रशासक करार दिया था और कहा था कि उन्होंने लंबे समय तक इस क्षेत्र पर राज करते हुए कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक काम किए। इन बयानों के आने का समय बेहद संवेदनशील है क्योंकि ठीक उसी दौरान 17 सितंबर को हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाया जा रहा है, जो 1948 में इस पुराने रियासती राज्य के भारतीय संघ में विलय की ऐतिहासिक याद दिलाता है।

इस अवसर पर केंद्र सरकार की ओर से सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हो रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी समेत भाजपा के कई बड़े नेताओं ने 17 सितंबर के ऐतिहासिक दिन पर पिछली बीआरएस सरकार और मौजूदा कांग्रेस सरकार के रुख की तीखी आलोचना की है। किशन रेड्डी ने मुख्यमंत्री के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि यह दिन निजाम और रजाकारों के अत्याचारों के खिलाफ अपनी जान की बाजी लगाने वाले शहीदों को याद करने का है, न कि किसी एक वर्ग को खुश करने का। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए इतिहास के पन्नों को जानबूझकर बदला जा रहा है और क्रूरता को भुलाकर केवल इमारतों का महिमामंडन किया जा रहा है।

सवाल-जवाब

रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में किस पर आरोप लगाया?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव पर तेलंगाना के संसाधनों को लूटने का आरोप लगाया।
सरकार ने किस जमीन की जांच के आदेश दिए हैं?
सरकार ने सिद्दिपेट जिले के एर्रावेली में केसीआर के फॉर्महाउस के आसपास की जमीनों की जांच के आदेश दिए हैं।
केसीआर और उनके परिवार के पास कुल कितनी जमीन होने का दावा किया गया है?
सरकार की ओर से आरोप लगाया गया है कि KCR और उनके परिवार के पास कुल मिलाकर लगभग 439 एकड़ जमीन है।
बीआरएस की तरफ से इस पर किसने पलटवार किया?
बीआरएस के फ्लोर लीडर टी. हरीश राव ने रेवंत रेड्डी के परिवार से जुड़ी जमीन के बारे में सवाल उठाकर पलटवार किया।
हैदराबाद मुक्ति दिवस कब मनाया जाता है?
हैदराबाद मुक्ति दिवस 17 सितंबर को मनाया जाता है, जो 1948 में भारतीय संघ में इसके विलय की याद दिलाता है।
सद्भावना कार्यक्रम का आयोजन कहां किया जा रहा है?
केंद्र सरकार की ओर से सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कौन होंगे?
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे।
बीजेपी ने किस बात पर आपत्ति जताई है?
बीजेपी ने निजाम शासन की तारीफ करने और रजाकारों के अत्याचारों को नजरअंदाज करने वाले बयानों पर आपत्ति जताई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·38 दिन पहले

तेलंगाना विधानसभा में चल रहा यह तीखा संघर्ष केवल राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह अंकों के प्रभाव और नेतृत्व के अंकशास्त्रीय संघर्ष का परिणाम है। सत्ता और संपत्ति को लेकर हो रहे इस टकराव में आने वाले समय में कानूनी और प्रशासनिक जांच का दायरा और अधिक व्यापक हो सकता है, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव और अधिक गहराएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·38 दिन पहले

तेलंगाना विधानसभा में भूमि स्वामित्व और निजाम-युग की संपत्तियों को लेकर छिड़ा यह विवाद सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे आर्थिक और कॉरपोरेट निहितार्थ हैं। जब किसी राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद शीर्ष नेतृत्व के व्यावसायिक हितों और जमीनी होल्डिंग्स पर इस तरह की कानूनी और प्रशासनिक जांच तेज होती है, तो यह निवेशकों के बीच एक अस्थिरता का संदेश भेजती है। यदि सरकार Erravelli फॉर्महाउस और बड़े पैमाने पर फैले 439 एकड़ भूमि के मामलों में कड़े कदम उठाती है, तो इससे राज्य के रियल एस्टेट बाजार, भूमि उपयोग नीतियों और कॉरपोरेट सेंटीमेंट्स पर दूरगामी असर पड़ना तय है।

Aisha Khan@aisha-khan·38 दिन पहले

रविकाश के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस तरह के हाई-प्रोफाइल राजनीतिक टकराव और ज़मीनी स्वामित्व की जांच का सीधा असर अब डिजिटल मीडिया, मीम कल्चर और सोशल मीडिया ट्रेंड्स पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जब सदन की ऐसी तीखी बहसें और फॉर्महाउस जैसे निजी परिसरों के आंकड़े सार्वजनिक मंचों पर वायरल होते हैं, तो वे आम जनता के बीच एक बड़ा नैरेटिव सेट करते हैं। मनोरंजन और पॉप कल्चर के लिहाज़ से भी, इस प्रकार की राजनीतिक ड्रामेबाज़ी और बयानों के तीर अब सोशल मीडिया पर रील्स, ट्रेंडिंग डिबेट्स और डिजिटल चर्चाओं का मुख्य विषय बन चुके हैं, जो आने वाले समय में राज्य के राजनीतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित करेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·38 दिन पहले

तेलंगाना विधानसभा में ज़मीन के रिकॉर्ड और धारा २२-ए को लेकर हुआ यह टकराव सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि प्रशासनिक जाँच और कानूनी पन्नों में उलझने वाला बड़ा विवाद बन चुका है। सिद्दिपेट के एर्रावेली फॉर्महाउस और लगभग ४३९ एकड़ ज़मीन के मालिकाना हक़ की नए सिरे से पड़ताल के आदेश दिए जाने के बाद, यह मामला अब विधानसभा के फर्श से निकलकर एंटी-करप्शन या एंटी-लैंड ग्रैबिंग विंग की औपचारिक जाँच का रूप ले सकता है। बीआरएस की ओर से मुख्यमंत्री के परिवार की संपत्तियों पर सवाल उठाने से यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह कानूनी और राजनीतिक दंगल और अधिक आक्रामक होगा, जिससे राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता पर सीधा असर पड़ना तय है।

Rohan Verma@rohan-verma·38 दिन पहले

सिद्दिपेट फॉर्महाउस और ४३९ एकड़ जमीन के मालिकाना हक पर प्रशासनिक जांच के आदेश से तेलंगाना की सियासत में कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से संपत्तियों की वैधता पर सवाल खड़े किए जाने से आने वाले दिनों में यह विवाद केवल सदन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी मोर्चे और जमीन के पुराने दस्तावेजों की जंग का रूप ले लेगा, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल और अधिक गर्माएगा।

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