अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की दीर्घकालिक तेजी इस समय 4,000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के इर्द-गिर्द कड़ी परीक्षा से गुजर रही है। बुलियन की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच डेरिवेटिव बाजार और फंड्स के स्तर पर तेज हलचल देखने को मिल रही है। कमोडिटी ट्रेडिंग एडवाइजर्स यानी सीटीए सभी सिग्नलों पर शॉर्ट पोजीशन में आ चुके हैं, जिससे सिस्टमैटिक फंड्स की तरफ से भारी बिकवाली का माहौल बना हुआ है। इसके साथ ही ईटीएफ से हो रही शुरुआती निकासी, विशेष रूप से चीन के निवेशकों द्वारा फंड्स खाली किए जाने से बाजार पर दबाव और गहरा गया है। हालांकि हाजिर और वायदा दोनों ही श्रेणियों में इस प्रमुख स्तर से नीचे फिसलने के बावजूद बाजार ने जोरदार मजबूती दिखाई है और कीमतें तेजी से संभलकर वापस लौटी हैं।
सीटीए शॉर्ट्स और ईटीएफ लिक्विडेशन का दबाव
कीमती धातुओं के बाजार में मौजूदा सुस्ती के पीछे तकनीकी फंड्स की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। टीडी सिक्योरिटीज के रायन मैके और बार्ट मेकल का मानना है कि सीटीए की तरफ से सभी सिग्नलों पर शॉर्ट पोजीशन बनने से सोने की लंबी अवधि की तेजी का आधार दबाव में आ गया है। इसके साथ ही शुरुआती चरण की ईटीएफ लिक्विडेशन, विशेष रूप से चीन के बाजार में देखने को मिली निकासी ने कमजोर होते माहौल को और कमजोर किया है। सिस्टमैटिक ट्रेडर्स के बिकवाल बनने से दबाव गहराया, लेकिन हाजिर और वायदा दोनों ही बाजारों में जब भाव 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे गए, तब भी बाजार ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया और बहुत कम समय में कीमतें वापस सुधर गईं।
विश्लेषकों का आकलन है कि निकट अवधि में ईटीएफ प्रवाह में आई नरमी के बावजूद व्यापक रुख सकारात्मक बना हुआ है। सबसे बड़ा सहारा केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी से मिल रहा है, जो खास तौर पर तब काफी बढ़ जाती है जब कीमतें इस दायरे में आती हैं। तकनीकी मोर्चे पर राहत तब मिल सकती है जब बाजार में शॉर्ट कवरिंग शुरू हो। बाजार के अनुमान के मुताबिक सीटीए 4,092 डॉलर प्रति औंस से ऊपर निकलते ही अपने शॉर्ट सौदे काटना शुरू करेंगे, जिससे कीमतों को दोबारा रफ्तार मिल सकती है। पिछले हफ्ते की तेज गिरावट के बाद सोने ने 3,975 डॉलर का स्तर छुआ था, जो अगस्त के बाद का सबसे निचला स्तर रहा है। सोमवार को सोने में मामूली बढ़त दर्ज की गई और पश्चिम एशिया में तनाव घटाने के कूटनीतिक प्रयासों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने बुलियन को सहारा दिया।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और डॉलर की कमजोरी
विदेशी मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है, जिससे अन्य प्रमुख मुद्राओं को बढ़त बनाने का अवसर मिला है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के स्तर से ऊपर टिका रहा। डॉलर में नए सिरे से आई बिकवाली के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर सोमवार की शुरुआत में एक महीने के उच्च स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार आ रही गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी ने डॉलर की तीन सप्ताह के निचले स्तर से उबरने की कोशिशों पर रोक लगा दी है। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दे रही हैं, हालांकि मंगलवार से शुरू हो रही दो दिवसीय अमेरिकी फेडरल रिजर्व की एफओएमसी बैठक से पहले ऊपर की ओर बढ़त सीमित दिख रही है।
दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के जोड़े में एशियाई सत्र के दौरान नए बिकवाल सक्रिय हो गए। शुक्रवार को 18 सितंबर के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इस जोड़ी की रिकवरी अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के चलते अटक गई। इसके अलावा बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख से येन को मजबूती मिल रही है, जिससे इस मुद्रा जोड़ी पर लगातार दबाव बना हुआ है। हालांकि इस हफ्ते के अंत में होने वाली अमेरिकी फेड और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठकों को देखते हुए नीचे की तरफ गिरावट भी सीमित बनी हुई है।
बिटकॉइन पर दबाव और केंद्रीय बैंकों का बड़ा हफ्ता
डिजिटल एसेट बाजार में भी सुस्ती का दौर बरकरार है। लगातार तीन हफ्तों के करेक्शन के बाद सोमवार को बिटकॉइन 80,500 डॉलर के आसपास घूमता रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी से महंगाई की चिंताएं बढ़ रही हैं, जिसने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कमजोर किया है। जोखिम भरी संपत्तियों से निवेशक सावधानी बरत रहे हैं, जिससे क्रिप्टोकरेंसी बाजार में ठहराव की स्थिति बनी हुई है।
अक्टूबर का यह अंतिम पूरा हफ्ता वित्तीय बाजारों के लिहाज से बेहद व्यस्त रहने वाला है। दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें पांच प्रमुख केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों पर टिकी होंगी। इनमें रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड, बैंक ऑफ कनाडा, फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान शामिल हैं। इसके साथ ही ब्रिटेन के ऑटम बजट और ऑस्ट्रेलियाई मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर भी पैनी नजर रखी जाएगी। कॉर्पोरेट मोर्चे पर तीसरी तिमाही के नतीजों का बड़ा दौर चल रहा है, जहां एसएंडपी 500 इंडेक्स की लगभग 36 प्रतिशत कंपनियां अपने वित्तीय नतीजे पेश करने जा रही हैं।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और मौद्रिक नीति की दिशा
अमेरिकी डॉलर के लिए 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले का समय अत्यंत निर्णायक साबित होने वाला है। वित्तीय बाजार जहां दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं, वहीं अमेरिकी कांग्रेस पर नियंत्रण की राजनीतिक लड़ाई राजकोषीय नीति से जुड़ी उम्मीदों को पूरी तरह बदल सकती है। यह राजनीतिक समीकरण परोक्ष रूप से 2027 में अमेरिकी मौद्रिक नीति के भविष्य के रास्ते को भी एक नया आकार देने की क्षमता रखता है।

















