वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए अक्टूबर का अंतिम सप्ताह अत्यधिक हलचल भरा साबित हो रहा है, जहां प्रमुख केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों, कमोडिटी में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक गतिविधियों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) द्वारा सितंबर महीने में 25 आधार अंकों (बीपीएस) की बढ़ोतरी के बाद ब्याज दरों को 2.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। यूरोज़ोन में नियंत्रित बुनियादी मुद्रास्फीति और वित्तीय परिस्थितियों में आई सख्ती ने नीति निर्माताओं को इंतजार करने और मौजूदा आर्थिक रुझानों का आकलन करने का पर्याप्त अवसर दिया है। इसके बावजूद, लचीली आर्थिक गतिविधियों और मुद्रास्फीति के लंबे समय तक लक्ष्य से ऊपर बने रहने के अनुमानों के कारण दिसंबर महीने में दरों को बढ़ाकर 2.75 प्रतिशत किए जाने की 75 प्रतिशत संभावना अभी भी बनी हुई है।
फ्रांस का बॉन्ड संकट और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की रणनीति
ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड की आगामी प्रेस कॉन्फ्रेंस में फ्रांस के बॉन्ड बाजार की उथल-पुथल का मुद्दा पूरी तरह से हावी रहने के आसार हैं। फ्रांस के डेट मार्केट में मची हलचल ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि नीति निर्माता आंतरिक बाजार तनाव और क्षेत्रीय मुद्रास्फीति के बीच कैसे संतुलन बनाएंगे। नीति निर्माताओं के पास फिलहाल दरों में तुरंत बदलाव न करने का लचीलापन है, लेकिन यदि फ्रांस की बॉन्ड यील्ड्स में अस्थिरता और बढ़ती है, तो इसका असर पूरे यूरोज़ोन की वित्तीय स्थिरता पर पड़ सकता है। इसी वजह से बाजार भागीदार लेगार्ड के हर बयान पर पैनी नजर गड़ाए हुए हैं ताकि आने वाले महीनों के नीतिगत संकेत समझ सकें।
अमेरिकी डॉलर पर दबाव और बॉन्ड यील्ड्स में नरमी
अमेरिकी डॉलर के मोर्चे पर बिकवाली का नया दौर देखने को मिला है, जिसने प्रमुख करेंसी जोड़ों को प्रभावित किया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई हल्की गिरावट के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में और कमी आई है, जिसने तीन सप्ताह के निचले स्तर से उबर रहे डॉलर की गति को रोक दिया है। 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले डॉलर एक बेहद नाजुक और निर्णायक दौर का सामना कर रहा है। वित्तीय बाजार दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस पर नियंत्रण की राजनीतिक लड़ाई राजकोषीय नीति की उम्मीदों को नया रूप दे सकती है। यह राजनीतिक समीकरण अप्रत्यक्ष रूप से वर्ष 2027 में अमेरिकी मौद्रिक नीति की भावी दिशा को भी बदल सकता है।
एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन
सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के स्तर से ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। डॉलर में आई कमजोरी के चलते यह जोड़ी एक महीने के उच्च स्तर के करीब कारोबार करती रही। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) द्वारा नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने के दांव से ऑस्ट्रेलियाई करेंसी को अतिरिक्त सहारा मिला। हालांकि, मंगलवार से शुरू होने वाली दो-दिवसीय एफओएमसी बैठक के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त सीमित बनी हुई है। दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी में सोमवार को एशियाई सत्र के दौरान नए सिरे से बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार को छुए गए 18 सितंबर के बाद के सबसे निचले स्तर से इस जोड़ी की रिकवरी थम गई, क्योंकि अमेरिकी यील्ड्स में गिरावट ने डॉलर पर दबाव बनाए रखा। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) के सख्त रुख से जापानी येन को मजबूती मिली है, हालांकि इस सप्ताह फेड और बीओजे की बैठकों को देखते हुए बड़ी गिरावट भी थमी हुई है।
सोने में स्थिरता और बिटकॉइन पर दबाव
कमोडिटी और डिजिटल एसेट्स के बाजार में भी महत्वपूर्ण रुझान सामने आए हैं। सोना (XAU/USD) सोमवार को मामूली बढ़त को संभालता दिखा। पिछले सप्ताह आई तेज गिरावट के बाद सोने की कीमत 3,975 डॉलर तक फिसल गई थी, जो अगस्त के बाद का इसका सबसे निचला स्तर था। मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए जारी कूटनीतिक प्रयासों पर बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने सोने की कीमतों को आधार प्रदान किया है। दूसरी तरफ, बिटकॉइन सोमवार को 80,500 डॉलर के आसपास मंडराता नजर आया। पिछले लगातार तीन हफ्तों के करेक्शन के बाद क्रिप्टो बाजार संभलने की कोशिश कर रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों से कच्चे तेल के दाम चढ़ने से मुद्रास्फीति की चिंताएं फिर भड़की हैं, जिससे जोखिम भरी संपत्तियों के प्रति निवेशकों का रुझान कमजोर हुआ है।
केंद्रीय बैंकों के फैसले और अर्निंग्स सीजन
अक्टूबर का यह अंतिम पूरा हफ्ता कई बड़े घटनाक्रमों से भरा हुआ है। दुनिया भर के पांच प्रमुख केंद्रीय बैंकों पर बाजार का ध्यान केंद्रित रहने वाला है, जिनमें रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड (आरबीएनजेड), बैंक ऑफ कनाडा (बीओसी), फेडरल रिजर्व (फेड), यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) और बैंक ऑफ जापान (बीओजे) शामिल हैं। इसके अलावा, यूनाइटेड किंगडम का ऑटम बजट, ऑस्ट्रेलिया के मुद्रास्फीति आंकड़े और तीसरी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों का भारी दबाव बाजार की दिशा तय करेगा। इस सप्ताह एसएंडपी 500 इंडेक्स की 36 प्रतिशत कंपनियां अपनी तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे पेश करने जा रही हैं, जो इक्विटी और करेंसी मार्केट्स के लिए नई दिशा तय करेंगे।


















