पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी रहे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और आधिकारिक चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने मामले में चुनाव आयोग (ECI) की भूमिका और कार्रवाई की गति पर ध्यान केंद्रित करते हुए आयोग के वकील से स्पष्ट निर्देश लाने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने चुनाव आयोग से सवाल किया कि दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विवाद की याचिका पर कितने समय के भीतर अंतिम फैसला लिया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी वाली पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा। अदालत ने चुनाव आयोग के वकील को यह निर्देश दिया कि वे आयोग से बातचीत कर समयसीमा के संबंध में कोर्ट को सूचित करें। इस मामले पर अगली सुनवाई अब सोमवार को होगी।
गुटबाज़ी के बाद चुनाव आयोग का फैसला
गौरतलब है कि पार्टी के भीतर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुटों के बीच शुरू हुई राजनीतिक खींचतान के बाद मामला चुनाव आयोग पहुंचा था। दोनों पक्षों द्वारा पार्टी पर अपने-अपने दावे पेश किए जाने के बाद ECI ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर 'TMC' नाम और उसके पारंपरिक चुनाव निशान के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। आयोग के इस फैसले के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने शीर्ष अदालत का रुख कर इस कदम को चुनौती दी थी।
उपचुनावों से ठीक पहले बढ़ा कानूनी संकट
यह पूरा कानूनी विवाद नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में होने जा रहे उपचुनावों के ठीक पहले उभरा है। नाम और निशान फ्रीज होने के बाद ममता बनर्जी गुट को उपचुनावों के लिए नया नाम और नया चुनाव चिन्ह जारी करना पड़ा है, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री ने खुद तैयार किया है। फिलहाल दोनों ही गुट आगामी उपचुनावों में अस्थाई पहचान के साथ उतर रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट सोमवार को इस पर आगे का रुख तय करेगा।
























