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उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 से पहले नरेंद्र मोदी की रणनीति, योगी आदित्यनाथ और अमित शाह के साथ बैठकों का दौर शुरूराजनीति
26 सित॰ 2026, 11:39 pm (30 दिन पहले)· 1

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 से पहले नरेंद्र मोदी की रणनीति, योगी आदित्यनाथ और अमित शाह के साथ बैठकों का दौर शुरू

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह की बैठकों के जरिए पार्टी ने एकजुटता का संदेश दिया है।

देश के सबसे बड़े राजनीतिक मैदान यानी उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। साल 2024 के आम चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरणों में आए बदलावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शीर्ष नेतृत्व और राज्य के नेताओं के बीच बैठकों का दौर शुरू हो चुका है, जिससे यह साफ संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि पार्टी पूरी तरह से एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेगी। हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में हुई बैठकों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकों का दौर और एकजुटता का संदेश

दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक के अलावा गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ भी विचार-विमर्श किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन मुलाकातों का मुख्य उद्देश्य संगठन के भीतर किसी भी तरह के मतभेद की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करना है। पिछले कुछ समय से राजनीतिक हलकों में विभिन्न चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व और राज्य के मुख्यमंत्री ने एक साथ आकर यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी का एकमात्र लक्ष्य आगामी चुनावों में विजय हासिल करना है।

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राज्यसभा और एमएलसी चुनावों का लिटमस टेस्ट

विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई अन्य मोर्चों पर भी मुकाबला शुरू होने वाला है। निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में घोषित किए गए राज्यसभा और विधान परिषद यानी एमएलसी चुनावों की तारीखों ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। आगामी 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव और उसके तुरंत बाद होने वाले विधान परिषद के चुनाव मुख्य राजनीतिक दलों के लिए अपनी ताकत दिखाने का पहला बड़ा अवसर साबित होंगे। इन चुनावों के जरिए सभी दल विधानसभा चुनाव से पहले अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुट गए हैं।

विपक्षी दलों की तैयारियां और पीडीए रथ

दूसरी तरफ विपक्षी खेमे में भी चुनावी सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने रायबरेली से अपने पीडीए रथ को हरी झंडी दिखाकर मैदान संभाल लिया है और लगातार जनता के बीच संपर्क साध रहे हैं। हालांकि राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि विपक्षी दलों के बीच सीटों के तालमेल और रणनीतिक तालमेल को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी भी राज्य के राजनीतिक समीकरणों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अलग-अलग रणनीतियों पर काम कर रहे हैं, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प होता जा रहा है।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव कब होने हैं?
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव वर्ष 2027 में प्रस्तावित है।
हाल ही में दिल्ली में किन नेताओं के बीच बैठक हुई?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह के बीच उच्चस्तरीय बैठकें हुई हैं।
राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान कब होगा?
राज्यसभा की रिक्त सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा।
सपा प्रमुख द्वारा कौन सा अभियान शुरू किया गया है?
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने रायबरेली से अपने पीडीए रथ के साथ जनसंपर्क अभियान शुरू किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·30 दिन पहले

चुनाव से पहले इतनी बैठकें और रणनीति देखकर समझ आता है कि मुकाबला कड़ा होने वाला है। क्या विपक्ष की आपसी खींचतान इस बार भी बीजेपी का काम आसान कर देगी या इस बार तस्वीर कुछ अलग होगी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 दिन पहले

यूपी चुनाव से पहले बैठकों का दौर शुरू हो गया है, मुकाबला कड़ा होने वाला है।

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·30 दिन पहले

करण भाई, मुकाबला तो कड़ा होगा ही, पर क्या इन बैठकों से सचमुच अंदरूनी खींचतान पूरी तरह थप जाएगी?

Ravikash Gupta@ravikash·30 दिन पहले

यूपी चुनाव से पहले बीजेपी ने अभी से डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। मोदी, शाह और योगी की ये बैठकें बता रही हैं कि पार्टी 2027 को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती, खासकर लोकसभा नतीजों के बाद।

Rohan Verma@rohan-verma·30 दिन पहले

रविकेश जी, आपकी बात सही है। जब मैं पिछले महीने लखनऊ गया था, तब भी कार्यकर्ताओं में लोकसभा के नतीजों को लेकर सुस्ती दिख रही थी, इसलिए अब डैमेज कंट्रोल ज़रूरी था।

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