15 अगस्त 2026 को कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन के दौरान हुई घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बेहद तेज हो गया है। इस मामले में 18 अगस्त 2026 को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना करते हुए विपक्ष को सीधी चुनौती दी कि अगर वे इतने ही बेचैन हैं, तो उन्हें बहाने बनाने के बजाय चुनावी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराना चाहिए।
वंदे मातरम गायन और सोनिया गांधी पर उठे सवाल
रविशंकर प्रसाद ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में हुई घटना को बेहद शर्मनाक करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान ऐसा दिखाई दिया जैसे कांग्रेस नेता सोनिया गांधी वंदे मातरम के पूरे गायन पर अपनी आपत्ति जता रही थीं। इस दौरान जब कांग्रेस की ओर से सफाई दी गई कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था की जा रही थी, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस स्पष्टीकरण को पूरी तरह से बकवास बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह दलील किसी भी तरह से संतोषजनक उत्तर नहीं देती है और मामले की गंभीरता को कम नहीं कर सकती।
विपक्ष को सीधी चुनौती और वोट बैंक की राजनीति का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने सवाल पूछे, तो रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी नेताओं के रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, "भैया यदि इतने व्यग्र हो तो मोदी जी को चुनाव में हरा दो न... क्या फर्क पड़ता है, वे तो कह रहे हैं कि शांति से बैठ जाएंगे।" उन्होंने आगे जोड़ा कि देश की जनता को अब विपक्षी गठबंधन और कांग्रेस पर बिल्कुल भरोसा नहीं रहा है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि मुस्लिम वोट बैंक को साधे रखने के दबाव में कांग्रेस पार्टी राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर किसी भी हद तक गिरने को तैयार हो गई है।
स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत पर एकाधिकार का दावा छोड़ने की मांग
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए रविशंकर प्रसाद ने केवल 15 अगस्त की घटना का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि कांग्रेस पार्टी के एक अन्य हालिया कार्यक्रम की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के गोवा दौरे के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में भी वंदे मातरम की केवल दो पंक्तियां ही गाई गई थीं। उन्होंने कहा कि यह किसी एक स्थान की अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की वैचारिक सोच को उजागर करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कांग्रेस पार्टी इसी तरह से राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीत का अनादर करती रही, तो उसे देश के स्वतंत्रता आंदोलन की एकमात्र विरासत होने का दावा करना तुरंत बंद कर देना चाहिए।



















