पंजाब के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) नेता संजीव अरोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का दायरा अब औद्योगिक जमीन के इस्तेमाल तक पहुंच गया है। एजेंसी पड़ताल कर रही है कि उद्योग लगाने के लिए रियायती दर पर मिली जमीन को किस तरह रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में तब्दील कर सैकड़ों करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई। ED सूत्रों का कहना है कि पंजाब सरकार ने यह जमीन उद्योग स्थापित करने की शर्त पर सस्ती दर में दी थी और कंपनी को इसके अलावा भी कई तरह की छूट दी गई थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपों के केंद्र में हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड नाम की कंपनी है, जो पहले रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RPIL) के नाम से जानी जाती थी। ED का कहना है कि इस कंपनी ने जमीन आवंटन के वक्त तय की गई शर्तों को दरकिनार कर उस पर रिहायशी और कमर्शियल प्रोजेक्ट खड़े कर दिए, जबकि नियमों के मुताबिक ऐसा करने से पहले कई शर्तें पूरी की जानी थीं।
2009 के समझौते की शर्तें टूटने का आरोप
जांच में सामने आया है कि पंजाब सरकार और आरपीआईएल के बीच 10 सितंबर 2009 को एक समझौता हुआ था। इस समझौते में साफ तौर पर लिखा गया था कि जमीन पर पहले इंडस्ट्री स्थापित की जाएगी और कम से कम 50 फीसदी इंडस्ट्रियल प्लॉट बेचे जाने के बाद ही आगे कदम बढ़ाया जा सकेगा। ED का आरोप है कि कंपनी ने इन शर्तों को पूरा किए बिना ही जमीन पर रियल एस्टेट गतिविधियां शुरू कर दीं। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि औद्योगिक इस्तेमाल की यह शर्त आखिर कैसे बदली गई और इस पूरी प्रक्रिया में किन सरकारी अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों की भूमिका रही। एजेंसी का मानना है कि बिना उचित मंजूरी के शर्तों में इस तरह का बदलाव अपने आप में एक बड़ी अनियमितता है, जिसकी तह तक जाना जरूरी है।
GLADA और RERA अधिकारियों से मिलीभगत का आरोप
ED के मुताबिक कंपनी को रिहायशी और कमर्शियल यूनिट विकसित करने और उन्हें बेचने की अनुमति GLADA और RERA के अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत के जरिए मिली। जांच एजेंसी अब यह भी खंगाल रही है कि इंडस्ट्रियल पार्क के लिए जरूरी RERA रजिस्ट्रेशन वास्तव में लिया भी गया था या नहीं। आरोप है कि जरूरी रजिस्ट्रेशन के बिना ही इंडस्ट्रियल प्लॉट का प्रचार किया गया और उन्हें बेचा जाता रहा। ED का कहना है कि इसी प्रक्रिया से अपराध के जरिए कमाया गया धन यानी प्रोसीड्स ऑफ क्राइम पैदा हुआ, जिसे बाद में अलग अलग माध्यमों से खपाया गया।
जमीन आवंटन से लेकर बिक्री तक पूरे नेटवर्क की पड़ताल
अब जांच एजेंसी जमीन के शुरुआती आवंटन से लेकर प्लॉट और प्रॉपर्टी की अंतिम बिक्री तक के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। इसमें कंपनी से जुड़े लोगों के अलावा उन सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है जिन्होंने कथित तौर पर शर्तों में बदलाव और मंजूरियों में मदद की। ED यह भी देख रही है कि इस पूरे खेल में और कौन कौन से लोग शामिल रहे और उन्हें किस तरह का फायदा पहुंचा। एजेंसी की कोशिश है कि पूरी चेन को कड़ी दर कड़ी जोड़कर असली जिम्मेदारों तक पहुंचा जाए।
100 करोड़ के GST फर्जीवाड़े से जुड़ाव की भी तलाश
गौरतलब है कि ED ने संजीव अरोड़ा को 9 मई 2026 को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के GST फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक उन पर आरोप है कि फर्जी इनवॉइस और शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर दुबई को आईफोन के फर्जी निर्यात दिखाए गए और इसके जरिए फंड की राउंड ट्रिपिंग की गई। अब ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जमीन से जुड़े इन कथित लेनदेन का पहले से चल रही GST फर्जीवाड़े की जांच से कोई सीधा संबंध तो नहीं है। अगर यह कनेक्शन साबित होता है, तो यह मामला एक बड़े और संगठित आर्थिक अपराध नेटवर्क की तरफ इशारा कर सकता है।



















