चित्तौड़गढ़ जिले में एक नन्हें बालक ने अपनी असाधारण प्रतिभा से देश भर में सुर्खियां बटोरी हैं। आमतौर पर इस कच्ची उम्र में बच्चे केवल अपने परिवार के सदस्यों को ही ठीक से पहचान पाते हैं, लेकिन चित्तौड़गढ़ के इस होनहार ने विज्ञान की दुनिया में एक अनोखा कारनामा कर दिखाया है। केवल 16 महीने की उम्र में विलोहित गौतम चाष्टा ने सिर्फ 1 मिनट 4 सेकंड के भीतर सौरमंडल के सभी 8 ग्रहों की एकदम सटीक पहचान पूरी कर ली है। इस अद्भुत उपलब्धि के बल पर उनका नाम प्रतिष्ठित इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया है।
इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में मिला खास सम्मान
इस अद्भुत और विलक्षण प्रतिभा को परखने के बाद संस्था ने उन्हें एक विशेष प्रमाण पत्र प्रदान किया है। इस प्रमाण पत्र में उन्हें वन इन ए मिलियन यानी लाखों में एक के विशिष्ट सम्मान से नवाजा गया है। विलोहित की काबिलियत सिर्फ अंतरिक्ष और ग्रहों के अध्ययन तक ही सीमित नहीं है। इतनी कम आयु में उनका मानसिक विकास असाधारण स्तर का है, जिसके चलते वे कई अन्य कठिन विषयों को भी आसानी से समझ लेते हैं।
विभिन्न विषयों में है गहरी समझ
इस नन्हें बच्चे की प्रतिभा का दायरा काफी विस्तृत है। वे न केवल सौरमंडल के सभी 8 ग्रहों को चुटकियों में पहचानते हैं, बल्कि भारत के विभिन्न राज्यों के नक्शे और उनके नाम भी आसानी से बता देते हैं। इसके अलावा, उन्हें गणितीय आकृतियों की सटीक जानकारी है तथा वे अंग्रेजी वर्णमाला और कई अन्य बुनियादी चित्रों को भी बिना किसी कठिनाई के पहचान लेते हैं।
माता-पिता का मार्गदर्शन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
विलोहित की इस शानदार कामयाबी के पीछे उनकी माता डॉक्टर किरण व्यास की कड़ी मेहनत और निरंतर मार्गदर्शन की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने खेल-खेल के माध्यम से ही इस बच्चे की छुपी हुई प्रतिभा को समय रहते पहचान लिया और उसे सही दिशा प्रदान की। विलोहित का मूल परिवार चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन का रहने वाला है। उनके पिता सिद्धार्थ चाष्टा पेशे से एक इंजीनियर हैं और वर्तमान में रावतभाटा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
प्रतिभा की पुरानी पारिवारिक परंपरा
इस परिवार में बौद्धिक क्षमता और उच्च शिक्षा का माहौल लंबे समय से चला आ रहा है। इससे पहले वर्ष 2022 में इसी परिवार की हिमाद्रि गौतम ने भी अपनी अद्वितीय प्रतिभा के दम पर कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज किए थे। अब नन्हे विलोहित ने परिवार की उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने क्षेत्र और पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।


















