राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में पंचायती राज चुनावों का माहौल पूरी तरह गर्माने लगा है। राजनीतिक दलों और स्थानीय संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता के साथ-साथ जिला प्रशासन ने भी मतदान की सभी आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सरपंच और वार्ड पंच के पदों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब ग्रामीण इलाकों में सियासी समीकरणों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि निर्वाचन आयोग की तरफ से अभी तक आधिकारिक चुनाव तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन प्रशासनिक अमले ने अपनी तरफ से पुख्ता बंदोबस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है ताकि समय रहते सारी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की जा सकें।
बैलेट पेपर से होगा मतदान और तैयार हो रहीं मतपेटियां
इस बार होने वाले इन स्थानीय चुनावों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की जगह पारंपरिक बैलेट पेपर के माध्यम से संपन्न कराया जाएगा। मतपत्रों से होने वाले इस मतदान के कारण मतपेटियों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने युद्ध स्तर पर मतपेटियों और अन्य चुनावी साजो-सामान को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है। शहर के इंदिरा गांधी स्टेडियम परिसर को मुख्य निर्वाचन स्टोर बनाया गया है, जहां से जिले के सभी बूथों के लिए सामग्री का वितरण किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए करीब 40 समर्पित कर्मचारियों की एक टीम को अलग-अलग कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हजारों की संख्या में तैयार हो रही हैं बड़ी और छोटी मतपेटियां
चित्तौड़गढ़ जिले के अंतर्गत कुल 359 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए मतदान होना है, जिसके लिए लगभग 1131 मतदान केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इतने बड़े भौगोलिक और मतदाताओं के दायरे में चुनाव कराने के लिए प्रशासन को भारी मात्रा में मतपेटियों की आवश्यकता है। निर्वाचन स्टोर में कुल 1200 बड़ी और 900 छोटी मतपेटियों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इन बक्से नुमा मतपेटियों की केवल गिनती ही नहीं हो रही, बल्कि उनकी पूरी तरह से साफ-सफाई, उनके तालों की जांच, ग्रीसिंग और ऑयलिंग का काम भी बारीकी से किया जा रहा है ताकि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा सामने न आए।
प्रशासन की कार्ययोजना और मैदान में सक्रिय हुए उम्मीदवार
अब तक के प्रशासनिक कार्यों में लगभग 975 बड़ी मतपेटियों को पूरी तरह से तैयार करके उपयोग के योग्य बना दिया गया है, जबकि बाकी बची हुई पेटियों को भी लगातार दुरुस्त किया जा रहा है। प्रशासनिक रूपरेखा के अनुसार, मतदान के समय प्रत्येक मतदान दल के साथ सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से दो बड़ी और एक छोटी मतपेटी भेजी जाएगी ताकि किसी भी बूथ पर मतपेटी की कमी न खले। दूसरी तरफ, आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद गांवों में संभावित दावेदारों ने भी जनसंपर्क साधना शुरू कर दिया है। तारीखों के ऐलान से पहले ही ग्रामीण अंचलों में चौपालों पर चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और हर कोई अपनी जीत के समीकरण तलाशने में जुट गया है।


















