राजस्थान में बीते कई दिनों से सुस्त पड़ा मानसून अब आखिरकार करवट लेने के मूड में नजर आ रहा है. मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 16 जुलाई से प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश की गतिविधियां थोड़ी बढ़ सकती हैं, लेकिन असली राहत के लिए लोगों को अभी 20 जुलाई तक इंतजार करना होगा. तब तक राज्य के बड़े हिस्से में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा और सिर्फ चुनिंदा जिलों में ही हल्की फुहारें पड़ने के आसार हैं. बीते कुछ हफ्तों से मानसून की सुस्त चाल की वजह से खेतों में नमी की कमी और उमस भरी गर्मी दोनों ने आम लोगों को परेशान कर रखा था, ऐसे में मौसम विभाग की यह ताजा जानकारी छोटी ही सही, मगर राहत की उम्मीद जरूर जगाती है.
आज कहां-कहां हो सकती है हल्की बारिश
जयपुर मौसम केन्द्र के अनुसार आज उदयपुर और जोधपुर संभाग के कुछ हिस्सों के साथ-साथ श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, झुंझुनूं और अलवर जिलों में भी बूंदाबांदी या हल्की बारिश दर्ज हो सकती है. इसके अलावा जयपुर, भरतपुर और बीकानेर संभाग के कुछ स्थानों पर भी छिटपुट बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम केन्द्र ने साफ किया है कि फिलहाल कहीं भी व्यापक स्तर पर तेज या भारी बारिश के संकेत नहीं मिल रहे, यानी आज का मौसम ज्यादातर हल्की राहत तक ही सीमित रहेगा. बाकी बचे जिलों में दिनभर उमस और गर्मी बने रहने का अनुमान है, क्योंकि वहां मानसून की सक्रियता अभी भी बेहद कमजोर है. यानी जिन जिलों का नाम आज की सूची में नहीं है, वहां के लोगों को अभी कुछ और दिन गर्मी और उमस के साथ ही गुजारने पड़ सकते हैं.
20 जुलाई के बाद मौसम क्यों बदलेगा
मौसम विभाग ने इस हल्की राहत के पीछे दो बड़ी वजहें गिनाई हैं. पहली, उत्तर गुजरात और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर समुद्र तल से 3.1 से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जो नमी को खींचकर बारिश की परिस्थितियां बना रहा है. दूसरी वजह यह है कि 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है. पश्चिमी विक्षोभ ऐसी मौसम प्रणालियां होती हैं जो आमतौर पर उत्तर भारत के मौसम में अचानक बदलाव लाती हैं और बारिश या हवाओं की रफ्तार बढ़ाने का काम करती हैं. जब यह दोनों मौसम प्रणालियां एक साथ असर दिखाना शुरू करेंगी, तो 20 जुलाई के बाद राजस्थान में मानसून फिर से मजबूत हो सकता है. मौसम विभाग का यह भी कहना है कि इस दौरान बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी भी मानसून को नई ताकत देगी, जिससे बारिश का दायरा धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में फैल सकता है.
मानसून ट्रफ और बंगाल की खाड़ी के लो प्रेशर का असर
आईएमडी के अनुसार इस समय समुद्र तल पर सक्रिय मानसून ट्रफ जम्मू, देहरादून, शाहजहांपुर, बस्ती, पटना और बांकुड़ा से होकर गुजर रही है. यहां से आगे बढ़ते हुए यह ट्रफ उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तर ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बने निम्न दबाव क्षेत्र के केंद्र से होते हुए पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी की तरफ बढ़ रही है. इस पूरी मौसम प्रणाली का सबसे ज्यादा असर पूर्वी और मध्य भारत में देखने को मिलेगा, जहां बारिश की गतिविधियां लगातार बनी रहेंगी. राजस्थान चूंकि इस ट्रफ के मुख्य रास्ते से थोड़ा हटकर है, इसलिए यहां इसका असर फिलहाल सीमित ही रहेगा. यही वजह है कि प्रदेश के ज्यादातर जिलों में अभी बड़ी बारिश के बजाय सिर्फ छिटपुट फुहारें ही दर्ज हो रही हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो मानसून की मुख्य धारा अभी पूर्वी भारत की तरफ ज्यादा सक्रिय है और राजस्थान तक इसका पूरा फायदा पहुंचने में अभी कुछ समय लगेगा.
21 से 24 जुलाई के बीच इन जिलों में अच्छी बारिश की उम्मीद
मौसम विभाग के मुताबिक अगर बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया मौसम तंत्र मध्य भारत की दिशा में आगे बढ़ता है, तो 20 जुलाई के बाद राजस्थान में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है. इसके पहले संकेत 21 जुलाई के आसपास दिखने शुरू होंगे, जब जयपुर, डीडवाना-कुचामन, कोटा, भरतपुर, उदयपुर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है. इसके बाद 22 से 24 जुलाई के बीच जोधपुर, बीकानेर, नागौर, अजमेर, जयपुर, कोटा, उदयपुर, फलोदी और जैसलमेर सहित कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज हो सकती है. यानी पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान, दोनों ही हिस्सों को इस दौर में बारिश का फायदा मिल सकता है. हालांकि मौसम विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि यह पूर्वानुमान फिलहाल मौजूद मौसम प्रणालियों की मौजूदा चाल पर आधारित है, इसलिए अगर इनका रास्ता बदलता है तो तारीखों और इलाकों में भी बदलाव मुमकिन है. यानी लोगों को इसे संभावित रुझान की तरह ही देखना चाहिए, न कि पक्के कार्यक्रम की तरह.
पश्चिमी राजस्थान में धूल भरी आंधी की आशंका
बारिश के इस पूरे घटनाक्रम के बीच पश्चिमी राजस्थान के लिए एक अलग चेतावनी भी सामने आई है. मौसम विभाग के अनुसार 16, 17 और 20 जुलाई को इस इलाके में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी तेज हवाएं चल सकती हैं. हालांकि फिलहाल इसे लेकर कोई गंभीर या रेड अलर्ट स्तर की चेतावनी जारी नहीं की गई है, इसलिए यह सामान्य मौसमी हलचल के दायरे में ही आती है. इसके बावजूद खुले इलाकों में रहने वाले लोगों और किसानों को खेतों में काम करते वक्त सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि तेज धूल भरी हवाएं दृश्यता और सामान्य गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं. वाहन चालकों को भी इन दिनों हाईवे पर सामान्य से थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी, क्योंकि धूल भरी हवाओं के दौरान अचानक दृश्यता कम हो सकती है.
किसानों के लिए राहत की उम्मीद
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अनुमान के मुताबिक 21 से 24 जुलाई के बीच अच्छी बारिश होती है, तो इसका सबसे ज्यादा फायदा खरीफ की फसलों को मिलेगा. इस समय खेतों को नमी की सख्त जरूरत है, और लगातार कमजोर मानसून की वजह से कई इलाकों में बुवाई और फसल की बढ़वार पर असर पड़ने का खतरा बना हुआ था. अगर पूर्वानुमान के मुताबिक बारिश होती है, तो सिर्फ किसानों को ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी बढ़ती गर्मी और उमस से राहत मिलेगी. फिलहाल स्थिति यह है कि राजस्थान का मौसम एक तरह के इंतजार के दौर से गुजर रहा है, जहां अगले चार-पांच दिन ज्यादातर शुष्क रहेंगे, लेकिन 20 जुलाई के बाद बड़ा बदलाव आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है. कुल मिलाकर आने वाला हफ्ता राजस्थान के मौसम के लिहाज से टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है, बशर्ते मौसम प्रणालियां अनुमान के मुताबिक ही आगे बढ़ें.











