राजस्थान के पाली जिले के आऊवा गांव से एक बड़ी और डराने वाली खबर सामने आई है। यहां स्थित एक सरकारी स्कूल में रात के समय अचानक एक कमरे की छत भरभराकर नीचे गिर गई। गनीमत यह रही कि यह भयानक हादसा रात के वक्त हुआ, जब स्कूल पूरी तरह खाली था। इस वजह से कोई बड़ी अनहोनी टल गई और किसी भी बच्चे या स्टाफ को शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा। सुबह जब स्कूल के कर्मचारी और शिक्षक वहां पहुंचे, तो वे मलबे को देखकर दंग रह गए। इस हादसे में स्कूल का महत्वपूर्ण पुराना रिकॉर्ड, जरूरी दस्तावेज और बच्चों की किताबें मलबे के नीचे दबकर नष्ट हो गईं। मासूम बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है और स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कलेक्टर का सख्त रुख और प्रशासनिक मुस्तैदी
इस खतरनाक हादसे को बेहद गंभीरता से लेते हुए पाली के जिला कलेक्टर डॉ. रविंद्र गोस्वामी ने तत्काल कड़ा एक्शन लिया है। उन्होंने पूरे जिले के सभी सरकारी स्कूलों का नए सिरे से सघन और व्यापक सुरक्षा सर्वे कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। कलेक्टर के इस कड़े रुख के बाद मारवाड़ जंक्शन के SDM ने बिना किसी देरी के ब्लॉक स्तर पर विशेष जांच टीमों का गठन कर उन्हें फील्ड में उतार दिया है। इन टीमों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक सरकारी स्कूल भवन का बारीकी से निरीक्षण करें और उसकी भौतिक स्थिति पर जल्द से जल्द एक विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपें ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके।
सघन निरीक्षण के बाद असुरक्षित कमरे किए गए सील
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी सक्रिय हो गए। SDM महावीरसिंह जोधा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (CDEO) राहुलसिंह राजपुरोहित और PWD की सहायक अभियंता नूतन गहलोत समेत अधिकारियों का एक दल मौके पर पहुंचा। टीम ने स्कूल परिसर के सभी 27 कमरों का गहराई से मुआयना किया। जांच में पाया गया कि इनमें से 11 कमरे अत्यंत जर्जर, खोखले और बच्चों के बैठने के लिए पूरी तरह असुरक्षित थे। बच्चों की जान जोखिम में न डालते हुए अधिकारियों ने इन सभी 11 कमरों को तुरंत सील करने के आदेश दे दिए।
स्कूल का डरावना इतिहास और ध्वस्त करने का प्रस्ताव
इस स्कूल के साथ सुरक्षा की यह कोई पहली चूक नहीं है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस स्कूल भवन का कोई हिस्सा गिरने की यह तीसरी घटना है। लगातार हो रहे इन हादसों से स्कूल प्रशासन की लापरवाही भी उजागर होती है। सुरक्षा कारणों से पिछले साल भी इस स्कूल के 5 कमरों को बंद कर दिया गया था। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रामलाल प्रजापत ने इस संबंध में बताया कि अब इन बेहद जर्जर और खतरनाक हो चुके कमरों को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे जल्द ही उच्च अधिकारियों के पास मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है।
गर्ल्स स्कूल और कॉलेज भवनों में भी जर्जर हालत का खुलासा
कलेक्टर के निर्देशों के तहत कार्रवाई का दायरा केवल ग्रामीण इलाकों तक ही सीमित नहीं रहा। मारवाड़ जंक्शन नगर पालिका के EO विक्रम सिंह राठौड़ ने भी शहरी क्षेत्र के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सरकारी बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय (गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सैकंडरी स्कूल) में सुरक्षा की बेहद गंभीर स्थिति सामने आई। यहां कुल 17 कमरों में से 10 कमरों की छतें और एक बड़ा सभा भवन (हॉल) पूरी तरह से जर्जर हालत में मिले। बारिश के दिनों में इन छतों से पानी टपकता है, जो छात्राओं की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। इसके अतिरिक्त स्थानीय कॉलेज और कुछ अन्य स्कूलों के भी 5 कमरे आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पाए गए हैं।
कमरे सील होने से बच्चों की पढ़ाई पर गहराया संकट
प्रशासन ने बच्चों की जान बचाने के लिए खतरनाक कमरों पर ताले तो लटका दिए हैं, लेकिन इस तात्कालिक कदम ने स्कूलों के सामने जगह की एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। कई विद्यालयों में बड़ी संख्या में कमरे बंद हो जाने के कारण छात्रों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं रह गई है। जगह की भारी कमी के कारण विवश होकर बच्चों को एक ही कमरे में ठूंस-ठूंस कर बैठाया जा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि कई स्कूलों में एक ही कमरे में एक साथ तीन-तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इससे शोर और अव्यवस्था का माहौल बनता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। इस बदहाली को देखकर अब बच्चों के अभिभावक भी बेहद चिंतित हैं और वे जल्द से जल्द सुरक्षित नए कमरों के निर्माण की मांग कर रहे हैं।











