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कश्मीर के स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में किताबों की गहन जांच, प्रशासन ने जारी किया नया फरमानजम्मू-कश्मीर
1 घंटे पहले· 2

कश्मीर के स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में किताबों की गहन जांच, प्रशासन ने जारी किया नया फरमान

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने घाटी के सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए किताबों की स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी है। अब स्कूलों और कोचिंग सेंटरों को लिखित में यह पुष्टि करनी होगी कि उनके परिसर में कोई भी विवादित या आपत्तिजनक सामग्री मौजूद नहीं है।

अर्शदीप अहलूवालियाअर्शदीप अहलूवालियावरिष्ठ संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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जम्मू-कश्मीर सरकार ने कश्मीर घाटी में स्थित समस्त विद्यालयों और कोचिंग केंद्रों को लेकर एक अत्यंत कड़ा निर्देश जारी किया है। इस नए सरकारी फरमान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षण संस्थानों में किसी भी प्रकार की विवादास्पद या सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाली सामग्री छात्रों तक न पहुंचे। स्कूल शिक्षा निदेशालय द्वारा लागू किए गए इस आदेश के तहत, अब प्रत्येक संस्थान को अपने पुस्तकालय, कक्षाओं और कार्यालयों में मौजूद हर पुस्तक की अत्यंत बारीकी से समीक्षा और जांच करनी होगी।

शैक्षणिक संस्थानों में सघन जांच प्रक्रिया

प्रशासन की ओर से जारी आदेश के बाद कश्मीर के सरकारी एवं निजी स्कूलों में एक हड़कंप जैसी स्थिति पैदा हो गई है। यह केवल एक सामान्य निर्देश नहीं है, बल्कि एक अनिवार्य प्रक्रिया है। आदेश के अनुसार, सभी स्कूल प्रमुखों को अपने संबंधित जोनल शिक्षा अधिकारी या मुख्य शिक्षा अधिकारी के समक्ष एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। इस प्रमाणपत्र के माध्यम से उन्हें यह लिखित गारंटी देनी होगी कि उनके संस्थान के भीतर ऐसी कोई भी सामग्री उपलब्ध नहीं है जो सरकारी नियमों के विरुद्ध हो। प्रशासन का तर्क है कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था।

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किस तरह की किताबों पर होगी सख्त कार्रवाई?

सरकार ने उन सामग्रियों को हटाने का स्पष्ट आदेश दिया है जो किसी भी समुदाय की धार्मिक संवेदनाओं को चोट पहुंचाती हैं। इसके अतिरिक्त, जो पुस्तकें देश के मौजूदा कानूनों का उल्लंघन करती हैं, राष्ट्रीय अखंडता के लिए हानिकारक हैं या अलगाववादी भावनाओं को हवा देती हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से परिसर से बाहर करना होगा। इस निर्णय की पृष्ठभूमि में हाल ही में भारतीय जनता पार्टी का वह विरोध प्रदर्शन भी माना जा रहा है, जिसमें कुछ शिक्षण संस्थानों में अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाली किताबों की खरीद पर आपत्ति जताई गई थी।

अनुशासन और कानूनी दायरे का विस्तार

इस आदेश का उल्लंघन करने वाले प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। ज्ञात हो कि लगभग एक वर्ष पूर्व जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग ने कश्मीर पर केंद्रित लगभग 25 विशिष्ट पुस्तकों के प्रकाशन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। उस सूची में अरुंधति रॉय और ए.जी. नूरानी जैसे चर्चित लेखकों की कृतियां भी सम्मिलित थीं, जिन पर अलगाववादी विचारधारा को प्रचारित करने का आरोप लगाया गया था। अब इसी तर्ज पर स्कूलों के भीतर भी व्यापक स्तर पर फिल्टरेशन की प्रक्रिया शुरू की गई है।

आदेश के दायरे में आने वाले संस्थान

यह सरकारी नियम कश्मीर डिवीजन के उन सभी संस्थानों पर प्रभावी रूप से लागू होगा जो वहां के शैक्षणिक ढांचे का हिस्सा हैं। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, घाटी में कुल 10,787 सरकारी स्कूल और 2,386 मान्यता प्राप्त निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन सभी संस्थानों को अब अपने परिसर की किताबों का संपूर्ण रिकॉर्ड खंगालना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे पूरी तरह से सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप हों। जहां एक ओर इसे सुरक्षा के नजरिए से देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में विचारों की स्वतंत्रता और इतिहास के स्वरूप को लेकर बहस भी शुरू हो गई है।

इसका आप पर असर

भारत में: शैक्षणिक संस्थानों में सामग्री के चयन और संपादन को लेकर नई जवाबदेही तय हो सकती है।

कश्मीर में: घाटी के स्कूलों और कोचिंग सेंटरों को तुरंत अपनी लाइब्रेरी की जांच कर अनुपालन प्रमाण पत्र जमा करना होगा।

सवाल-जवाब

कश्मीर प्रशासन का नया आदेश क्या है?
प्रशासन ने सभी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों को अपने परिसर में मौजूद किताबों की गहन जांच करने और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया है।
संस्थानों को क्या करना होगा?
प्रत्येक संस्थान को अपने मुख्य शिक्षा अधिकारी के पास लिखित में प्रमाण पत्र जमा करना होगा कि उनके पास कोई भी विवादित किताब उपलब्ध नहीं है।
किन किताबों पर पाबंदी लग सकती है?
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली, अलगाववाद को बढ़ावा देने वाली या राष्ट्रीय हितों के खिलाफ जाने वाली सामग्री पर कार्रवाई होगी।
यह आदेश कितने संस्थानों पर लागू होगा?
यह नियम कश्मीर डिवीजन के 10,787 सरकारी और 2,386 मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर लागू होगा।
अर्शदीप अहलूवालिया
लेखक के बारे मेंअर्शदीप अहलूवालियावरिष्ठ संवाददाता चंडीगढ़
विशेषज्ञताक्षेत्रीय समाचार, पंजाब समाचार, हरियाणा समाचार, हिमाचल प्रदेश समाचार, उत्तराखंड समाचार, राजनीति, शासन, बुनियादी ढाँचा, कृषि, सामाजिक मुद्दे, ब्रेकिंग न्यूज़

अर्शदीप अहलूवालिया एक क्षेत्रीय संवाददाता हैं जो पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को कवर करते हैं। वे उत्तर भारत की ब्रेकिंग न्यूज़, क्षेत्रीय राजनीति, सामाजिक मुद्दों, बुनियादी ढाँचे और सांस्कृतिक घटनाक्रमों पर रिपोर्ट करते हैं।

अर्शदीप अहलूवालिया एक क्षेत्रीय संवाददाता हैं जो पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की ख़बरों की कवरेज में विशेषज्ञता रखते हैं। वे उत्तर भारत के ब्रेकिंग क्षेत्रीय घटनाक्रम, राजनीति, शासन, कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं, कृषि, मौसम के असर और सांस्कृतिक आयोजनों पर रिपोर्ट करते हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग और तथ्यपरक कहानी कहने पर मज़बूत ज़ोर के साथ अर्शदीप स्थानीय समुदायों और राज्य-स्तरीय नीतियों को प्रभावित करने वाले मुद्दों की समय पर व गहन कवरेज देते हैं। उनकी रिपोर्टिंग क्षेत्रीय शासन, जनकल्याण पहलों, आर्थिक घटनाक्रमों और सामाजिक बदलाव को उजागर करती है और पाठकों को उत्तर भारत की घटनाओं की स्पष्ट व भरोसेमंद समझ देती है।

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