रक्षाबंधन का त्योहार पूरे देश में भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह के प्रतीक के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। आमतौर पर इस खास अवसर पर राजस्थान सरकार राज्य परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराती है। हालांकि, राजस्थान के जोधपुर शहर में इस वर्ष एक बेहद अनोखी और दिल को छू लेने वाली सामाजिक पहल देखने को मिली है। यहाँ के स्थानीय ऑटो चालक धनराज दाधीच ने अपनी दिवंगत बहन की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने के मकसद से शहर की सभी बहनों के लिए नि:शुल्क ऑटो रिक्शा सेवा की शुरुआत की है। त्योहार के दिन सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम 5:00 बजे तक शहर में आवाजाही करने वाली किसी भी महिला से ऑटो का कोई किराया नहीं वसूला जाएगा। यह पहल न केवल एक साधारण जनसेवा है, बल्कि एक भाई का अपनी स्वर्गीय बहन के प्रति निश्छल और भावुक नमन भी है।
बहन के जाने का दर्द और सेवा की प्रेरणा
धनराज दाधीच के लिए रक्षाबंधन का पावन दिन अपार खुशियों के साथ-साथ एक गहरा व्यक्तिगत दुख भी लेकर आता है। कई वर्ष पहले रक्षाबंधन के ही दिन उनकी सगी बहन का अचानक निधन हो गया था। इस अप्रत्याशित आघात ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया था, लेकिन उन्होंने अपने इस व्यक्तिगत दर्द को समाज कल्याण के मार्ग पर मोड़ने का फैसला किया। बहन की पावन स्मृतियों को अपने हृदय में संजोकर धनराज बीते कई वर्षों से रक्षाबंधन के अवसर पर अलग-अलग रूपों में जनसामान्य और महिलाओं की नि:शुल्क सेवा करते आ रहे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि भले ही उनकी अपनी बहन अब इस भौतिक संसार में उनके साथ नहीं है, परंतु शहर की अन्य बहनों की सहायता करके वे अपनी बहन की मौजूदगी का एहसास हर पल कर सकते हैं।
इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए इस बार उन्होंने व्यक्तिगत स्तर के बजाय एक संगठनात्मक ढांचा तैयार किया है। उन्होंने स्थानीय परिवहन संगठन न्यू जोधाणा ऑटो रिक्शा समिति के साथ हाथ मिलाया है। इस सामूहिक प्रयास के तहत पूरे जोधपुर शहर में 25 से भी अधिक ऑटो चालकों का एक बड़ा दल इस सेवा कार्य के लिए समर्पित रूप से मैदान में उतरा है। सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे के समयांतराल में अपने भाइयों के घर राखी बांधने जाने वाली अथवा वापस लौटने वाली बहनों को उनके गंतव्य स्थान तक पूरी तरह नि:शुल्क पहुँचाया जा रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य ध्येय यही है कि त्योहार के दिन यातायात के साधनों को लेकर महिलाओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
न्यू जोधाणा ऑटो रिक्शा समिति का सराहनीय सहयोग
इस पूरे सेवा अभियान का कुशलतापूर्वक संचालन न्यू जोधाणा ऑटो रिक्शा समिति द्वारा किया जा रहा है। समिति के प्रमुख पदाधिकारियों ने इस जनहितैषी कार्य को अमलीजामा पहनाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। संगठन के अध्यक्ष बाबूलाल राव, कोषाध्यक्ष बीएस राठौर, सचिव शांतिलाल चंदेल और खुद मीडिया प्रभारी धनराज दाधीच दिन-रात इस व्यवस्था की निगरानी में जुटे हुए हैं। इसके अतिरिक्त समिति के अन्य सक्रिय सदस्य जैसे गोपाल सिंह, शांतिलाल पवार, अचल सिंह, गोपाल सिंह भाटी और गजेंद्र सिंह इंदा भी पूरी निष्ठा के साथ ऑटो चालकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और सुचारू परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे हैं।
न्यू जोधाणा ऑटो रिक्शा समिति का मुख्य कार्यालय जोधपुर स्थित आरटीओ ऑफिस के पास, गैलेक्सी स्कूल के ठीक सामने गली नंबर 18 में स्थित है। कार्यालय से ही सभी चालकों को दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं ताकि शहर के किसी भी कोने में यात्रियों को परेशानी न हो। समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का सर्वसम्मति से मानना है कि रक्षाबंधन जैसे पवित्र अवसर पर माताओं और बहनों की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य और गर्व का विषय है। चालकों ने तय किया है कि वे व्यावसायिक लाभ को दरकिनार रखकर केवल सेवा भाव से यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाएँगे।
संपर्क सूत्र और सामाजिक प्रभाव
जोधपुर शहर की कोई भी महिला या उनका परिवार इस नि:शुल्क ऑटो सेवा का लाभ उठाने के लिए समिति द्वारा जारी विशेष हेल्पलाइन नंबरों पर सीधे संपर्क साध सकता है। समिति ने आम जनता की सुविधा के लिए 9413870008, 9783925135, 7062726111 और 9799726768 ये चार मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए हैं। इन नंबरों पर फोन करके बहनें अपने स्थान की जानकारी दे सकती हैं और निकटतम ऑटो चालक तुरंत उन्हें लेने पहुँचेगा। इस व्यवस्था से विशेषकर उन महिलाओं को भारी राहत मिल रही है जिन्हें सार्वजनिक बसों की अत्यधिक भीड़ के कारण यात्रा करने में परेशानी होती थी।
धनराज दाधीच की यह अनूठी पहल इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अगर इंसान चाहे तो अपने गहरे से गहरे व्यक्तिगत गम को भी निस्वार्थ समाजसेवा का जरिया बना सकता है। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जब हजारों बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने निकलती हैं, तब धनराज और समिति के साथी ऑटो चालक उन्हें सुरक्षित और सुगम यात्रा करवाकर उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास कर रहे हैं। जोधपुर में शुरू हुई यह भावुक पहल आज पूरे प्रदेश में भाई-बहन के निश्छल रिश्ते, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक सरोकार की एक अनुपम मिसाल बनकर उभर रही है।



















