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बांसवाड़ा में जैन मंदिर पर चोरों का धावा, भगवान पार्श्वनाथ और शांतिनाथ की अष्टधातु प्रतिमाएं चोरीराजस्थान
31 अग॰ 2026, 2:59 pm (55 मिनट पहले)· 2

बांसवाड़ा में जैन मंदिर पर चोरों का धावा, भगवान पार्श्वनाथ और शांतिनाथ की अष्टधातु प्रतिमाएं चोरी

बांसवाड़ा जिले के तेजपुर गांव में स्थित जैन मंदिर के ताले तोड़कर चोरों ने पार्श्वनाथ और शांतिनाथ समेत कई अष्टधातु की प्रतिमाएं और सिंहासन चुरा लिए। इस घटना के बाद से जैन समाज में भारी रोष व्याप्त है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

बांसवाड़ा जिले के सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तेजपुर गांव में स्थित जैन मंदिर में बीती रात अज्ञात चोरों ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया। चोरों ने मंदिर के मुख्य ताले तोड़कर अंदर प्रवेश किया और भगवान पार्श्वनाथ तथा भगवान शांतिनाथ की अष्टधातु से बनी मुख्य मूर्तियों समेत कई बहुमूल्य धार्मिक सामान चुरा लिए। सोमवार की सुबह जब इस घटना की जानकारी सामने आई, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और जैन समाज के लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिला। सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल की गहनता से जांच करते हुए साक्ष्य जुटाए।

रात और सूनेपन का उठाया फायदा

मंदिर से जुड़े प्रदीप जैन ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि वह रविवार की रात करीब 10:30 बजे मंदिर से अपने घर लौटे थे, और उस समय तक मंदिर के सभी ताले पूरी तरह सुरक्षित और बंद थे। इसके बाद सोमवार की सुबह जब वह लगभग 6:30 बजे दोबारा मंदिर पहुंचे, तो उन्होंने मुख्य दरवाजे के ताले टूटे हुए पाए। जैसे ही वे मंदिर के अंदर गए, उन्होंने देखा कि सारा सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा है और कई महत्वपूर्ण धार्मिक मूर्तियां तथा अन्य वस्तुएं अपनी जगह से गायब हैं।

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अष्टधातु की मूर्तियों के साथ सिंहासन भी ले उड़े चोर

मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों के अनुसार, चोर केवल मुख्य मूर्तियों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे कई अन्य कीमती सामान भी अपने साथ ले गए। चोरों ने भगवान पार्श्वनाथ और भगवान शांतिनाथ की दो मुख्य अष्टधातु प्रतिमाओं के साथ-साथ क्षेत्रपाल और पद्मावती माता की करीब दो-दो किलो वजनी अष्टधातु की मूर्तियों को भी चुरा लिया। इसके अलावा, मंदिर में रखा अष्टधातु का सिंहासन, छत्तर और कई अन्य कीमती धार्मिक सामग्रियां भी चोरी हो गई हैं। पुलिस और मंदिर प्रबंधन मिलकर चोरी गए सामान के कुल मूल्य का आकलन करने में लगे हुए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था की कमी और पुलिस जांच

स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आई है कि तेजपुर गांव का यह जैन मंदिर मुख्य रिहाइशी आबादी से कुछ दूरी पर एकांत में स्थित है। इसके अलावा, मंदिर परिसर के भीतर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के तहत कोई सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगाए गए थे। माना जा रहा है कि चोरों ने इसी कमजोरी और रात के समय वहां लोगों की कम आवाजाही का पूरा फायदा उठाया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने आसपास के रास्तों और संदिग्धों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अज्ञात आरोपियों की पहचान कर जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा, जबकि जैन समाज ने मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने और कैमरे लगवाने की पुरजोर मांग की है।

सवाल-जवाब

यह चोरी की घटना किस जिले में हुई है?
यह चोरी की घटना बांसवाड़ा जिले के सदर थाना क्षेत्र के तेजपुर गांव में हुई है।
चोर मंदिर से क्या-क्या चुरा ले गए?
चोर भगवान पार्श्वनाथ और शांतिनाथ की अष्टधातु की मूर्तियों के साथ-साथ क्षेत्रपाल और पद्मावती माता की मूर्तियां, अष्टधातु का सिंहासन और छत्तर चुरा ले गए।
घटना का पता सबसे पहले कब चला?
घटना का पता सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे चला जब मंदिर से जुड़े लोग वहां पहुंचे।
क्या मंदिर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे?
नहीं, मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हुए थे।
इस मामले में पुलिस क्या कर रही है?
पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाकर अज्ञात आरोपियों की तलाश और पहचान के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·16 मिनट पहले

यह घटना धार्मिक स्थलों की सुरक्षा में बड़ी चूक को दर्शाती है। एकांत इलाकों में स्थित मंदिरों में सीसीटीवी कैमरों और गार्ड जैसी बुनियादी सुरक्षा का अभाव अपराधियों के लिए आसान रास्ता बन जाता है। इस मामले में पुलिस के सामने मूर्तियों की बरामदगी के साथ-साथ गिरोह के अंतरराज्यीय संपर्कों को खंगालने की भी बड़ी चुनौती है, क्योंकि अष्टधातु की मूर्तियों की तस्करी से जुड़े संगठित सिंडिकेट अक्सर ऐसे सुनसान मंदिरों को ही निशाना बनाते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 मिनट पहले

रोहन का विश्लेषण बिल्कुल सटीक है। इस मामले में पुलिस के लिए सबसे अहम चुनौती यह होगी कि वह तुरंत आसपास के जिलों और संभावित तस्कर मार्गों पर खुफिया तंत्र को सक्रिय करे, क्योंकि अष्टधातु की पुरानी और बहुमूल्य मूर्तियों की चोरियां आमतौर पर किसी स्थानीय गिरोह की बजाय पेशेवर अंतरराज्यीय पुरातत्व तस्कर गिरोह का काम होती हैं। यदि शुरुआती 48 घंटों में इन मूर्तियों की सुरागकशी नहीं हुई, तो इनका गलाकर धातु के रूप में बेचे जाने या देश से बाहर तस्करी किए जाने का जोखिम अत्यधिक बढ़ जाता है।

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