लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर आए संयम लोढ़ा, विदेशी नंबर से मिली जान से मारने की धमकीमूलांक 1 और 4 वाले लोग लेते हैं सबसे अलग फैसले, जानिए इनकी कार्यशैली और ज्योतिषीय उपायऐलनाबाद के लापता परिवार पर टूटा कहर, इंदिरा गांधी नहर में पिता-बेटी के शव मिले और महिला की तलाश जारीराजस्थान के हनुमानगढ़ में नहर से पिता-बेटी के शव बरामद, लापता महिला की तलाश में जुटे गोताखोरजोधपुर से श्रीमाता वैष्णोदेवी कटरा के बीच सीधी ट्रेन सेवा शुरू, जम्मूतवी में नहीं बदलना पड़ेगा मुसाफिरानामेष राशिफल 20 अक्टूबर 2026: कामकाज में खर्चों पर नियंत्रण रखें, शनि की चाल से मिल रहे संकेतभरतपुर का यह गांव बना फूलों की खेती का गढ़, 100 बीघा जमीन पर महक उठी किसानों की किस्मतवृषभ राशिफल 20 अक्टूबर 2026: बड़ी खरीददारी टालें और अपनी जरूरतों पर दें ध्यानखाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, जयपुर की फैक्ट्री में सड़ते आचार के बीच मिलीं मरी छिपकलियांविदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की ग्रीस की विदा हो रही राजदूत से मुलाकात, मजबूत रिश्तों की तारीफ
भरतपुर का यह गांव बना फूलों की खेती का गढ़, 100 बीघा जमीन पर महक उठी किसानों की किस्मतराजस्थान
19 अक्तू॰ 2026, 9:54 pm (30 मिनट पहले)· 0

भरतपुर का यह गांव बना फूलों की खेती का गढ़, 100 बीघा जमीन पर महक उठी किसानों की किस्मत

राजस्थान के भरतपुर जिले का बुरावई गांव पारंपरिक फसलों को छोड़कर फूलों की खेती की मिसाल पेश कर रहा है। यहां के किसान 100 बीघा से ज्यादा जमीन पर गेंदा और अन्य फूल उगाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।

राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित बुरावई गांव अब कृषि क्षेत्र में अपनी एक अलग और अनूठी पहचान स्थापित कर रहा है। कभी पारंपरिक रूप से केवल गेहूं और सरसों की पैदावार के लिए जाने जाने वाले इस ग्रामीण इलाके में अब खेतों की तस्वीर बदल चुकी है। यहां के मेहनतकश किसानों ने लीक से हटकर ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरे क्षेत्र में खुशहाली की एक नई लहर दौड़ा दी है। आज इस गांव के किसान बड़े पैमाने पर फूलों की खेती से जुड़ रहे हैं और अपनी आय को कई गुना बढ़ा रहे हैं।

पारंपरिक खेती से मुंह मोड़कर अपनाया नया रास्ता

लंबे समय से भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में किसान मुख्य रूप से गेहूं और सरसों जैसी पारंपरिक फसलों की बुआई पर ही निर्भर रहे हैं। समय के साथ खेती की बढ़ती लागत और उस अनुपात में मुनाफा न मिलने के कारण किसानों के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी होने लगी थीं। लागत और आमदनी के इस असंतुलन से पार पाने के लिए अन्नदाताओं ने लीक से हटकर नए विकल्पों पर विचार करना शुरू किया। इसी बदलाव की कड़ी में बुरावई गांव के प्रगतिशील किसानों ने से करीब तीन साल पहले फूलों की खेती की तरफ कदम बढ़ाया था।

ये भी पढ़ें

महज तीन साल में हुआ बड़ा बदलाव

जब इस नए प्रयोग की शुरुआत हुई थी, तब किसानों ने बहुत ही सीमित भूमि पर फूलों के पौधे लगाए थे। शुरुआती दौर में यह एक जोखिम भरा कदम लग सकता था, लेकिन इससे मिलने वाले मुनाफे ने सारे संदेह दूर कर दिए। फसल से होने वाली बेहतर कमाई को देखकर धीरे-धीरे गांव के अन्य किसानों का भी इस तरफ रुझान बढ़ा और देखते ही देखते खेती का कुल रकबा काफी ज्यादा फैल गया। स्थानीय किसान कमल सिंह ने बताया कि पहले पूरा गांव सिर्फ पारंपरिक फसलों पर ही टिका था, लेकिन मुनाफा कम होने पर तीन साल पहले फूलों का रुख किया गया जिसके बाद से लगातार अच्छी आमदनी हो रही है और किसान इसका दायरा लगातार बढ़ा रहे हैं।

100 बीघा से अधिक जमीन पर खिल रहे फूल

बुरावई गांव में फूलों की खेती का दायरा अब बढ़कर 100 बीघा से भी अधिक जमीन तक पहुंच चुका है। इस विस्तृत क्षेत्र में गेंदा समेत कई अन्य किस्म के फूल लहलहा रहे हैं, जिनकी महक से पूरा इलाका गुलजार है। इस सफल बदलाव ने गांव की पूरी कृषि व्यवस्था और अर्थशास्त्र को ही बदलकर रख दिया है। किसान अब केवल पारंपरिक फसलों पर ही टिके रहने के बजाय ऐसी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो कम समय में बेहतर आर्थिक रिटर्न दे सकें।

भविष्य की संभावनाएं और मजबूत होती पहचान

बुरावई गांव में फूलों की खेती का लगातार बढ़ता हुआ रकबा इस बात का साफ संकेत है कि आधुनिक समय में किसान खेती के नए तौर-तरीकों को अपनाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। यदि बाजार में फूलों की मांग इसी तरह बनी रही और किसानों को उनकी उपज का उचित भाव मिलता रहा, तो आने वाले दिनों में इस कारोबार का और अधिक विस्तार होना तय है। इससे न केवल स्थानीय किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि फूलों वाले गांव के रूप में बुरावई की ख्याति दूर-दूर तक और अधिक मजबूत होगी।

सवाल-जवाब

बुरावई गांव कहां स्थित है?
बुरावई गांव राजस्थान के भरतपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है।
गांव के किसानों ने फूलों की खेती की शुरुआत कब की थी?
गांव के किसानों ने करीब तीन साल पहले फूलों की खेती करना शुरू किया था।
वर्तमान में कितने क्षेत्रफल में फूलों की खेती हो रही है?
वर्तमान में इस क्षेत्र में 100 बीघा से अधिक जमीन पर फूलों की खेती की जा रही है।
किसान मुख्य रूप से किन फसलों की खेती करते थे?
किसान पहले मुख्य रूप से गेहूं और सरसों की खेती करते थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·अभी

पारंपरिक फसलों को छोड़कर गेंदा उगाने का जोखिम तो इन्होंने उठा लिया, पर क्या आसपास के मंडियों में इनकी खपत इतनी है कि फसल खराब न हो? यह बड़ा सवाल है।

Rohan Verma@rohan-verma·अभी

करण भाई, तीन साल से किसान लगातार दायरा बढ़ा रहे हैं, इसका मतलब मांग की दिक्कत नहीं आ रही होगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp