कानून व्यवस्था और सुरक्षा ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान में एक व्यापक तकनीकी ढांचा तैयार किया जा रहा है। लगातार लंबी ड्यूटी, पारिवारिक दूरी और कार्यस्थल के तनाव से जूझते जवानों के मनोवैज्ञानिक दबाव को समय पर भांपने के लिए विभाग ने डिजिटल ट्रैकिंग की राह चुनी है। इस व्यवस्था के जरिए जवानों के तनाव स्तर, चिंता और खुद को चोट पहुंचाने जैसी प्रवृत्तियों का पूरा लेखा-जोखा ऑनलाइन सिस्टम में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि वक्त रहते आवश्यक चिकित्सीय और परामर्श सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के साथ पांच साल का साझा करार
इस पूरी वैज्ञानिक पहल को धरातल पर उतारने के लिए राजस्थान पुलिस और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के बीच पांच वर्षों के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति बनी है। इस समझौते का मुख्य केंद्र बिंदु एक सुरक्षित और गोपनीय डिजिटल प्लेटफॉर्म का निर्माण करना है। मैनचेस्टर विश्वविद्यालय में ग्लोबल मेंटल हेल्थ रिसर्च विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. विमल कुमार शर्मा इस परियोजना के तकनीकी और चिकित्सीय पहलुओं का नेतृत्व कर रहे हैं। इस सिस्टम में उनके द्वारा ईजाद किए गए ग्लोबल मेंटल हेल्थ असेसमेंट टूल (GMHAT) का प्रत्यक्ष उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जवानों में खुद को नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार पर नजर रखने के लिए एक विशेष डिजिटल रजिस्टर भी इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिसके आंकड़ों पर विश्वविद्यालय विस्तृत शोध कर समय-समय पर विश्लेषणात्मक रिपोर्ट विभाग को सौंपेगा।
चिकित्सकों का प्रशिक्षण और आगामी नवंबर की कार्ययोजना
इस व्यवस्था को लागू करने की जमीन काफी पहले से तैयार की जा रही थी। डॉ. विमल कुमार शर्मा पिछले 10 वर्षों से राजस्थान पुलिस के विभागीय चिकित्सकों को जीएमएचएटी प्रणाली के जरिए जवानों के मानसिक परीक्षण की तकनीक सिखा रहे हैं। वहीं बीते 5 वर्षों से विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की टीम पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारियों को भी मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन की बारीकियों से अवगत करा रही है। इस मिशन को बहुआयामी बनाने के लिए राजस्थान के चिकित्सा शिक्षा विभाग, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) जोधपुर और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR-NIHR) को भी साथ जोड़ा गया है। आगामी नवंबर माह में ब्रिटेन से मैनचेस्टर विश्वविद्यालय की एक विशेषज्ञ टीम राजस्थान का दौरा करेगी। इस दौरे के दौरान यह अंतिम रूप दिया जाएगा कि परियोजना के आरंभिक चरण में किन पुलिस बटालियनों अथवा जिलों के जवानों का परीक्षण शुरू किया जाए।
वैश्विक मानकों से सुरक्षा और एससीआरबी को प्रबंधन का जिम्मा
राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव शर्मा ने इस अभिनव प्रयास को बल के कर्मियों के कल्याण की दिशा में मील का पत्थर करार दिया है। डीजीपी के अनुसार, कार्यस्थल पर पुलिसकर्मियों के अवसाद और मनोवैज्ञानिक संकट को प्रारंभिक स्तर पर ही पहचान लेना सबसे बड़ी चुनौती रहा है। इस डिजिटल डेटाबेस की मदद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल लागू करने में मदद मिलेगी। राज्य स्तर पर इस पूरे डेटा नेटवर्क, सॉफ्टवेयर की देखरेख और दैनिक निगरानी की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) को सौंपी गई है, जो आंकड़ों की गोपनीयता और सुगम संचालन को सुनिश्चित करेगा।























