राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के आगामी चुनावों को लेकर राज्य का सियासी और खेल जगत काफी सरगर्म हो गया है। इस बार के चुनावी मैदान में कई बड़े राजनेताओं के वारिसों ने ताल ठोकी है, जिससे मुकाबले की तस्वीर काफी दिलचस्प हो गई है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राजनीतिक दलों और क्रिकेट संघों के भीतर अंदरूनी गोलबंदी और समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है। इन चुनावों के जरिए खेल संस्थाओं में राजनीतिक परिवारों के बढ़ते दखल पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
कौन-कौन से दिग्गज उतरे मैदान में
इस बार के चुनाव में कुल पांच जाने-माने राजनीतिक घरानों के बेटों ने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। इनमें स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के पुत्र धनंजय सिंह खींवसर, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के पुत्र पवन दिलावर, विधायक जसवंत यादव के पुत्र मोहित यादव, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवारी के पुत्र आशीष तिवारी और पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र राठौड़ के पुत्र पराक्रम सिंह राठौड़ का नाम शामिल है। इन सभी ने तय समय सीमा के भीतर अपने परचे दाखिल किए, जिसके बाद से ही प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं।
राजनीति का नया प्रवेश द्वार बना खेल
विशेषज्ञों का मानना है कि खेल संगठनों के चुनाव अब राजनीति में सक्रिय होने का एक आसान जरिया बनते जा रहे हैं। एक समय था जब शिक्षण संस्थानों के छात्र संघ चुनाव को राजनीति की मुख्यधारा में आने की पहली सीढ़ी माना जाता था, लेकिन अब क्रिकेट संघों के पदों पर कब्जा जमाना सियासी सफर तय करने का नया एंट्री प्वाइंट बन चुका है। यही वजह है कि इन पदों को हासिल करने के लिए राजनीतिक परिवारों के बीच जबरदस्त होड़ देखने को मिल रही है और सभी दिग्गज अपने बेटों को इस मैदान में उतारने में जुटे हैं।
समर्थन और रणनीति को लेकर हलचल तेज
नामांकन का दौर थमने के बाद अब विभिन्न जिला क्रिकेट संघों के बीच समर्थन हासिल करने की जोर-सर्च शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी समर्थित जिला संघों से संकेत मिल रहे हैं कि वे पार्टी संगठन और सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक ही अपनी आगामी रणनीति तय करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए धनंजय सिंह खींवसर ने कहा कि उन्हें अभी तक सरकार की तरफ से इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्देश नहीं मिले हैं, इसलिए आने वाले दिनों में राजनीतिक और खेल हलकों के रुख पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
चुनावी कार्यक्रम और आगे की प्रक्रिया
राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हो रहे इन चुनावों का पूरा शेड्यूल पहले ही जारी किया जा चुका है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद, आगामी 27 सितंबर को सभी प्राप्त पत्रों की जांच की जाएगी और इसके बाद वैध उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित होगी। इसके अगले दिन यानी 28 सितंबर को प्रत्याशी अपने नाम वापस ले सकेंगे, जिसके बाद मैदान में बचे अंतिम उम्मीदवारों की फाइनल सूची सामने आएगी। इसके बाद 29 सितंबर को मतदान संपन्न होगा और उसी दिन मतगणना के बाद चुनाव परिणामों का ऐलान भी किया जा सकता है।
एकाधिकार से निर्वाचित बोर्ड की तरफ वापसी
उल्लेखनीय है कि जब से राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई है, तब से इस एसोसिएशन का कामकाज एक विशेष एडहॉक कमेटी के हाथों में संचालित हो रहा था। अब लगभग ढाई साल के लंबे अंतराल के बाद लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराए जा रहे हैं, जिसके जरिए एक बार फिर से निर्वाचित अध्यक्ष के हाथों में एसोसिएशन की कमान आएगी। यही कारण है कि इस बार का मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है और हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक है कि 29 सितंबर को किस प्रत्याशी की जीत का सेहरा बंधेगा।
















