पाली शहर में जल जीवन के दावों की जमीनी हकीकत इन दिनों नया हाउसिंग बोर्ड इलाके की हनुमान कॉलोनी में साफ देखी जा सकती है। यहां के बाशिंदे पिछले दस दिनों से पानी की एक-एक बूंद के लिए बुरी तरह मोहताज हैं। विज्ञापनों और सरकारी दीवारों पर लिखे जाने वाले नारे कि जल ही जीवन है, इस कॉलोनी के परिवारों के लिए मात्र एक उपहास बनकर रह गए हैं। घरों के नल पूरी तरह सूखे पड़े हैं और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग यानी पीएचईडी के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर स्थिति से पूरी तरह अनजान बने हुए हैं।
दस दिनों से ठप जलापूर्ति और महंगे टैंकरों की मजबूरी
हनुमान कॉलोनी के इन बीस घरों में बीते दस दिनों से जलापूर्ति का एक बूंद पानी भी नहीं पहुंचा है। सुबह की शुरुआत से लेकर रात ढलने तक, रोजमर्रा के कामों और पीने के पानी के लिए लोग भारी परेशानी झेल रहे हैं। इस इलाके में ज्यादातर लोग मजदूरी और कड़ी मेहनत करके अपना जीवन बसर करते हैं। इन परिवारों की खून-पसीने की कमाई अब महंगे दामों पर पानी के टैंकर मंगवाने में खर्च हो रही है। इस चिलचिलाती गर्मी के मौसम में पानी का संकट स्थानीय निवासियों के लिए जी का जंजाल बन गया है।
आखिर क्यों सिर्फ इसी इलाके के घरों तक नहीं पहुंचता पानी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह जल संकट कोई अचानक पैदा हुई स्थिति नहीं है, बल्कि यह उनकी पुरानी और लगातार बनी हुई समस्या है। जब भी मुख्य पाइपलाइन से जलापूर्ति शुरू की जाती है, तो आसपास के तमाम इलाकों में पानी सुचारू रूप से पहुंच जाता है, लेकिन हनुमान कॉलोनी के इन बीस से पच्चीस घरों की नलों की टोंटियां बिल्कुल सूखी रहती हैं। जलापूर्ति का प्रेशर बहुत कम होने या फिर पाइपलाइन में किसी तकनीकी खराबी के चलते हर बार यही चुनिंदा परिवार पानी से वंचित रह जाते हैं। इस बारे में कई बार जलदाय विभाग के अधिकारियों को मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है।
मजदूर परिवारों पर दोहरी मार और प्रशासन की चुप्पी
इस कॉलोनी में निवास करने वाले अधिकांश लोग श्रमिक वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, जो दिनभर मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। पानी की इस भीषण किल्लत ने इन गरीबों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। उनके सामने हर रोज यह धर्मसंकट खड़ा होता है कि वे अपनी मजदूरी करने जाएं या फिर घर के लिए पानी का इंतजाम करें। जब स्थानीय प्रशासन और जलदाय विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं टूटी, तो मजबूर होकर इन बेबस लोगों ने कैमरे के सामने हाथ जोड़कर प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द उनके इलाके में पानी की सप्लाई बहाल की जाए।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल
बार-बार की शिकायतों और भीषण हाहाकार के बाद भी जलदाय विभाग की तरफ से दिखाई जा रही यह उदासीनता कई बड़े सवाल खड़े करती है। आखिर क्या वजह है कि शहर के बाकी हिस्सों में पानी पहुंच रहा है और सिर्फ इन्हीं बीस-पच्चीस घरों के हिस्से में सूखा है? स्थानीय लोग अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर प्रशासन कब गहरी नींद से जागेगा और इन गरीब परिवारों को इस विकट जल संकट से राहत दिलाएगा। अधिकारी कब तक इन लोगों की समस्याओं से मुंह फेरे बैठे रहेंगे, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।





















