राजस्थान के निकाय चुनाव में खाटूश्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष के पद को लेकर बना राजनीतिक गतिरोध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मतदान प्रक्रिया के दौरान गैरहाजिर रहीं कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी के मत को लेकर छिड़े कानूनी विवाद में हाईकोर्ट ने संबंधित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस साफ रुख के बाद यह तय हो चुका है कि अनुपस्थित सदस्य के वोट को चुनावी प्रक्रिया में किसी भी रूप में शामिल नहीं माना जाएगा। पालिका प्रमुख की कुर्सी का फैसला अब मतदान केंद्र में प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहे और अपने मताधिकार का उपयोग कर चुके केवल 19 पार्षदों के वोटों की गिनती के आधार पर ही निकाला जाएगा।
विनीता पूनिया की याचिका पर आया अदालत का अहम निर्देश
इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ अध्यक्ष पद की प्रत्याशी विनीता पूनिया द्वारा दायर याचिका थी। विनीता पूनिया ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान लक्ष्मी देवी के वोट और उनकी गैरमौजूदगी से जुड़े नियमों को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में चुनावी प्रक्रिया के वैधानिक नियमों का हवाला देकर सवाल खड़े किए गए थे। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को खारिज करने का आदेश जारी हुआ, जिसके चलते मतदान के दिन डाले गए 19 मतों की गिनती को आगे बढ़ाने की अनुमति मिल गई है। इस न्यायिक व्यवस्था के उपरांत खाटूश्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव की रुकी हुई प्रक्रिया का रास्ता साफ दिखाई दे रहा है, हालांकि आगामी कदम विधिक समीकरणों पर भी निर्भर करेंगे।
19 मतों के आधार पर ही तय होगा चुनावी फैसला
अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान के दिन कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी केंद्र पर उपस्थित नहीं थीं। उनकी इस गैरमौजूदगी और उसके बाद उनके मताधिकार को लेकर शुरू हुए विवाद ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को असमंजस में डाल दिया था। विवाद गहराने पर यह मामला न्यायपालिका की चौखट तक पहुंचा। अब अदालत के ताजा निर्णय ने पूरी स्थिति को स्पष्ट कर दिया है, जिसके तहत केवल उन 19 पार्षदों के मतों को ही वैध गणना का हिस्सा बनाया जाएगा जिन्होंने निर्धारित समय पर मौजूद रहकर वोटिंग में हिस्सा लिया था। यानी चुनाव परिणाम की घोषणा में किसी भी बाहरी या अनुपस्थित पार्षद का मत शामिल नहीं किया जा सकेगा।
कल जारी हो सकता है पालिका अध्यक्ष का परिणाम
विवाद सुलझने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि खाटूश्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव का आधिकारिक नतीजा कल सार्वजनिक किया जा सकता है। एक पार्षद के वोटिंग में शामिल न हो पाने के कारण पूरी चुनावी प्रक्रिया लंबे समय से अधर में लटकी हुई थी और दोनों राजनीतिक खेमों में भारी खींचतान देखने को मिल रही थी। हाईकोर्ट के निर्देश के पश्चात राज्य चुनाव आयोग के समक्ष भी आगे कदम बढ़ाने की स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। आयोग अब उन 19 वैध मतों के आधार पर ही अंतिम परिणाम का ऐलान कर सकता है। इसके साथ ही, विधिक जानकारों के अनुसार असंतुष्ट पक्ष के पास उच्च न्यायालय की डबल बेंच में इस फैसले के विरुद्ध अपील करने का कानूनी विकल्प भी खुला हुआ है।
एक वोट के इर्द-गिर्द क्यों घूमी खाटूश्यामजी की पूरी सियासत
खाटूश्यामजी नगर पालिका बोर्ड में अध्यक्ष पद की लड़ाई शुरू से ही बेहद कांटे की टक्कर वाली रही है। सदन में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों की कुल संख्या में बेहद मामूली फासला है। इस तरह के नजदीकी शक्ति संतुलन में केवल एक पार्षद की मौजूदगी या अनुपस्थिति पूरे चुनावी गणित और बहुमत के आंकड़ों को पूरी तरह पलटने की क्षमता रखती है। यही कारण रहा कि लक्ष्मी देवी के मतदान केंद्र पर समय पर न पहुंचने की घटना महज एक स्थानीय बहस बनकर नहीं रही, बल्कि इसने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया और मामला अदालत तक जा पहुंचा। उनके मतदान केंद्र न पहुंचने और उनके वोट की स्थिति को लेकर दोनों राजनीतिक दल अपनी-अपनी तरफ से परस्पर विरोधी दावे पेश कर रहे थे, जिसके बाद अंततः यह मामला कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया।
आयोग के आगामी रुख और कानूनी विकल्पों पर टिकी निगाहें
विनीता पूनिया की याचिका पर आए इस निर्णय के बाद अब पूरी प्रशासनिक और राजनीतिक निगाहें चुनाव आयोग की औपचारिक घोषणा पर केंद्रित हो गई हैं। आयोग को तय करना है कि वह तत्काल प्रभाव से 19 मतों की गिनती करवाकर विजेता का नाम घोषित करता है या फिर दूसरे पक्ष की ओर से खंडपीठ यानी डबल बेंच में याचिका दायर किए जाने की स्थिति में कोई नया विधिक पेंच सामने आता है। बहरहाल, मौजूदा स्थिति यह सुनिश्चित करती है कि अनुपस्थित कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी का वोट अब इस दौड़ से बाहर है। खाटूश्यामजी का यह मुकाबला पूरे इलाके में पहले से ही सियासी चर्चाओं के केंद्र में रहा है और कल के संभावित परिणाम से यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि नगर पालिका के शीर्ष पद की बागडोर किस राजनीतिक खेमे के हाथों में जाती है।





















