राजस्थान के करौली जिले में पांचना बांध से पानी छोड़ने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब बेहद जटिल और संवेदनशील हो गया है। शुरुआत में यह केवल नहरों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने का एक आंदोलन था, लेकिन देखते ही देखते इसने स्थानीय क्षेत्रवाद और दो प्रमुख समुदायों, मीणा और गुर्जर, के बीच वर्चस्व की लड़ाई का रूप ले लिया है। इस विवाद के कारण मंगलवार से ही करौली क्षेत्र में भारी हंगामा और प्रदर्शन देखा जा रहा है। सड़क जाम और विरोध के बीच यह मुद्दा अब एक 'मूंछ की लड़ाई' बन चुका है, जिससे जिला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ा वार और इंटरनेट पर रोक
बुधवार का दिन इस पूरे विवाद के लिए सबसे तनावपूर्ण रहा। जहां मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने केवल सड़कों को जाम किया था, वहीं बुधवार को स्थिति सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणियों और अपमानजनक शब्दों के आदान-प्रदान तक पहुंच गई। दोनों समुदायों के समर्थकों ने एक-दूसरे के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया, जिससे पूरे क्षेत्र का माहौल बिगड़ने लगा। सामाजिक सौहार्द्र को खतरा देखते हुए करौली जिला प्रशासन ने बुधवार देर रात इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद करने का कठोर निर्णय लिया। इंटरनेट बंदी अभी भी प्रभावी है, और भड़काऊ टिप्पणी करने वालों के खिलाफ अलग-अलग थानों में मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि, प्रशासन के प्रयासों से अब प्रदर्शन की गति धीमी पड़ गई है, लेकिन तनाव अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की शांति की अपील
हालात को बिगड़ता देख कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने किसान भाइयों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की हिंसा या सोशल मीडिया पर भ्रामक संदेशों से दूर रहने का आग्रह किया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि वे हमेशा किसानों के हितों के लिए उनके साथ खड़े हैं और इस कठिन समय में सभी को धैर्य बनाए रखना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा वर्ग उनकी बातों पर विचार कर रहा है, हालांकि किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों के अनुसार पानी नहीं मिला, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है।
समझौता और तकनीकी खराबी की जड़
इस विवाद के पीछे की जड़ 30 जून की रात को हुआ एक समझौता है। तीन मंत्रियों की उपस्थिति में यह तय हुआ था कि सात दिनों के भीतर यह स्पष्ट कर दिया जाएगा कि नहरों, गंभीरी नदी और गुड़ला लिफ्ट परियोजना में पानी कब छोड़ा जाएगा। साथ ही, 2026-27 के बजट में घोषित उन 21 राजस्व गांवों के लिए सिंचाई सुविधा को जल्द लागू करने का वादा किया गया था। समस्या तब शुरू हुई जब 6 जुलाई को पानी छोड़ा गया, लेकिन पांचना बांध का एक गेट जाम होने के कारण पानी टेल तक नहीं पहुंच पाया। भले ही 7 जुलाई को गेट ठीक कर लिया गया, लेकिन तब तक पानी का यह मुद्दा 'क्रेडिट वार' और जातीय अहंकार की भेंट चढ़ चुका था।
प्रशासन की चुनौती और भविष्य की राह
वर्तमान में, कमांड क्षेत्र के किसान नहरों की मरम्मत और पूरी गति के साथ पानी की आपूर्ति की मांग कर रहे हैं। गंगापुर के कुसांय गांव से शुरू हुआ यह धरना पूरे जिले में फैल गया था। गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम के अनुसार, सरकार ने पहले ही 52 करोड़ रुपये की लिफ्ट सिंचाई योजना को मंजूरी दे दी है, जिसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की निगरानी में क्रियान्वित किया जाना है। उनका आरोप है कि विपक्ष इन सकारात्मक कदमों से असहज है और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य अब पानी की निरंतर आपूर्ति बनाए रखना और भविष्य में ऐसी किसी भी जातीय टकराव की संभावना को रोकना है।











