राजस्थान में सुस्त पड़े मानसून के बीच मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। 22 अगस्त को राज्य के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा सकती हैं। जयपुर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के मुताबिक, पूर्वी राजस्थान के अलग-अलग संभागों में हल्की से मध्यम वर्षा के साथ वज्रपात का जोखिम बना हुआ है। धौलपुर और करौली जिलों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है, जिसके चलते वहां विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि यह बदलाव बेहद फौरी साबित होगा और 23 अगस्त से प्रदेश के बड़े हिस्से में मानसून की गतिविधियां फिर से सुस्त पड़ जाएंगी।
धौलपुर और करौली में भारी बारिश का अलर्ट
22 अगस्त के पूर्वानुमान के अनुसार, पूर्वी राजस्थान के धौलपुर और करौली जिलों में मौसम का असर सबसे अधिक देखने को मिल सकता है। इन दोनों जिलों में मूसलाधार बारिश के साथ बादलों की कड़क, आकाशीय बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवा के तेज झोंके चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
इसके अलावा, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राजस्थान के 15 अन्य जिलों में भी गरज-चमक के साथ बारिश का येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इन जिलों में जयपुर, अलवर, बारां, भरतपुर, बूंदी, दौसा, डीग, झालावाड़, झुंझुनूं, खैरथल-तिजारा, कोटा, कोटपूतली-बहरोड़, सवाई माधोपुर, सीकर और टोंक शामिल हैं। इन क्षेत्रों में दोपहर बाद या शाम के समय स्थानीय स्तर पर बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है।
पश्चिमी राजस्थान और शेखावाटी क्षेत्र की स्थिति
पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर संभाग में 22 अगस्त को कहीं-कहीं हल्की वर्षा की संभावना है। विशेष रूप से हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू और डीडवाना-कुचामन जिलों में गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी हवाएं चलने और बिजली चमकने का अनुमान लगाया गया है। शेखावाटी अंचल के झुंझुनूं और सीकर जिलों के साथ-साथ जयपुर व भरतपुर संभाग के हिस्सों में 22 से 24 अगस्त के दौरान हल्की से मध्यम बारिश की छिटपुट गतिविधियां जारी रह सकती हैं। श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू के आसपास 22 से 23 अगस्त के बीच रुक-रुक कर वर्षा की बौछारें पड़ने की उम्मीद है।
वहीं दूसरी ओर, पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, बालोतरा, बीकानेर, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, नागौर, पाली और फलौदी जिलों के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है। इन इलाकों में मौसम मोटे तौर पर साफ और सूखा बना रहेगा।
इन मौसमी प्रणालियों के कारण बदलेगा मौसम
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों में कई मौसमी तंत्र सक्रिय हैं, जिनका प्रभाव राजस्थान के मौसम पर पड़ रहा है। मानसून की मुख्य ट्रफ रेखा इस समय अमृतसर, मुजफ्फरनगर, लखनऊ, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश में बने निम्न दबाव वाले क्षेत्र के केंद्र, डाल्टनगंज और कोंटाई से होती हुई उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है।
इसके अतिरिक्त, उत्तरी हरियाणा और उससे सटे क्षेत्रों में समुद्र तल से लगभग 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। पूर्वी भारत में बना वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया अब कमजोर पड़कर साधारण लो प्रेशर एरिया में तब्दील हो चुका है। इन सभी प्रणालियों के मिले-जुले असर से पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राजस्थान के सीमित इलाकों में स्थानीय स्तर पर बादलों का निर्माण हो रहा है और वर्षा की स्थिति बन रही है।
23 अगस्त से फिर शुष्क होगा मौसम, बढ़ेगी तपन
22 अगस्त की बारिश के बाद राजस्थान में मानसून का असर एक बार फिर फीका पड़ जाएगा। 23 अगस्त से आगामी चार से पांच दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में भारी कमी आने की संभावना है। जोधपुर और बीकानेर संभाग के अधिकतर जिलों में अगले करीब एक सप्ताह तक मौसम पूरी तरह शुष्क रहने का अनुमान है। इसी तरह उदयपुर, कोटा और अजमेर संभाग के भी ज्यादातर क्षेत्रों में मानसूनी हवाएं कमजोर रहेंगी।
बारिश का सिलसिला रुकने से प्रदेश में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, श्रीगंगानगर में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 39.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वर्षा की अनुपस्थिति और तेज धूप के कारण आने वाले दिनों में लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
वज्रपात और आंधी के दौरान बचाव के उपाय
मौसम विज्ञान केंद्र ने आंधी, बारिश और वज्रपात के अलर्ट को देखते हुए आम जनता के लिए सुरक्षात्मक दिशानिर्देश जारी किए हैं। आकाशीय बिजली की आशंका के समय खुले मैदानों, खेतों, तालाबों या जलभराव वाले स्थानों पर रुकने से बचें।
तेज हवाओं और गरज-चमक के दौरान ऊंचे पेड़ों, कमजोर छप्परों और बिजली के खंभों या तारों के नीचे शरण न लें। कंक्रीट की पक्की इमारतों के भीतर रहना ही सबसे सुरक्षित उपाय है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को प्लग से निकाल दें और वाहन चलाते समय संयम बरतें।





















